नागाला से अवैध कोल डिपो हटाओ”; ग्रामसभा में प्रशासन के खिलाफ ग्रामीणों का बड़ा एल्गार
एनजीटी आदेशों के बावजूद धड़ल्ले से चल रहे 30 से अधिक कोल डिपो,
प्रदूषण और बीमारियों से त्रस्त ग्रामीणों ने दी आंदोलन की चेतावनी
घुग्घुस / चंद्रपुर : चंद्रपुर-घुग्घुस महामार्ग किनारे स्थित मौजा नागाला (सी) में बीते पंद्रह वर्ष से संचालित अवैध कोल डिपो के खिलाफ अब ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया है। ग्रामसभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग से 25 से 30 कोल डिपो संचालकों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की गई है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय हरित लवाद (एनजीटी) के स्पष्ट निर्देशों और प्रशासनिक आदेशों के बावजूद क्षेत्र में खुलेआम कोल डिपो संचालित किए जा रहे हैं। इससे पूरे इलाके में चौबीसों घंटे प्रदूषण का गंभीर संकट पैदा हो गया है और आम नागरिकों का जीवन दूभर हो चुका है।
ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2014 में चंद्रपुर जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया था कि जिले में कोयले का भंडारण नहीं किया जा सकता तथा नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सीआरपीसी की धारा 133 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसके बावजूद वर्षों से कोल डिपो धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं और प्रशासन की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं।
ग्राम पंचायत नागाला (सी) ने इससे पहले भी 25 मार्च 2021 को मासिक सभा में प्रस्ताव क्रमांक 9 पारित कर सभी कोल डिपो बंद करने की मांग की थी। ग्राम पंचायत द्वारा जिलाधिकारी को भेजे गए पत्र में बताया गया था कि गांव के पास करीब 32 अवैध कोल डिपो वैध-अवैध तरीके से संचालित हैं, जिनसे पिछले 15 वर्ष से प्रदूषण और ट्रैफिक की गंभीर समस्या पैदा हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि किसानों के बैलगाड़ी मार्ग तक पूरी तरह बंद हो चुके हैं।
ग्रामसभा में ग्रामीणों ने बताया कि कोयले की छलनी और लोडिंग-अनलोडिंग के दौरान उड़ने वाली धूल खेतों तक पहुंच रही है, जिससे फसलों का उत्पादन लगातार घट रहा है और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है। कई किसानों के सरकारी रास्तों को कथित रूप से जबरन घेर लिया गया है।
कोल डिपो के पास स्थित स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के स्वास्थ्य पर भी इसका गंभीर असर पड़ रहा है। गांव का तालाब प्रदूषित हो चुका है, पशुओं के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है और पेड़-पौधे तक सूखने लगे हैं। सिदुर,नागाला, अंतुर्ला में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव में दमा, खांसी, आंखों में जलन, केंसर,टीबी, सांस संबंधी बीमारियां और अन्य गंभीर रोग तेजी से बढ़ रहे हैं।
महिलाओं ने भी ग्रामसभा में गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि खेतों की ओर जाने वाले रास्तों पर भारी वाहन खड़े रहने और वाहन चालकों के दुर्व्यवहार के कारण असुरक्षा का माहौल बन गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि कोल डिपो संचालकों ने इलेक्ट्रिक डीपी और महामार्ग किनारे के रास्तों तक पर कब्जा कर लिया है। लगातार बढ़ते प्रदूषण और भारी वाहनों की कतारों से सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कई कोल व्यापारियों ने सड़क किनारे जमीन खरीदकर पुराने रास्तों पर कब्जा करना शुरू कर दिया है। वहीं कोल डिपो से निकलने वाले गंधकयुक्त पानी से जमीन की उर्वरता कम हो रही है। ग्रामीणों के मुताबिक सरकारी नियमों का खुलेआम उल्लंघन किया जा रहा है और प्रदूषण नियंत्रण के लिए जरूरी वाटर स्प्रिंकलर या पानी का छिड़काव तक दिखाई नहीं देता।
ग्रामसभा में यह भी आरोप लगाया गया कि कोयले की खरीद-बिक्री के नाम पर बड़े पैमाने पर कोयला तस्करी का खेल चल रहा है। ग्रामीणों ने दावा किया कि कुछ वर्ष पहले इस क्षेत्र में सीबीआई की रेड भी पड़ चुकी है।
जिन कोल डिपो संचालकों के नामों को लेकर कार्रवाई की मांग उठी, उनमें अजिज राजा, एसएस कांटा, राजेंद्र सिंह, प्रवीण ठक्कर, कैलाश अग्रवाल, मोनू मित्तल, राजू मालूम, श्याम काबरा, जय बजरंग बली कोल डिपो, नरेश पाटील, शिव सारडा, रोहित साहनी, पवन अग्रवाल, हर्षद ठक्कर, मोहनलाल जैन, नरेश जैन, विवेक जैन, मुन्ना जैन, मनीष अग्रवाल, मुकेश भट्टड़, पप्पू सिद्दीकी और संतोष अग्रवाल सहित अन्य संचालकों के नाम शामिल बताए गए।
ग्रामसभा में सरपंच रंजना कांबळे, उपसरपंच सुज्जन सातपूते सहित ग्राम पंचायत सदस्य और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। सभी की सहमति और हस्ताक्षरों के साथ प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया।
ग्रामीणों ने प्रशासन को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि जल्द कार्रवाई कर अवैध कोल डिपो बंद नहीं किए गए, तो आने वाले दिनों में बड़ा जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।