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नागाला (सी) के अवैध कोल डिपो पर कार्रवाई करो ! ग्रामसभा मे प्रशासन के खिलाफ नागरिकों का बड़ा एल्गार !

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नागाला (सी) के अवैध कोल डिपो पर कार्रवाई करो ! ग्रामसभा मे प्रशासन के खिलाफ नागरिकों का बड़ा एल्गार !



एन.जी.टी.आदेशों के बावजूद 25 से 30 कोल डिपो संचालित, प्रदूषण से गांवों में बढ़ रही बीमारियां

घुग्घुस / चंद्रपुर : चंद्रपुर-घुग्घुस महामार्ग किनारे स्थित मौजा नागाला (सी) में वर्ष से संचालित अवैध कोल डिपो के खिलाफ अब ग्रामीणों का आक्रोश खुलकर सामने आ गया है। ग्रामसभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर जिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग से 25 से 30 कोल डिपो के संचालकों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की गई है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय हरित लवाद (एनजीटी) के स्पष्ट निर्देशों और पूर्व में दिए गए प्रशासनिक आदेशों के बावजूद क्षेत्र में खुलेआम कोयला डिपो संचालित किए जा रहे हैं। इससे पूरे इलाके में चौबीस घंटे प्रदूषण का गंभीर संकट पैदा हो गया है।

ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 2014 में चंद्रपुर जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा जारी पत्र में स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि जिले में कोयले का भंडारण नहीं किया जा सकता और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सीआरपीसी की धारा 133 के तहत कार्रवाई की जाएगी। इसके बावजूद वर्षों से कोल डिपो जारी हैं और प्रशासन की चुप्पी पर सवाल उठने लगे हैं।

ग्राम पंचायत नागाला (सी) ने इससे पहले भी 25 मार्च 2021 को मासिक सभा में प्रस्ताव क्रमांक 9 पारित कर सभी कोल डिपो बंद करने की मांग की थी। ग्राम पंचायत द्वारा जिलाधिकारी को भेजे गए पत्र में बताया गया था कि गांव के पास लगभग 32 अवैध कोल डिपो वैध-अवैध तरीके से संचालित हैं, बीते पंद्रह वर्ष से प्रदुषण और ट्राफिक समस्या के कारण  किसान, विद्यार्थियों और आम नागरिकों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। वहीं किसानों के लिए बैलबंडी का मार्ग पुरी तरह बंद है।

ग्रामीणों ने बताया कि कोयले की छलनी मारते समय कोल डेपो से उड़ने वाली धूल खेतों तक पहुंच रही है, जिससे फसलों का उत्पादन घट गया है और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हो रहा है। किसान के सरकारी रास्ते को जबरन, दादागिरी से बाल कंपाउंड से घेर लिया गया।वहीं, कोल डिपो के पास स्थित स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के स्वास्थ्य पर भी इसका बुरा असर पड़ रहा है। गांव के तालाब का पानी प्रदूषित हो चुका है और पशुओं तक के स्वास्थ्य पर खतरा मंडरा रहा है।पेड पौधे सभी सुख गए हैं।ग्रामसभा में यह भी आरोप लगाया गया कि कोल डिपो के कारण गांवों में दमा, खांसी,आंख कि जलन, केंसर,टीबी,सांस लेने में तकलीफ और अन्य गंभीर बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। महिलाओं ने भी शिकायत की कि खेतों की ओर जाने वाले रास्तों पर भारी वाहन खड़े रहने और वाहन चालकों के दुर्व्यवहार के कारण उन्हें असुरक्षा का सामना करना पड़ रहा है। इलेक्ट्रिक डीबी और महामार्ग के किनारे रास्ता को कोल डेपो संचालको ने घेर लिया है। महामार्ग के किनारे बढ़ते प्रदुषण और वाहन के कतार से दुर्घटना का प्रमाण बढ गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि कई कोल व्यापारियों ने सड़क किनारे की जमीन खरीदकर पुराने रास्तों पर कब्जा करना शुरू कर दिया है, जिससे किसानों की आवाजाही बाधित हो रही है। साथ ही कोल डेपो से निकलने वाले गंधकयुक्त पानी से जमीन की उर्वरता भी कम हो रही है। सरकारी नियमों का सरासर उल्लंघन किया जा रहा है।वाटर स्प्रिंगल,पाणी छीडकाव दुर तक नहीं दिखाई देते हैं।कोल डेपो से कोयला खरेदी बिक्री के नामपर कोयला तश्करी बडे पैमाने पर सुरू है।बीते कुछ वर्ष पूर्व सीबीआई कि रेड भी गीर चुकी थी।

ग्रामसभा में जिन कोल डिपो संचालकों के नामों को लेकर कार्रवाई की मांग उठी, उनमें अजिज राजा, एसएस कांटा, राजेंद्र सिंह, प्रवीण ठक्कर, कैलाश अग्रवाल, मोनू मित्तल, राजू मालूम, श्याम काबरा, जय बजरंग बली कोल डिपो, नरेश पाटील, शिव सारडा, रोहित साहनी, पवन अग्रवाल, हर्षद ठक्कर, मोहनलाल जैन, नरेश जैन, विवेक जैन, मुन्ना जैन, मनिष अग्रवाल, मुकेश भट्टड़, पप्पू सिद्दीकी और संतोष अग्रवाल सहित अन्य संचालकों के नाम शामिल बताए गए।

ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि अवैध कोल डिपो पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में बड़ा जनआंदोलन खड़ा किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।

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