“सीओ हटाओ, नगर परिषद बचाओ”—घुग्घुस में जनता का फूटा गुस्सा
पानी, सफाई, सड़क और प्रदूषण से त्रस्त जनता बोली — नेताओं को विकास नहीं, सिर्फ राजनीति की चिंता
पांच-छह महीनों से आंदोलन और प्रेस कॉन्फ्रेंस की नौटंकी, शहर की समस्याएं जस की तस
घुग्घुस : घुग्घुस नगर परिषद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी राजनीतिक घमासान अब जनता के गुस्से का कारण बनता जा रहा है। शहर की मूलभूत समस्याओं से परेशान नागरिकों ने अब खुलकर “सीओ हटाओ, नगर परिषद बचाओ” का नारा बुलंद करना शुरू कर दिया है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि पिछले पांच-छह महीनों से नगर परिषद में सत्ता और विपक्ष केवल एक-दूसरे के खिलाफ आंदोलन, बयानबाजी और प्रेस क्लब की राजनीति कर जनता को गुमराह करने में जुटे हैं, जबकि शहर की हालत दिन-ब-दिन बदतर होती जा रही है।
घुग्घुस शहर में पानी की भारी किल्लत, गंदगी, खराब सड़कें, बिजली समस्या, बंद पड़ी आरो मशीनें, नलों और बोरिंग की दिक्कतों के साथ बढ़ते प्रदूषण ने आम नागरिकों का जीना मुश्किल कर दिया है। लेकिन इन गंभीर समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय नगर परिषद में नगराध्यक्ष के लिए एसी और शौचालय जैसे मुद्दों पर जोरदार बहस होने का आरोप लगाया जा रहा है।
नागरिकों का कहना है कि शहर के विकास और जनसमस्याओं को लेकर न तो नगराध्यक्ष गंभीर दिखाई दे रहे हैं और न ही नगरसेवक। आरोप यह भी लगाए जा रहे हैं कि मुख्याधिकारी निलेश रांजनकर और कुछ सत्ता व विपक्ष के नगरसेवकों ने नगर परिषद कार्यालय को “अपना निजी अड्डा” बना रखा है। जब मन किया कार्यालय पहुंचे, नहीं तो घर बैठकर ही काम चलाया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ जनप्रतिनिधि तो केवल “टूरिस्ट” बनकर रह गए हैं, जिन्हें जनता की समस्याओं से कोई लेना-देना नहीं है। इसी के चलते अब शहर में सीओ निलेश रांजनकर समेत गैरजिम्मेदार नगरसेवकों को हटाने की मांग तेज हो गई है।
घुग्घुस की जनता ने जिला प्रशासन से नगर परिषद के कामकाज की उच्चस्तरीय जांच कराने, समय पर अनुपस्थित रहने वाले नगरसेवकों और अधिकारियों पर कार्रवाई करने तथा नगर परिषद प्रशासन में व्यापक सुधार करने की मांग की है।
नागरिकों का कहना है कि उन्हें राजनीति नहीं, बल्कि शहर का विकास चाहिए। पानी, सफाई, सड़क और प्रदूषण जैसी समस्याओं से स्थायी राहत दिलाने के लिए प्रशासन तत्काल हस्तक्षेप करे, यही घुग्घुसवासियों की सबसे बड़ी मांग बन चुकी है।