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1962 हेल्पलाइन और व्हाट्सऐप चैटबॉट से किसानों के द्वार पहुंच रही पशु चिकित्सा सेवाएं

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1962 हेल्पलाइन और व्हाट्सऐप चैटबॉट से किसानों के द्वार पहुंच रही पशु चिकित्सा सेवाएं



पांच वर्षों में 8 लाख से अधिक पशुओं का उपचार, अब घर बैठे मिलेगी पशु चिकित्सकों की सलाह


चंद्रपुर, ()3 जून। पशुपालकों और किसानों के लिए पशु चिकित्सा सेवाओं को अधिक सुलभ और प्रभावी बनाने की दिशा में महाराष्ट्र सरकार द्वारा शुरू की गई 1962 टोल-फ्री हेल्पलाइन एक सफल पहल साबित हो रही है। पशुसंवर्धन विभाग, महाराष्ट्र शासन, भारत फाइनेंशियल इंक्लूजन लिमिटेड (BFIL) और इंडसइंड बैंक के संयुक्त सहयोग से संचालित इस सेवा के माध्यम से पिछले पांच वर्षों में 8 लाख से अधिक पशुओं का उपचार किया जा चुका है।

पशु चिकित्सा सेवाओं को और अधिक तेज तथा सुविधाजनक बनाने के लिए अब व्हाट्सऐप आधारित चैटबॉट सेवा भी शुरू की गई है। किसान और पशुपालक +91 9063142299 नंबर पर “HI” संदेश भेजकर अपने पशुओं से संबंधित बीमारियों, उपचार, टीकाकरण, सरकारी योजनाओं तथा अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त कर सकते हैं।

चैट, ऑडियो और वीडियो कॉल पर मिलेगी विशेषज्ञ सलाह

नई सुविधा के तहत पशुपालक पशु चिकित्सा विशेषज्ञों से चैट, ऑडियो कॉल या वीडियो कॉल के माध्यम से सीधे संपर्क कर सकते हैं। इससे पशुओं की बीमारी का समय पर निदान और उपचार संभव हो सकेगा।

आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर 2025 से मई 2026 के बीच राज्य के 615 किसानों ने इस चैटबॉट सेवा का उपयोग किया है, जबकि 201 वीडियो कंसल्टेशन सफलतापूर्वक पूरे किए गए हैं।

समय और खर्च की होगी बचत

इस पहल के माध्यम से किसानों को घर बैठे पशु चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं। इससे न केवल समय और धन की बचत हो रही है, बल्कि पशुधन के स्वास्थ्य में भी उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल रहा है। आपात स्थिति में त्वरित मार्गदर्शन मिलने से पशुओं की मृत्यु दर कम करने में भी मदद मिल रही है।

किसानों से अधिकाधिक लाभ उठाने की अपील

पशुसंवर्धन आयुक्त डॉ. किरण पाटील ने राज्य के सभी पशुपालकों और किसान भाइयों से 1962 टोल-फ्री हेल्पलाइन और व्हाट्सऐप चैटबॉट सेवा का अधिक से अधिक उपयोग करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के माध्यम से पशु चिकित्सा सेवाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने का यह महत्वपूर्ण प्रयास है, जिससे किसानों को सीधा लाभ मिलेगा।

पशुपालकों के लिए यह सुविधा पशुधन के बेहतर स्वास्थ्य, त्वरित उपचार और वैज्ञानिक पशुपालन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

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