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महामाया कोल वॉशरी पर कार्रवाई से मचा घमासान!

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महामाया कोल वॉशरी पर कार्रवाई से मचा घमासान!



प्रदूषण बनाम रोजगार की जंग तेज, एक ओर किसान तो दूसरी ओर बेरोजगार सड़क पर


घुग्घुस :

घुग्घुस-बेलसणी मार्ग स्थित विवादित महामाया कोल वॉशरी को महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPCB) द्वारा बंद रखने के आदेश के बाद क्षेत्र में नया विवाद खड़ा हो गया है। एक ओर प्रदूषण से परेशान किसान वॉशरी बंद रखने की मांग पर अड़े हैं, तो दूसरी ओर रोजगार छिनने से सैकड़ों मजदूर और स्थानीय नागरिक कंपनी को तत्काल शुरू करने की मांग को लेकर आंदोलन पर उतर आए हैं।

मंगलवार को बेलसणी, मुर्सा और म्हातारदेवी गांव के लगभग 400 से 500 महिला-पुरुषों ने महामाया कोल वॉशरी के मुख्य गेट पर प्रदर्शन किया। आंदोलनकारियों ने महाप्रबंधक चौधरी को ज्ञापन सौंपते हुए कंपनी को शीघ्र शुरू कर स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने की मांग की।

प्रदूषण के आरोपों से घिरी वॉशरी

महामाया कोल वॉशरी शुरू होने के बाद से ही लगातार विवादों में रही है। किसानों का आरोप है कि वॉशरी से उड़ने वाली कोयले की धूल ने हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि की फसल बर्बाद कर दी है। इसके अलावा वॉशरी से निकलने वाला काला और दूषित पानी नालों में छोड़ा जा रहा है, जिससे खेतों और पशुओं को भारी नुकसान हो रहा है।

आरोप यह भी हैं कि कंपनी ने बाउंड्री वॉल की ऊंचाई से अधिक कोयले का भंडारण किया, निजी बोरवेल से पानी उठाया, सड़क किनारे चौबीसों घंटे भारी वाहनों की कतार लगने से दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा और किसानों को 68 लाख 864 रुपये के मुआवजे का भुगतान अब तक नहीं किया गया।

लगातार शिकायतों के बाद MPCB की सख्ती

स्थानीय किसानों और नागरिकों ने इन मुद्दों को लेकर जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन तथा राज्य सरकार के समक्ष कई बार शिकायतें की थीं। इसके बाद पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे, अपर मुख्य सचिव विकास खारगे के निर्देशों तथा जनप्रतिनिधि सुधीर मुनगंटीवार के हस्तक्षेप के बाद महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने 25 जून को नोटिस जारी कर वॉशरी को बंद रखने के निर्देश दिए।जिसकि चर्चा भी सदन भी जोरदार चल रहा है।वाशरी में पाणी और बिजली पर रोक नही लगी।

बताया जा रहा है कि इससे पहले भी सरकारी नियमों के उल्लंघन, कथित कोयला चोरी,चारकोल मिक्सिंग अन्य अनियमितताओं के कारण वॉशरी का संचालन रोका जा चुका था। आरोप है कि बार-बार चेतावनी के बावजूद कंपनी ने प्रदूषण नियंत्रण और नियमों के पालन को लेकर अपेक्षित सुधार नहीं किए।

किसान बनाम रोजगार: दो गुटों में बंटा इलाका

महामाया कोल वॉशरी को लेकर अब क्षेत्र दो हिस्सों में बंटता नजर आ रहा है। एक पक्ष का कहना है कि प्रदूषण ने खेती, पशुपालन और लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाला है, इसलिए नियमों का पूर्ण पालन होने तक वॉशरी नहीं खुलनी चाहिए।

वहीं दूसरा पक्ष कहता है कि वॉशरी बंद होने से सैकड़ों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। उनका सवाल है कि यदि जिले में अन्य प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग भी संचालित हैं तो कार्रवाई केवल एक ही कंपनी पर क्यों की जा रही है?

किसानों का दर्द: फसल बर्बाद, मुआवजा नहीं

प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि पिछले दो-तीन वर्षों से कोयले की धूल और दूषित पानी के कारण लगातार फसलें नष्ट हो रही हैं। पशुओं की मौत, बीमारियों में बढ़ोतरी और बढ़ते कर्ज ने किसानों की आर्थिक स्थिति खराब कर दी है। उनका कहना है कि पहले नुकसान की भरपाई और प्रदूषण पर स्थायी नियंत्रण सुनिश्चित किया जाए, उसके बाद ही वॉशरी संचालन पर विचार हो।

कंपनी का पक्ष भी सामने आया

महामाया कोल वॉशरी के महाप्रबंधक चौधरी ने दावा किया कि कंपनी ने शासन और प्रशासन के निर्देशों के अनुसार वॉटर स्प्रिंकलर बढ़ाए हैं, बाउंड्री वॉल ऊंची की है, सड़क सुधार का कार्य शुरू किया है तथा कोयले के भंडारण को निर्धारित सीमा में व्यवस्थित किया है। उनका कहना है कि प्रदूषण नियंत्रण के लिए आवश्यक उपाय किए जा रहे हैं और कंपनी पर अनावश्यक दबाव बनाकर बंद रखने का नोटिस जारी किया गया है।

अब सबसे बड़ा सवाल…

क्या पहले किसानों को न्याय मिलेगा या बेरोजगारों को रोजगार? क्या प्रदूषण नियंत्रण के सभी मानकों का पालन होने के बाद ही वॉशरी शुरू होगी, या बढ़ते जनदबाव के बीच प्रशासन कोई नया रास्ता निकालेगा? या नेताओं कि आपस में रस्सी तानी खिची चलती रहेंगी पूरे क्षेत्र की नजर अब प्रशासन और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अगले फैसले पर टिकी हुई है।

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