
चंद्रपुर जिला परिषद के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर उठे सवाल
अधिकारी मौन, ठेकेदारों की मनमानी और राजनीतिक ठेकेदारी के आरोप; स्वतंत्र तकनीकी जांच और ऑडिट की मांग
चंद्रपुर : जिला परिषद के निर्माण विभाग के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। एक कथित रूप से घटिया निर्माण कार्य का वीडियो सामने आने के बाद सड़क, नाली, पुल और अन्य विकास कार्यों की गुणवत्ता की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराने की मांग जोर पकड़ रही है।
स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाले कई विकास कार्यों में निर्धारित मानकों के अनुसार गुणवत्ता नहीं रखी जा रही है। इसके लिए केवल ठेकेदार ही नहीं, बल्कि कथित राजनीतिक हस्तक्षेप और प्रशासनिक स्तर पर निगरानी की कमी को भी जिम्मेदार बताया जा रहा है।
राजनीतिक ठेकेदारी का आरोप
आरोप है कि कई स्थानों पर राजनीतिक दलों से जुड़े कार्यकर्ता और पदाधिकारी सरकारी निर्माण कार्यों के ठेकेदार बन गए हैं। कुछ ठेकेदारों पर राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल कर सरकारी काम हासिल करने और बाद में निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से समझौता करने के आरोप लगाए जा रहे हैं।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना बाकी है। ऐसे में संबंधित विभाग द्वारा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच किए जाने की आवश्यकता जताई जा रही है।
जनता के पैसों से समझौता क्यों?
सरकारी विकास कार्यों के लिए खर्च होने वाला पैसा आखिरकार जनता से प्राप्त राजस्व का हिस्सा होता है। ऐसे में यदि किसी निर्माण कार्य में गुणवत्ता से समझौता होता है, तो उसका सीधा नुकसान ग्रामीण नागरिकों को उठाना पड़ता है।
सवाल यह भी उठाया जा रहा है कि निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जांचने की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों और तकनीकी कर्मचारियों पर है, यदि उनकी निगरानी में कमी रहती है तो इसकी जवाबदेही किसकी होगी?
स्वतंत्र तकनीकी जांच की मांग
ग्रामीण क्षेत्रों में जिला परिषद के अंतर्गत चल रहे निर्माण कार्यों की स्वतंत्र तकनीकी जांच, गुणवत्ता परीक्षण और नियमित ऑडिट कराने की मांग की जा रही है।
साथ ही निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाली सामग्री, निर्धारित मापदंड, कार्य की लागत और वास्तविक गुणवत्ता की जांच कर दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग भी उठ रही है।
‘प्रशासन अब तो जागे’
जनता के पैसे से होने वाले प्रत्येक विकास कार्य में पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। इसलिए संबंधित विभाग को वायरल वीडियो में दिखाई दे रहे निर्माण कार्य सहित जिले के अन्य संदिग्ध निर्माण कार्यों की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की जा रही है।
अब देखना यह होगा कि जिला परिषद का निर्माण विभाग इन आरोपों को गंभीरता से लेकर संबंधित कार्य की तकनीकी जांच कराता है या नहीं। साथ ही यदि जांच में निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाया जाता है, तो जिम्मेदार ठेकेदार और संबंधित अधिकारियों पर क्या कार्रवाई होती है, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।










