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घुग्घुस शहर में 1500 वा ईद-मिलादुन्नबी त्यौहार मनाया गया।

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घुग्घुस शहर में 1500 वा ईद-मिलादुन्नबी
त्यौहार मनाया गया।



नाते ए पाक,सलाम,शेर ,पढ़ते हुए,नारे के साथ लोग झुम रहे थे।


घुग्घुस :
चंद्रपुर जिले के घुग्घुस शहर में हर साल कि तरह इस साल भी इस्लाम धर्म में पैगंबर मोहम्मद मुस्तफा सल्लाहो-अलैह- व-सल्लम के 1500 वा सालाना जन्मदिन के मौके पर ईद ए मिलादुन्नबी का त्यौहार बडे हर्षोल्लास से मनाया गया।
शहर में सुबह और शाम के समय दो प्रमुख ठिकाने से आतीषबाजी ,घोड़े के साथ विशाल‌ जुलूस निकालकर मोहम्मद का मिलाद धुमधाम से मनाया गया।
शहर मे सुरुवात कि पहली रैली सुबह चांद शहा वली बाबा के दरगाह से निकलती है। वही दुसरी रैली, शाम जमाल ए मिल्लत नई मस्जिद घुग्घुस से निकलकर दोनों का समापन जुने घुग्घुस नुरी जामा मस्जिद में हुआ।
सडक,चौराहे,गली गली,घर घर मे जगह जगह मुस्लिम बंधु, तथा सर्वधर्म समाज द्वारा मिठाई,पूलाव, बिस्किट,चाकलेट,थंडा,लड्डू,पाणी बांटी गई।
इस वर्ष यादे हुसैन कमेटी द्वारा जुलूस में विशेष:त यह रखी थी कि डीजे साउण्ड सिस्टम में केवल नात,सलाम,के साथ साथ मुस्लिम धार्मिक शेर पढ़ते हुए नारे के साथ केवल रश्क कर रहे थे।

हाफ़िज़ नज़ीर अहेमद(अकोला),हाफीज अम्मार रजा कादरी(नागपुर),फैज रजा कादरी (नागपुर),हाफीज शमीम रजा,(घुग्घुस),गुलाम अहेमद रजा पुरानी(चंद्रपुर) अदी ने नात ए मुस्तफा के साथ साथ समाजिक शेर पढी है।

जुलूस में सर्वधर्म समभाव व संस्कृति तथा एकता का मिसाल देखने को मिला।
हुजुर मोहम्मद मुस्तफा का 1500 वा जन्मदिन वर्ष एक ऐतिहासिक दिन के रूप में मनाने के लिए जगह जगह आकर्षक सेज ओ सजावट कि गई थी। मक्का मदीना कि झांकी,और घोड़े में बैठे बच्चो को देखकर समाज के प्रति बडी उत्सुर्फता हो रही थी।
जुलूस में सामिल केवल मुस्लिम भाई ही नहीं थे।बल्कि सभी समाज के बुढ़े,बच्चे,जवान,महीला,पुरूष , अदी के लोग रैली में शामिल होकर एक-दूसरे को गुलाब,पुष्पगुच्छ,फुलपंखुडी, देकर गले में फुल हार डालकर मुबारक बाद पेश कि,यह त्यौहार मुसलमान का प्रमुख त्यौहार माना जाता है क्योंकि इस दिन इस्लाम धर्म के संस्थापक मोहम्मद मुस्तफा सब से अफजल नबी मोहम्मद मुस्तफा बारा रबी उल अव्वल के दिन सुबह सादीक के समय दुनिया में हीदायत देने के लिए तशरीफ लाए थे।खुदा ने खुद अपने महेबुब कि मिलाद मनाई है।जिसका जिक्र कुरान पाक में भी किया गया है।
इस लिए इस्लाम समाज के लिए यह दीन दुनिया में सबसे अफजल माना जाता है।घुग्घुस शहर में त्यौहार परचम कुशाई के साथ नात,सलाम,तकरीर पढते पढ़ते सरकार का नारा, आतीषबाजी की धुन कानो में कई दुर तक कानों में सुनाई दे रही थी।घुग्घुस मे सोत्साह पुर्वक ईद ए मिलादुन्नबी का त्यौहार मनाया गया।

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