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महामिनरल वाशरी से शुद्ध कोयले का महाघोटाला

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महामिनरल वाशरी से शुद्ध कोयले का महाघोटाला



कोयला सफाई के नाम पर “हाथ की सफाई”, काले हीरे पर मिट्टी की परत!


ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण दोनों खतरे में, अरबों का नुकसान


घुग्घुस | विशेष रिपोर्ट
चंद्रपुर जिले और यवतमाल जिले की वणी तहसील में स्थित महामिनरल कोल वाशरी बीते कई वर्षों से कोयला तस्करी के काले खेल का अड्डा बन चुकी है। उसगांव महामिनरल वाशरी के बाजु मे लाखों टन बैड मटेरियल,चारफाईन,काला धुल जमा करके कोयला धुलाई और सफाई की आड़ में यहां “हाथ की सफाई” का सुनियोजित धंधा खुलेआम चल रहा है,अच्छे कोयलें को आंध्रप्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र अदी राज्य में महेंगे दाम में बेचा जाता है।कोयला तश्करो ने देश की ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण—दोनों को गंभीर खतरे में डाल दिया है।

सूत्रों के अनुसार, महामिनरल वाशरी में घटिया, धूल-मिश्रित और चारफाइन युक्त कोयले को शुद्ध कोयले में मिलाकर उसे “धुला हुआ कोयला” बताकर बाजार और पावर प्लांट्स में भेजा जा रहा है। यह पूरा खेल इतने शातिर तरीके से रचा गया है कि वाशरी अब धुलाई केंद्र नहीं, बल्कि धोखाधड़ी का केंद्र बनती जा रही है।

तीन इलाकों से एक ही खेल

चंद्रपुर जिले के वेकोलि बल्लारपुर–सास्ती खदान क्षेत्र, घुग्घुस–उसगांव,और वणी–पिपलगांव—इन तीनों स्थानों पर स्थित महामिनरल कोल वाशरी में एक ही पैटर्न पर कोयला मिक्सिंग की जा रही है।
कम गुणवत्ता वाले खराब कोयले को धुलाई के नाम पर अच्छे कोयले में मिलाकर राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा से सीधा खिलवाड़ किया जा रहा है।

रेलवे साइडिंग से महाघोटाला

बताया जा रहा है कि पिछले कई वर्षों से
➡️ तडाली रेलवे साइडिंग,
➡️ वणी रेलवे साइडिंग,
➡️ बल्लारपुर–सास्ती–पांढरपौणी रेलवे साइडिंग से सैकड़ों-हजारों टन चारफाइन और धूल-मिश्रित कोयला नागपुर के कोराडी पावर प्लांट (महाजेनको) सहित अन्य स्थानों पर भेजा जा रहा है।

यह न सिर्फ सरकार के साथ सीधी धोखाधड़ी है, बल्कि आम जनता के हितों पर भी करारा प्रहार है।

कोयला तस्करी के नए तरीके

आम तौर पर खदानों से निकले कोयले को
➡️ गैरकानूनी तरीके से अलग-अलग रूपों में खुले बाजार में बेचा जा रहा है,
➡️ कम गुणवत्ता वाले कोयले को अच्छे कोयले की तरह पेश किया जा रहा है,
➡️ धुलाई के नाम पर देश के साथ अब तक की सबसे बड़ी ऊर्जा धोखाधड़ी की जा रही है।

इसका सीधा असर
🔴 सरकारी राजस्व पर,
🔴 पर्यावरण पर,
🔴 और जनता के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
पावर प्लांट्स को भारी नुकसान कम गुणवत्ता और धूल-मिश्रित कोयले के उपयोग से
➡️ प्रदूषण कई गुना बढ़ रहा है,
➡️ कोयले की जलने की क्षमता घट रही है,
➡️ ऊर्जा उत्पादन महंगा और कम प्रभावी हो रहा है,
➡️ पावर प्लांट्स की उत्पादन क्षमता घट रही है,
➡️ बॉयलर और महंगे कलपुर्जे खराब हो रहे हैं।

इससे कोराडी पावर प्लांट सहित बड़े उद्योगों को करोड़ों-अरबों रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है, और अंततः इसका बोझ आम जनता पर महंगी बिजली के रूप में डाला जा रहा है।

प्रशासन–पुलिस–नेताओं के गठजोड़ का आरोप

सूत्रों के मुताबिक, इस कोयला तस्करी के काले जाल में
➡️ कोयला तस्करों के साथ
➡️ कुछ भ्रष्ट शासन-प्रशासन के अधिकारी,
➡️ कुछ लोकप्रतिनिधि,
➡️ और पुलिस विभाग के कुछ जिम्मेदार लोगभी शामिल बताए जा रहे हैं।यही कारण है कि इतने बड़े पैमाने पर तस्करी होने के बावजूद कार्रवाई न के बराबर दिखाई दे रही है।

सच रेलवे साइडिंग पर साफ दिखता है

तडाली और वणी रेलवे साइडिंग पर दिन-रात
👉 मलाईदार कोयले में
👉 बैड मटेरियल और चारफाइन मिलाकर
👉 लाखों टन खराब कोयला
कोराडी पावर प्लांट की ओर रवाना किया जा रहा है।
यहां जाकर कोयला मिक्सिंग का असली सच आसानी से देखा जा सकता है।
उच्चस्तरीय जांच की मांग
विशेषज्ञों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जागरूक नागरिकों की मांग है कि—
🔴 महामिनरल वाशरी में हो रही कोयला तस्करी की CBI / CID से उच्चस्तरीय जांच कराई जाए,
🔴 दोषियों पर कड़ी से कड़ी सजा दी जाए,
🔴 ऊर्जा क्षेत्र में पारदर्शिता लाई जाए,
🔴 और पर्यावरण को इस संगठित अपराध से बचाया जाए।

अब सवाल यह है
क्या शासन और जांच एजेंसियां इस काले खेल पर लगाम कसेंगी,
या “कोयला सफाई” के नाम पर यह महाघोटाला यूं ही चलता रहेगा?

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