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घुग्घुस बिजली विभाग बना ‘उगाही केंद्र

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घुग्घुस बिजली विभाग बना ‘उगाही केंद्र’



मीटर नहीं, रिश्वत चाहिए! प्रशासन की चुप्पी से फल-फूल रहा भ्रष्टाचार


घुग्घुस | चंद्रपुर | एक्सक्लूसिव रिपोर्ट
औद्योगिक शहर घुग्घुस में आज बिजली कोई सुविधा नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का हथियार बन चुकी है।घुग्घुस बिजली वितरण कार्यालय में नए मीटर के नाम पर खुलेआम लूट चल रही है — और प्रशासन मूकदर्शक बना बैठा है।

गरीबों से उगाही, अमीरों को रेड कार्पेट

बस्तियों में रहने वाले गरीब, मजदूर और मध्यम वर्ग
मीटर के लिए महीनों लाइन में खड़े हैं,
लेकिन बिजली विभाग के बाबुओं का साफ संदेश है
👉 “पैसे दो, मीटर लो… वरना इंतज़ार करो।”
हजारों रुपये की अवैध ‘डिमांड’
और अगर देने में देर हुई तो
फाइलें धूल फांकती रहती हैं।
वहीं दूसरी ओर— 💰 मोटी रकम देने वालों के घर
⚡ चंद दिनों में मीटर फिट

📄 नियम-कानून जेब में!
बिजली चोरी भी ‘सेटिंग’ से वैध!
सूत्र बताते हैं कि बिजली चोरी करने वाले भी सुरक्षित हैं, बस लाइनमैन और अधिकारियों की जेब गरम होनी चाहिए।
ना कार्रवाई, ना एफआईआर—
पैसे लेकर केस रफा-दफा!

महावितरण या ‘महाभ्रष्टाचार’ विभाग?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि— ❓ क्या चंद्रपुर महावितरण अधिकारियों को यह सब दिखाई नहीं देता?
❓ या फिर ऊपर तक हिस्सा पहुंचता है?
घुग्घुस बिजली वितरण कंपनी में
भ्रष्टाचार एक-दो कर्मचारियों तक सीमित नहीं,
बल्कि यह पूरा सिस्टम बन चुका है।
प्रशासन की चुप्पी = अपराध में साझेदारी
स्थानीय नागरिक और सामाजिक कार्यकर्ता
लगातार शिकायतें कर रहे हैं,
लेकिन—
❌ न जांच
❌ न निलंबन
❌ न कार्रवाई
तो सवाल उठता है— क्या प्रशासन की चुप्पी इस लूट को संरक्षण दे रही है?
जनता पूछ रही है कि-
🔴 कब होगी विजिलेंस जांच?
🔴 कब होंगे दोषी अधिकारी निलंबित?
🔴 क्या गरीबों को बिना रिश्वत बिजली मिलेगी या नहीं?
अब अगर प्रशासन ने आंखें नहीं खोलीं,
तो यह सिर्फ भ्रष्टाचार नहीं रहेगा—
यह जनता के साथ खुली जंग होगी।

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