चमन मेटॅलिक कंपनी के खिलाफ बेमुद्दत अन्नत्याग आंदोलन,
चौथे दिन अर्धनग्न प्रदर्शन से मचा हड़कंप
घुग्घुस (चंद्रपुर):
चंद्रपुर जिले के घुग्घुस क्षेत्र में स्थितचमन मेटॅलिक प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ अब जनाक्रोश उफान पर पहुंच गया है।
लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास पासवान)
की अगुवाई में 23 मार्च से कंपनी गेट के सामने
बेमुद्दत अन्नत्याग आंदोलन जारी है, जिसका नेतृत्व जिला अध्यक्ष मनोज ठेंगणे कर रहे हैं।
आंदोलन के चौथे दिन टेन्ट मे कोई प्रशासकिय अधिकारी और डाॅक्टर टेस्टींग के लिए नही पहुंचने से प्रदर्शनकारियों ने अर्धनग्न आंदोलन कर कंपनी प्रबंधन और प्रशासन के खिलाफ तीखा विरोध दर्ज कराया, जिससे पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।
प्रदूषण से लेकर मौत तक—गंभीर आरोपों की लंबी सूची आंदोलनकारियों का आरोप है कि कंपनी से निकलने वाला घातक वायु प्रदूषण आसपास के गांवों में खेती, पशुधन और नागरिकों के स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित कर रहा है।लेकिन प्रदूषण नियंत्रण के लिए कोई ठोस उपाय नहीं किए जा रहे।
सबसे गंभीर मामला ठेका कंपनी में कार्यरत कर्मचारी
चंद्रकांत बापुराव कासवटे की मौत का है,
जो ड्यूटी से घर जाते समय कंपनी क्षेत्र में सड़क हादसे का शिकार हुए। परिजनों को अब तक कोई आर्थिक सहायता नहीं मिलने से रोष और बढ़ गया है।
मजदूरों का शोषण, स्थानीयों की अनदेखी
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि कंपनी में
स्थानीय युवाओं को नजरअंदाज कर बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है।इसके साथ ही ठेका श्रमिकों को PF, वेतन, सुरक्षा, चिकित्सा सुविधा जैसी मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिल रही हैं।
वेतन समय पर नहीं दिया जाता, ओवरटाइम का भुगतान नहीं होता, और काम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी नदारद है।
मूलभूत सुविधाओं का अभाव, महिलाओं के हक भी अनदेखे आंदोलनकारियों ने यह भी मुद्दा उठाया कि
कंपनी परिसर में न तो एम्बुलेंस और डॉक्टर की व्यवस्था है, न ही शौचालय, स्वच्छ पेयजल (RO) जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध धही हैं।
तडाली ग्राम पंचायत के अंतर्गत आने वाले
महिला बचत समूहों को रोजगार देने की मांग भी अब तक पूरी नहीं की गई है। धमकियों के आरोप, अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
प्रदर्शनकारियों ने कंपनी के कुछ अधिकारियों पर
मजदूरों को नौकरी से निकालने की धमकी देने का आरोप लगाते हुए ऐसे अधिकारियों के खिलाफ निलंबन की मांग की है।
“मांगें पूरी नहीं तो आंदोलन और उग्र होगा”
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि
यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं,
तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल इतने गंभीर आरोपों और लगातार बढ़ते आंदोलन के बावजूद
प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में
कब तक हस्तक्षेप करता है
या फिर मजदूरों का यह संघर्ष और उग्र रूप लेता है।