“यूनियन पर्ची नहीं तो कोयला नहीं!” — वेकोलि बल्लारपुर खदानों में रंगदारी का खेल, हर ट्रक से वसूली के आरोप
चंद्रपुर/बल्लारपुर | विशेष रिपोर्ट
वेकोलि बल्लारपुर क्षेत्र की कोयला खदानों से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां कथित “यूनियन पर्ची” के नाम पर खुलेआम वसूली का खेल चल रहा है। आरोप है कि बिना पर्ची के किसी भी ट्रक को कोयला लोड करने की अनुमति नहीं दी जाती—और जो मना करे, उसका ट्रक सीधे कोल स्टॉक से बाहर कर दिया जाता है।
हर ट्रक से 300 से 500 रुपये तक की वसूली
सास्ती, धोपटाला, गोवरी, पवनी और साखरी खदानों में काम कर रहे ट्रक चालकों का आरोप है कि प्रति ट्रक 300, 400 से लेकर 500 रुपये तक जबरन वसूले जा रहे हैं।गंभीर बात यह है कि इस वसूली के लिए प्रशासन की कोई आधिकारिक अनुमति नहीं है, फिर भी यह “पर्ची सिस्टम” बेखौफ जारी है।
‘सुविधा शुल्क’ से सीधी रंगदारी तक : ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि जो व्यवस्था कभी मामूली शुल्क तक सीमित थी, एक दुसरे के मदत के तौर पर पैसा जमा हुआ करता था। लेकिन वह अब पूरी तरह “रंगदारी” में बदल चुकी है।कुछ दबंग और आपराधिक प्रवृत्ति के लोग यूनियन के नाम पर ट्रक मालिकों और चालकों को धमका रहे हैं। मजबूरी में चालक पैसे देने को विवश हैं।
लाखों की वसूली, लेकिन हिसाब गायब
सूत्रों के मुताबिक, इन खदानों में रोजाना करीब 1000 ट्रक कोयला परिवहन में लगे रहते हैं।ऐसे में हर महीने लाखों—और संभवतः करोड़ों रुपये तक की वसूली “यूनियन पर्ची” के नाम पर हो रही है।सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इस पैसे का कोई ऑडिट या आधिकारिक हिसाब आखिर क्यों नहीं है? पैसे कैसे आ रहा र्है?कहा खर्च हो रहा है?
यूनियन पर असामाजिक तत्वों का कब्जा?
जानकारी के अनुसार, वर्ष 2006 में राजू यादव ने ट्रक चालकों की आर्थिक मदत के लिए एक यूनियन बनाई थी, उस समय युनियन के नाम पर केवल 50 रुपये कि पर्ची फाडकर चालक मालक से शुल्क लिया जाता था। लेकिन अब आरोप है कि ऐसे यूनियनो पर अब असामाजिक तत्वों का कब्जा हो गया है।राजू यादव की हत्या के बाद से युनियन बाजी मे हालात और भी बिगडते हूए दिख रहे।
खदानों में बढ़ती दादागिरी, गुंडागर्दी से बड़े अपराध का खतरा
इस समय खदानों में दादागिरी, गुंडागर्दी और दबाव की स्थिति इस कदर बढ़ चुकी है कि कभी भी बड़ा विवाद या हिंसक घटना हो सकती है।पहले भी इसी खदानों में यूनियन विवादों को लेकर खून-खराबा और हत्या जैसी घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे स्थिति और गंभीर मानी जा रही है।
पुलिस और प्रबंधन पर उठ रहे सवाल?
इस पूरे मामले में राजुरा पुलिस , चंद्रपुर अपराध शाखा पुलिस और वेकोलि प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।क्या प्रशासन को इस वसूली की जानकारी नहीं है, या फिर जानबूझकर अनदेखी की जा रही है?
निष्पक्ष जांच की मांग तेज
स्थानीय नागरिकों, ट्रक मालिकों और चालकों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।उनका साफ कहना है—अगर यह वसूली नियमों के तहत नहीं है, तो यह सीधा-सीधा अवैध उगाही का मामला माना जाता है।
बड़ा सवाल: क्या वेकोलि प्रबंधन और जिला पुलिस प्रशासन इस ‘यूनियन पर्ची’ के नाम पर चल रहे कथित वसूली रैकेट पर कार्रवाई करेगा, या फिर यह खेल यूं ही चलता रहेगा?