विश्व पर्यावरण दिवस पर सिदूर में सहजन (शेवगा) की खेती की शुरुआत
माविम की पहल से दो एकड़ क्षेत्र में होगा उत्पादन, किसानों की आय बढ़ाने पर जोर
चंद्रपुर, 12 जून: विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर महिला आर्थिक विकास महामंडल (माविम) से संबद्ध खुशिया लोकसंचालित साधन केंद्र, चंद्रपुर द्वारा सिदूर गांव में दो एकड़ क्षेत्र में सहजन (शेवगा) की खेती की शुरुआत की गई। इस परियोजना के तहत आगामी तीन वर्षों तक सहजन का उत्पादन किया जाएगा।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीणों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना, सिदूर गांव को सहजन क्लस्टर के रूप में विकसित करना तथा किसानों की आय में वृद्धि करना है। साथ ही पारंपरिक फसलों के अलावा वैकल्पिक एवं लाभकारी फसलों की खेती को प्रोत्साहित करना भी इस अभियान का लक्ष्य है।
कार्यक्रम में महिला आर्थिक विकास महामंडल के जिला समन्वय अधिकारी प्रदीप काठोळे, सहायक कृषि अधिकारी श्री भोयी, खुशिया लोकसंचालित साधन केंद्र की अध्यक्ष सुनीता गणफाडे, सिदूर के उपसरपंच संजय गणफाडे, केंद्र प्रबंधक शारदा हुसे, अंबुजा फाउंडेशन के क्षेत्रीय समन्वयक विवेक शेंडे, वैभवी उलामाले, संगीता ढेंगळे, रोशंती सागोरे तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।
इससे पहले गांव की 40 महिलाओं ने जीवामृत, दशपर्णी और वर्मी कम्पोस्ट (गांडूळ खाद) निर्माण का कार्य शुरू किया है। इससे गांव में रासायनिक खेती के बजाय जैविक खेती की ओर किसानों का रुझान बढ़ता दिखाई दे रहा है।
पानी फाउंडेशन के प्रशिक्षण के बाद गांव में मिश्रित कृषि समूहों का गठन किया गया है तथा लगभग 20 परिवार समूह खेती करने की तैयारी कर रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि जिले में पानी फाउंडेशन के माध्यम से संचालित फार्मर क्लब गतिविधियों में सिदूर गांव की भागीदारी उल्लेखनीय रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सहजन की खेती किसानों के लिए आय का एक बेहतर विकल्प साबित हो सकती है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और जैविक खेती को भी बढ़ावा मिलेगा।