प्रशासन की नींद तोड़ने पानी की टंकी पर चढ़ा प्रहार का नेता, जनआक्रोश के आगे झुका प्रशासन
घुग्घुस में उग्र आंदोलन: लिखित आश्वासन के बाद टला टकराव, चेतावनी वादा पूरा नहीं हुआ तो होगा आर-पार का संघर्ष
घुग्घुस /चंद्रपुर :वर्षों से लंबित जनसमस्याओं और प्रशासन की लगातार उदासीनता के खिलाफ मंगलवार तड़के घुग्घुस में उस समय हड़कंप मच गया, जब प्रहार जनशक्ति पार्टी के नेता अमोल नत्थूजी मांढरे सुबह करीब 5 बजे छत्रपति शिवाजी महाराज चौक स्थित पानी की ऊंची टंकी पर चढ़ गए और उग्र विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। अचानक हुए इस आंदोलन से पूरे शहर में सनसनी फैल गई और प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए।
अमोल मांढरे ने आरोप लगाया कि वर्षों से जनता की बुनियादी समस्याओं की अनदेखी की जा रही है। कई बार शिकायतें और निवेदन देने के बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जिसके कारण उन्हें यह कठोर कदम उठाने पर मजबूर होना पड़ा।
इन प्रमुख मांगों को लेकर फूटा जनाक्रोश
दिव्यांग नागरिकों की लंबित समस्याओं का तत्काल समाधान।नगर के मध्य स्थित तालाब की तत्काल सफाई और सौंदर्यीकरण।बड़ी कंपनियों के शिक्षण संस्थानों में गरीब एवं मेधावी विद्यार्थियों के लिए फीस माफी।गांव के बीच से गुजरने वाले भारी वाहनों का मार्ग तत्काल बदला जाए।वर्षों से लंबित अन्य जनहित के विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए।
बढ़ते दबाव के आगे झुका प्रशासन
सुबह से जारी आंदोलन के कारण माहौल लगातार तनावपूर्ण होता गया। स्थिति बिगड़ती देख नगर परिषद के मुख्याधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी सक्रिय हुए। आखिरकार अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि जिलाधिकारी कार्यालय में संबंधित विभागों की संयुक्त बैठक बुलाकर सभी मांगों पर गंभीरता से निर्णय लिया जाएगा।
प्रशासन द्वारा लिखित आश्वासन दिए जाने के बाद अमोल मांढरे ने जनहित को ध्यान में रखते हुए अपना आंदोलन फिलहाल स्थगित कर दिया।
अमोल मांढरे की दो टूक चेतावनी
आंदोलन समाप्त करने के बाद मांढरे ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि प्रशासन ने अपने लिखित आश्वासन का समय पर पालन नहीं किया, तो अगला आंदोलन पहले से कहीं अधिक उग्र होगा। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न होने पर उसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
घुग्घुस में हुए इस आंदोलन ने एक बार फिर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन अपने वादों को अमल में लाता है या फिर जनता को दोबारा सड़कों पर उतरना पड़ेगा।