वणी में कोल डिपो पर शिकंजा कसने की मांग, सरकारी टैक्स से लेकर अवैध पार्किंग तक जांच की उठी आवाज
सर्वे नंबरवार सभी वैध-अवैध कोल डिपो की जांच हो; सड़क पर खड़े कोयला वाहनों और नियमबाह्य परिवहन पर कार्रवाई की मांग
वणी, यवतमाल। वणी तहसील क्षेत्र में संचालित कोल डिपो को लेकर स्थानीय नागरिकों और संघर्ष समिति ने अब प्रशासन के सामने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। बिना आवश्यक अनुमति संचालित होने वाले कथित अवैध कोल डिपो के साथ-साथ वैध कोल डिपो की भी सर्वे नंबरवार जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग जोर पकड़ रही है।
संघर्ष समिति और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई वर्षों से क्षेत्र में कोयले का कारोबार जारी है। ऐसे में यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि संबंधित कोल डिपो जिस जमीन पर संचालित हो रहे हैं, उस जमीन का सरकारी टैक्स नियमित रूप से जमा किया जा रहा है या नहीं। प्रशासन द्वारा प्रत्येक कोल डिपो की जमीन, सर्वे नंबर, मालिकाना हक, उपयोग की अनुमति और सरकारी राजस्व की स्थिति की जांच कराई जाए।
सर्वे नंबर सामने आएं, तभी साफ होगी पूरी तस्वीर
नागरिकों की मांग है कि वणी क्षेत्र में संचालित सभी कोल डिपो की सर्वे नंबरवार सूची तैयार की जाए। इसके बाद प्रत्येक डिपो की NOC, जमीन संबंधी दस्तावेज, सरकारी टैक्स, प्रदूषण नियंत्रण संबंधी अनुमति और अन्य आवश्यक शासकीय मंजूरियों की जांच की जाए।
यदि किसी कोल डिपो में नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो केवल नोटिस तक सीमित न रहते हुए नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
सड़क पर खड़े कोयला वाहनों से दुर्घटना का खतरा
कोल डिपो के आसपास और मुख्य मार्गों पर कोयले से लदे भारी वाहनों की पार्किंग को लेकर भी नागरिकों में नाराजगी है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क किनारे घंटों भारी वाहन खड़े रहते हैं, जिससे यातायात प्रभावित होने के साथ दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है।
इस मामले में यवतमाल के पुलिस अधीक्षक तथा वणी पुलिस प्रशासन से अवैध पार्किंग और सड़क पर खड़े भारी वाहनों की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की गई है।
नागरिकों का स्पष्ट कहना है कि यदि कोयला परिवहन के लिए वाहनों की आवश्यकता है, तो उनके लिए निर्धारित पार्किंग व्यवस्था होनी चाहिए। मुख्य सड़क को पार्किंग स्थल बनाकर आम जनता की जान जोखिम में डालना किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
कोयले की काली धूल पर नियंत्रण की मांग
कोल डिपो में कोयले की लोडिंग-अनलोडिंग और वाहनों की आवाजाही के दौरान उड़ने वाली धूल को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। नागरिकों ने कोयला डिपो से होने वाले प्रदूषण पर तत्काल प्रभावी नियंत्रण की मांग की है।
महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण विभाग से कोल डिपो का निरीक्षण कर प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी जांच करने की मांग की गई है।
मुख्यमंत्री से लेकर स्थानीय प्रशासन तक कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों और संघर्ष समिति की ओर से महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण विभाग, उपविभागीय अधिकारी वणी, वणी पुलिस तथा यातायात नियंत्रण विभाग सहित संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से कोल डिपो और कोयला परिवहन की व्यापक जांच की मांग की जा रही है।
मांग है कि—
- सभी वैध एवं कथित अवैध कोल डिपो की सर्वे नंबरवार जांच हो।
- प्रत्येक डिपो की NOC और अन्य शासकीय अनुमति की जांच की जाए।
- संबंधित जमीन का सरकारी टैक्स जमा हुआ है या नहीं, इसकी जांच हो।
- नियमों का उल्लंघन करने वाले डिपो पर कार्रवाई की जाए।
- सड़क पर खड़े कोयला वाहनों और अवैध पार्किंग पर कार्रवाई हो।
- नियमबाह्य तरीके से कोयला परिवहन करने वाले वाहनों की जांच की जाए।
- वाहनों के कारण यातायात और सड़क सुरक्षा को होने वाले खतरे पर तत्काल नियंत्रण हो।
- कोल डिपो से उड़ने वाली कोयले की धूल और प्रदूषण पर प्रभावी रोक लगाई जाए।
जनता का सवाल—नियम हैं तो पालन कौन कराएगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि कोल डिपो और कोयला परिवहन के लिए नियम और अनुमति निर्धारित हैं, तो उनका पालन कौन करा रहा है? वर्षों से कारोबार चलने के बावजूद यदि शिकायतें सामने आ रही हैं, तो संबंधित विभागों द्वारा अब तक क्या जांच की गई और क्या कार्रवाई हुई?
स्थानीय नागरिकों की मांग है कि इस पूरे मामले को केवल स्थानीय स्तर की शिकायत मानकर टालने के बजाय वरिष्ठ प्रशासनिक स्तर पर निष्पक्ष जांच कराई जाए।
सर्वे नंबर से लेकर सरकारी टैक्स तक, NOC से लेकर प्रदूषण नियंत्रण तक और सड़क पर खड़े भारी वाहनों से लेकर नियमबाह्य परिवहन तक—पूरे कोल कारोबार की जांच हो और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई हो। यही अब वणी की परेशान जनता की प्रमुख मांग बनती जा रही है।










