सुरजागढ़ परियोजना में स्थानीय ट्रांसपोर्टरों के साथ अन्याय का आरोप
लॉयड मेटल कंपनी के खिलाफ आमरण अनशन की चेतावनी; 15 दिन में मांगें नहीं मानी तो आंदोलन
आलापल्ली/गड़चिरोली। एटापल्ली तहसील के सुरजागढ़ (हेडरी) लौह अयस्क परियोजना में स्थानीय ट्रांसपोर्टरों की अनदेखी कर दूसरे जिलों के वाहनों और बिचौलियों को प्राथमिकता दिए जाने का गंभीर आरोप आलापल्ली ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन ने लगाया है। एसोसिएशन ने राज्यपाल और मुख्यमंत्री को दिए ज्ञापन के माध्यम से चेतावनी दी है कि स्थानीय ट्रांसपोर्टरों की लंबित मांगें 15 दिनों के भीतर पूरी नहीं की गईं तो सड़क पर उतरकर तीव्र आंदोलन किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर आमरण अनशन भी शुरू किया जाएगा।
कर्ज लेकर खरीदे ट्रक, अब धूल फांक रहे
एसोसिएशन के अनुसार वर्ष 2017 में सुरजागढ़ में लॉयड मेटल एंड एनर्जी लिमिटेड का काम शुरू हुआ था। उस समय कंपनी प्रशासन की ओर से परियोजना करीब 50 वर्षों तक चलने का आश्वासन दिए जाने के बाद स्थानीय नागरिकों ने ट्रक खरीदने के लिए कर्ज लिया। कई लोगों ने जमीन और पेंशन की राशि लगाकर वाहन खरीदे।
नक्सल प्रभावित एवं संवेदनशील क्षेत्र में जान जोखिम में डालकर स्थानीय ट्रांसपोर्टरों ने कंपनी को परिवहन सुविधा उपलब्ध कराई। इस दौरान कई वाहनों को नुकसान भी हुआ, लेकिन इसके बावजूद स्थानीय वाहन मालिकों ने परिवहन व्यवस्था जारी रखी।
स्थानीयों को काम से बाहर कर बाहरी वाहनों को प्राथमिकता देने का आरोप
एसोसिएशन का आरोप है कि अब कंपनी के पैर जमने के बाद स्थानीय ट्रकों को काम देना बंद कर दिया गया है और कंपनी अपने वाहनों के साथ-साथ दूसरे जिलों और राज्यों के ट्रकों का इस्तेमाल कर रही है।
एसोसिएशन के मुताबिक परियोजना में करीब 2,000 वाहनों के लिए काम उपलब्ध होने के बावजूद स्थानीय सैकड़ों ट्रांसपोर्टरों को काम नहीं दिया जा रहा। साथ ही सीधे वर्क ऑर्डर देने के बजाय बिचौलियों के माध्यम से कमीशन लेकर काम दिए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
स्थानीय वाहन मालिकों का कहना है कि काम नहीं मिलने से उनके बैंक ऋण की किस्तें बकाया हो रही हैं। आर्थिक संकट के कारण कई परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है और वाहन जब्त होने की स्थिति भी पैदा हो रही है।
स्थानीय ट्रांसपोर्टरों की प्रमुख मांगें
1. सीधे वर्क ऑर्डर:
परिवहन का काम किसी मध्यस्थ या बिचौलिए के माध्यम से न देकर सीधे स्थानीय ट्रांसपोर्ट यूनियन और वाहन मालिकों को दिया जाए।
2. स्थानीय वाहनों को प्राथमिकता:
कंपनी द्वारा नए वाहन खरीदने और बाहरी जिलों के ट्रकों के इस्तेमाल को रोका जाए तथा स्थानीय वाहन मालिकों को नियमित काम उपलब्ध कराया जाए।
3. कंपनी के शेयर और नुकसानभरपाई:
कंपनी द्वारा पूर्व में किए गए आश्वासनों को पूरा करते हुए स्थानीय ट्रांसपोर्टरों को कंपनी के शेयर और उचित नुकसानभरपाई देकर न्याय दिया जाए।
4. अधिकृत करारनामा:
स्थानीय ट्रकों के लिए आधिकारिक समझौता किया जाए तथा नियमानुसार परिवहन दर और नियमित काम सुनिश्चित किया जाए।
15 दिन का अल्टीमेटम
आलापल्ली ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित 15 दिनों के भीतर मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो गड़चिरोली जिले के सभी ट्रांसपोर्टरों की ओर से लोकतांत्रिक तरीके से तीव्र आंदोलन किया जाएगा। एसोसिएशन ने जरूरत पड़ने पर आमरण अनशन शुरू करने की भी चेतावनी दी है।
स्थानीय ट्रांसपोर्टरों ने कंपनी प्रबंधन और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर स्थानीय वाहन मालिकों को प्राथमिकता देने तथा उनके साथ न्याय करने की मांग की है।










