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वेकोलि माजरी क्षेत्र में करोड़ों की कोयला हेराफेरी का आरोप!

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वेकोलि माजरी क्षेत्र में करोड़ों की कोयला हेराफेरी का आरोप!



4,667 टन कोयले में बड़े पैमाने पर धूल मिलाकर भेजने की कथित तैयारी! छोटू कोल डिपो में मिक्स सामग्री पहले से तैयार होने का दावा


वणी, प्रतिनिधि।

वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (वेकोलि) के माजरी महाप्रबंधक क्षेत्र में कथित कोयला हेराफेरी का मामला अब और गंभीर होता दिखाई दे रहा है। एकोणा और उकणी कोयला खदानों से निकलने वाले कोयले के स्टॉक, परिवहन और निजी डिपो तक पहुंचने वाले माल को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों और वेकोलि के कुछ कर्मचारियों ने आरोप लगाया है कि सरकारी कोयले की आड़ में बड़े पैमाने पर हेराफेरी और मिलावट का कथित खेल चल रहा है, जिससे सरकारी खजाने को करोड़ों रुपये का नुकसान होने की आशंका है।

4,667 टन कोयले में धूल मिलाने की कथित तैयारी!

इस मामले में अब एक और चौंकाने वाला दावा सामने आया है। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, लगभग 4,667 टन कोयले में बड़े पैमाने पर धूलयुक्त सामग्री मिलाकर भेजने की कथित योजना तैयार की गई है। आरोप है कि इस खेप के लिए छोटू कोल डिपो में मिक्स सामग्री पहले से ही तैयार रखी गई है। इस कथित गतिविधि की अवधि 11 अक्टूबर बताई जा रही है।

यदि यह जानकारी सही है, तो यह मामला केवल कोयले की गुणवत्ता में गड़बड़ी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी कोयले के स्टॉक, उसकी आपूर्ति और निर्धारित गुणवत्ता के साथ संभावित छेड़छाड़ का गंभीर मामला बन सकता है। ऐसे में संबंधित खेप के डीओ, वजन पर्चियों, गुणवत्ता परीक्षण और डिस्पैच रिकॉर्ड की तत्काल जांच जरूरी है।

क्रश कोल के नाम पर बड़े कोयले का कथित खेल!

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उकणी कोयला खदान से कोयला लोड कर वणी क्षेत्र के राजूर बायपास स्थित निजी कोयला डिपो तक पहुंचाया जा रहा है। यहां क्रश कोल के नाम पर बड़े आकार के कोयले की कथित हेराफेरी और उसमें चारफाइन तथा काले धूलयुक्त पदार्थ की मिलावट किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं।

जिंदल पावर प्लांट के डीओ के नाम पर मिलावट का आरोप

स्थानीय शिकायतकर्ताओं के अनुसार, धुलिया-नरधाना स्थित जिंदल पावर प्लांट के डिलीवरी ऑर्डर (डीओ) के नाम पर कोयले में धूलयुक्त पदार्थ मिलाकर रेलवे साइडिंग और वाहनों के माध्यम से आगे भेजे जाने का कथित खेल चल रहा है। कुछ खेपों में लगभग 70 प्रतिशत धूलयुक्त सामग्री और 30 प्रतिशत शुद्ध कोयला होने का भी आरोप लगाया गया है।

हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं, तो वेकोलि को आर्थिक नुकसान के साथ-साथ बिजली उत्पादन के लिए भेजे जाने वाले कोयले की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े होंगे।

अधिकारियों की निगरानी व्यवस्था पर सवाल

इतनी बड़ी मात्रा में कोयले की कथित मिलावट और हेराफेरी की शिकायतों के बीच क्षेत्रीय, उपक्षेत्रीय और खदान प्रबंधन की निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। आखिर खदान से निकलने वाले कोयले का वजन, गुणवत्ता और अंतिम गंतव्य कौन सुनिश्चित कर रहा है? यदि निजी डिपो में पहले से मिक्स सामग्री तैयार होने का दावा किया जा रहा है, तो इसकी जानकारी संबंधित विभागों तक क्यों नहीं पहुंची? इन सवालों का जवाब जांच के जरिए सामने आना चाहिए।

विजिलेंस और सीबीआई जांच की मांग तेज

स्थानीय नागरिकों और वेकोलि के कुछ कर्मचारियों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय विजिलेंस जांच तथा आवश्यकता पड़ने पर सीबीआई जांच कराने की मांग की है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि एकोणा और उकणी खदानों से लेकर निजी कोल डिपो तथा रेलवे साइडिंग तक की पूरी सप्लाई चेन की जांच की जाए।

जांच में विशेष रूप से 4,667 टन की कथित खेप, 11 अक्टूबर से संबंधित डिस्पैच रिकॉर्ड, छोटू कोल डिपो में उपलब्ध मिक्स सामग्री, डीओ, ई-रसीद, वजन कांटा पर्चियां, वाहन नंबर, रेलवे रेक और कोयले की गुणवत्ता परीक्षण रिपोर्ट को शामिल किया जाना चाहिए।

अब वेकोलि प्रबंधन की जवाबदेही तय होगी?

4,667 टन कोयले में कथित मिलावट की तैयारी और निजी डिपो में मिक्स सामग्री पहले से उपलब्ध होने का दावा बेहद गंभीर है। अब देखना यह है कि वेकोलि प्रबंधन और संबंधित जांच एजेंसियां इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करती हैं। क्या कथित खेप की जांच होगी? क्या कोयले के वास्तविक वजन और गुणवत्ता का मिलान किया जाएगा? और यदि कोई अनियमितता प्रमाणित होती है, तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी?

सरकारी संपत्ति की कथित लूट और कोयले की गुणवत्ता से जुड़े इस मामले में अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और ठोस कार्रवाई की जरूरत है। आरोपों की सच्चाई सामने आना जरूरी है, ताकि सरकारी खजाने को संभावित नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी नेटवर्क का पर्दाफाश हो सके।

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