‘स्वस्तिक पैटर्न’ वृक्षारोपण से पर्यावरण संरक्षण के साथ बढ़ेगी ग्राम पंचायतों की आय – जिलाधिकारी वसुमना पंत
सिंदेवाही में जिला स्तरीय प्रदर्शन का शुभारंभ; पहले चरण में 100 ग्राम पंचायतों में स्वस्तिक पैटर्न और केसर आम की बागवानी
चंद्रपुर, 26 सितंबर। कम जगह में अधिक पौधे लगाकर पानी की बचत, हरित क्षेत्र में वृद्धि और पर्यावरण संरक्षण करने के साथ ही ग्राम पंचायतों के लिए आय का नया स्रोत तैयार करने के उद्देश्य से जिले में ‘स्वस्तिक पैटर्न’ वृक्षारोपण की शुरुआत की गई है। इसके साथ केसर आम की फल बागवानी के माध्यम से भविष्य में ग्राम पंचायतों को स्वयं की आय प्राप्त होने में मदद मिलेगी। यह बात जिलाधिकारी वसुमना पंत ने कही।
विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी अभियान (वीबी-जी राम-जी), ग्रामसेवक प्रशिक्षण केंद्र और विभिन्न योजनाओं के अभिसरण के माध्यम से 25 सितंबर को सिंदेवाही स्थित ग्रामसेवक प्रशिक्षण केंद्र में ‘स्वस्तिक पैटर्न वृक्षारोपण’ के जिला स्तरीय प्रदर्शन कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। जिलाधिकारी वसुमना पंत और जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पुलकित सिंह की प्रमुख उपस्थिति में पौधारोपण कर अभियान की शुरुआत की गई।
चार जिलों के प्रशिक्षणार्थियों को मिलेगा प्रत्यक्ष प्रशिक्षण
जिलाधिकारी पंत ने स्वस्तिक पैटर्न के प्रदर्शन स्थल का निरीक्षण करते हुए बताया कि सिंदेवाही के ग्रामसेवक प्रशिक्षण केंद्र में चंद्रपुर, गडचिरोली, भंडारा और गोंदिया जिलों के ग्राम पंचायत अधिकारी, विस्तार अधिकारी और सरपंचों को नियमित प्रशिक्षण दिया जाता है। इसलिए इन चारों जिलों के प्रशिक्षणार्थियों को इस अभिनव वृक्षारोपण पद्धति की प्रत्यक्ष जानकारी मिले और इसका व्यापक प्रचार-प्रसार हो, इस उद्देश्य से प्रशिक्षण केंद्र को डेमो साइट के रूप में चुना गया है।
उन्होंने बताया कि स्वस्तिक पैटर्न के माध्यम से कम जगह में अधिक पौधे लगाए जा सकते हैं। पौधों को पर्याप्त सूर्यप्रकाश मिलने के साथ पानी की बचत और संरक्षण तथा हरित क्षेत्र बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। वहीं केसर आम की फल बागवानी ग्राम पंचायतों के लिए भविष्य में अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकती है।
पहले चरण में 100 ग्राम पंचायतों में होगा प्रयोग
जिला स्तरीय प्रदर्शन के बाद अगले महीने खनिज क्षेत्र से प्रभावित 50 ग्राम पंचायतों में स्वस्तिक पैटर्न वृक्षारोपण तथा अन्य 50 ग्राम पंचायतों में केसर आम की बागवानी प्रायोगिक आधार पर शुरू करने की योजना है।
इस पहल के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा करने के साथ पर्यावरण संरक्षण, हरित क्षेत्र में वृद्धि और सतत विकास को बढ़ावा देने का उद्देश्य है।
जिले की 825 ग्राम पंचायतों तक पहुंचेगा अभियान
जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पुलकित सिंह ने कहा कि इस पायलट प्रोजेक्ट के बाद जिले की 825 ग्राम पंचायतों तक वृक्षारोपण अभियान पहुंचाने की योजना है।
ग्राम पंचायतों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए केसर आम की बागवानी को बढ़ावा दिया जा रहा है। फल बागान उत्पादन में आने के बाद फलों की बिक्री से ग्राम पंचायतों को स्वयं की आय प्राप्त हो सकती है। इस आय का उपयोग गांव की सड़क, स्ट्रीट लाइट, जलापूर्ति, स्कूल और अन्य विकास कार्यों के लिए किया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि इस पहल के माध्यम से गांवों को सुंदर, हराभरा और आर्थिक रूप से समृद्ध बनाने का संकल्प लिया जाना चाहिए।
‘यह केवल वृक्षारोपण नहीं, वृक्ष क्रांति है’ – ए.एस. नाथन
‘ऑक्सीजन मैन’ ए.एस. नाथन ने स्वस्तिक पैटर्न वृक्षारोपण के बारे में मार्गदर्शन किया। उन्होंने कहा कि यह केवल वृक्षारोपण का अभियान नहीं है, बल्कि विभिन्न सरकारी योजनाओं के अभिसरण, रोजगार सृजन, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास को एक साथ जोड़ने वाला अभिनव प्रयोग है। उन्होंने इसे ‘वृक्ष क्रांति’ बताया।
कार्यक्रम के बाद जिलाधिकारी वसुमना पंत और मुख्य कार्यकारी अधिकारी पुलकित सिंह ने ग्रामसेवक प्रशिक्षण केंद्र का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने अंतरगांव और गडमौशी स्थित जिला परिषद प्राथमिक विद्यालयों का दौरा कर वहां की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
कार्यक्रम का प्रस्तावना ग्रामसेवक प्रशिक्षण केंद्र के प्राचार्य एवं उपजिला कार्यक्रम समन्वयक गिरीश धायगुडे ने किया। इस अवसर पर उपजिलाधिकारी (रोहयो) शुभम दांडेकर, विभागीय वन अधिकारी बापू येडे, कृषि विज्ञान केंद्र सिंदेवाही की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सोनाली दुपटे, प्रभारी गट विकास अधिकारी विभावरी तितरे, लक्ष्मी कुमरे, कृषि अधिकारी महेश वट्टी, चंद्रकांत दलाल, बंडू गुंतीवार, थामदेव अगडे, प्यारे लाल देवगड़े, ओम चनफने सहित प्रशिक्षण केंद्र के कर्मचारी उपस्थित थे। लक्ष्मीनारायण दोडके ने आभार व्यक्त किया।










