चिखलगांव में कोल डिपो हटाने की मांग तेज, उच्चस्तरीय जांच की मांग
लालपुलिया संघर्ष समिति और ग्रामीणों ने विधानसभा अंदाज समिति से लगाई गुहार; धूल, प्रदूषण और भारी वाहनों से स्वास्थ्य व सुरक्षा को खतरा
वणी/यवतमाल। वणी तहसील के चिखलगांव क्षेत्र में संचालित कोल डिपो को पूर्णतः हटाने तथा पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। लालपुलिया संघर्ष समिति, चिखलगांव के ग्रामीणों की ओर से मनोज सुधाकर नवले ने महाराष्ट्र विधानसभा की अंदाज समिति के अध्यक्ष के माध्यम से मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री को निवेदन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि चिखलगांव क्षेत्र में संचालित कोल डिपो के कारण बड़े पैमाने पर कोयले की धूल और प्रदूषण फैल रहा है। कोयले की ढुलाई के दौरान सड़क किनारे भारी वाहनों के खड़े रहने से यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इससे क्षेत्र के नागरिकों के स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरण पर भी प्रतिकूल असर पड़ने की शिकायत ग्रामीणों ने की है।
इस मामले में जिलाधिकारी यवतमाल, उपविभागीय अधिकारी वणी, उपप्रादेशिक परिवहन अधिकारी यवतमाल, उपविभागीय पुलिस अधिकारी वणी, पुलिस निरीक्षक वणी तथा यातायात शाखा वणी को 24 जुलाई 2026 को निवेदन दिया गया था।
निवेदन के बाद जिलाधिकारी के पत्र के अनुसार उपविभागीय अधिकारी वणी ने 4 सितंबर 2026 को महसूल भवन, वणी में संबंधित विभागों की बैठक आयोजित की थी। बैठक के बाद आंदोलनकारियों और ग्रामीणों को 9 सितंबर 2026 तक रिपोर्ट अथवा निर्णय से अवगत कराने का आश्वासन दिया गया था। हालांकि, ग्रामीणों के अनुसार अब तक कोई लिखित जवाब या ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
कोल डिपो की अनुमति पर भी सवाल
ग्रामीणों ने मांग की है कि संबंधित कोल डिपो के पास आवश्यक सरकारी अनुमति और सभी वैध दस्तावेज हैं या नहीं, इसकी तत्काल जांच की जाए। यदि आवश्यक अनुमति नहीं है, तो यह डिपो किसकी अनुमति अथवा संरक्षण में संचालित हो रहा है, इसकी भी गहन जांच की जाए और जिम्मेदार लोगों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
भारी वाहनों से हादसों का खतरा
निवेदन में कहा गया है कि इस मार्ग से किसानों और विद्यार्थियों का भी नियमित आवागमन होता है। सड़क के किनारे खड़े रहने वाले भारी वाहनों, कोयले की धूल और यातायात के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क किनारे भारी वाहनों के खड़े रहने से कई बार गंभीर हादसों का खतरा पैदा होता है और कई लोगों की जान भी जा चुकी है।
ग्रामीणों ने रखीं 8 प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने कोल डिपो की सभी अनुमतियों और दस्तावेजों की जांच, अनुमति नहीं होने पर तत्काल बंद कर पूर्णतः हटाने, प्रदूषण एवं स्वास्थ्य संबंधी प्रभावों की जांच, जिम्मेदार अधिकारियों व संबंधित व्यक्तियों पर कार्रवाई तथा भारी वाहनों के लिए अलग पार्किंग व्यवस्था करने की मांग की है।
इसके अलावा 4 सितंबर की बैठक के बाद तैयार की जाने वाली रिपोर्ट की प्रति ग्रामीणों को उपलब्ध कराने तथा स्थानीय स्तर पर कार्रवाई नहीं होने के कारण वरिष्ठ स्तर से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग भी की गई है।
ग्रामीणों ने कहा कि चिखलगांव में कोल डिपो का मुद्दा केवल प्रदूषण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्वास्थ्य, पर्यावरण और सड़क सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला है। इसलिए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई करते हुए कोल डिपो हटाने की मांग की गई है।
निवेदनकर्ता:
मनोज सुधाकर नवले, चिखलगांव, तहसील वणी, जिला यवतमाल
लालपुलिया संघर्ष समिति, चिखलगांव एवं ग्रामस्थों की ओर सेनिलेश सोनटक्के, अमित संते, रवींद्र राऊत, शैलेश आत्राम, रवींद्र राऊत, शेखर सातपुते, धनंजय भोयर, इमाम हुसेन, मनोज ढेंगळे, पंकज मोरे, प्रदीप खेकारे, प्रवीण खानजोडे, रवी मेहतो, सुधीर ठेंगणे, अतुल चांदेकर, संतोष राजूरकर, अविनाश किनाके, संकेत काळे, तुषार कांबळे उपस्थित थे।










