घुग्घुस :
घुग्घुस शहर से महज 7 किलोमीटर दूर पांढरकवडा–वढा तीर्थस्थल परिसर में स्थित वर्धा नदी के तीन-संगम रेत घाट पर रेत माफिया का राज खुलकर चल रहा है। यहां 24 घंटे, दिन–रात धड़ल्ले से अवैध रेत तस्करी जारी है और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, रोजाना आधे दर्जन से अधिक ट्रैक्टरों के ज़रिए सैकड़ों ब्रास रेत की खुलेआम चोरी की जा रही है। इससे महाराष्ट्र शासन के महसूल विभाग को लाखों रुपये का सीधा नुकसान हो रहा है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं।
कुछ माह पूर्व महसूल अधिकारियों ने दिखावटी कार्रवाई करते हुए घाट परिसर में गड्ढे खोदकर ट्रैक्टर मार्ग बंद किया था। मगर रेत माफियाओं ने जेसीबी मशीन लगाकर वही गड्ढे कुछ ही दिनों में पाट दिए और तस्करी पहले से भी ज़्यादा तेज़ रफ्तार में शुरू कर दी।
किसानों पर कहर, फसलें रौंदी जा रहीं
रेत माफियाओं की दबंगई का सबसे बड़ा शिकार ग्रामीण किसान बन रहे हैं। ट्रैक्टरों की आवाजाही से खेतों की जमीन रौंदी जा रही है, खड़ी फसलें कुचल दी गई हैं। किसानों को न सिर्फ आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है, बल्कि माफियाओं के डर से वे खुलकर विरोध भी नहीं कर पा रहे।
लेन–देन का खेल?
स्थानीय लोगों का सीधा आरोप है कि कुछ महसूल अधिकारी और पुलिसकर्मियों की मिलीभगत व लेन–देन के कारण ही रेत तस्करों के हौसले बुलंद हैं। ट्रैक्टरों की गड़गड़ाहट से ग्रामीण रातों की नींद खो चुके हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सन्नाटा है।
प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से वढा रेत घाट पर तत्काल सख्त कार्रवाई, जेसीबी–ट्रैक्टर जब्ती, दोषी अधिकारियों पर जांच और माफियाओं के खिलाफ कठोर कदम उठाने की मांग की है।
सवाल साफ है—
👉 क्या वर्धा नदी रेत माफियाओं के हवाले कर दी गई है?
👉 कब टूटेगा महसूल–पुलिस–माफिया का यह गठजोड़?
अब देखना यह है कि प्रशासन जागता है या फिर रेत माफिया यूं ही शासन को लूटता रहेगा।