घुग्घुस के साप्ताहिक बाजार में पार्किंग व्यवस्था ध्वस्त
जान जोखिम में डालकर खरीदारी को मजबूर लोग,नप प्रशासन पर लापरवाही के आरोप
घुग्घुस | विशेष रिपोर्ट
घुग्घुस के रविवार साप्ताहिक बाजार की स्थिति इन दिनों बेहद चिंताजनक हो गई है। सब्जी और रोजमर्रा की खरीदारी के लिए हजारों की भीड़ उमड़ती है, लेकिन पार्किंग की कोई ठोस व्यवस्था नहीं होने से पूरा इलाका अव्यवस्था का शिकार बन गया है।
दोपहिया और चारपहिया वाहनों की लंबी कतारें सड़क के दोनों किनारों पर खड़ी रहती हैं, जिससे आए दिन भीषण ट्रैफिक जाम और हादसों का खतरा मंडराता रहता है। हालात ऐसे बन गए हैं कि लोगों को बाजार में खरीदारी करने के लिए जान हथेली पर रखकर रास्ता पार करना पड़ रहा है।
🚛 भारी वाहनों से और बिगड़ रहे हालात
स्थानीय लोगों का कहना है कि पास स्थित ACC Cement कारखाने से आने-जाने वाले भारी और ओवरलोड वाहन इस समस्या को और गंभीर बना रहे हैं।
भीड़भाड़ वाले बाजार क्षेत्र से गुजरने वाले इन ट्रकों के कारण हर पल दुर्घटना का खतरा बना रहता है। नागरिक सवाल उठा रहे हैं कि क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है?
⚠️ शराबियों का उत्पात, महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल
स्थिति और भी चिंताजनक तब हो जाती है जब बाजार परिसर में देशी शराब की बिक्री और नशे में धुत लोगों का उत्पात देखने को मिलता है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार महिलाओं और परिवारों के साथ अशोभनीय व्यवहार और अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे बाजार का माहौल असुरक्षित होता जा रहा है।
🏛️ नगर परिषद पर गंभीर लापरवाही का आरोप
नागरिकों का आरोप है कि घुग्घुस नगर परिषद इस गंभीर समस्या को लेकर पूरी तरह से बेपरवाह बनी हुई है।
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मुख्याधिकारी से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि: बाजार क्षेत्र में अलग और सुरक्षित पार्किंग व्यवस्था की जाए पूरे बाजार परिसर में CCTV कैमरे लगाए जाएं
भारी वाहनों की आवाजाही पर नियंत्रण लगाया जाए
बाजार के दिनों में पुलिस बंदोबस्त बढ़ाया जाए।
⚡ नागरिकों ने दीआंदोलन की चेतावनी
लोगों का साफ कहना है कि अगर प्रशासन ने जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं किया तो संतप्त नागरिक सड़क पर उतरकर आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
घुग्घुस के साप्ताहिक बाजार की अव्यवस्था अब सिर्फ ट्रैफिक की समस्या नहीं रही, बल्कि यह नागरिकों की सुरक्षा और महिलाओं की गरिमा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है। अब देखना यह है कि प्रशासन कब जागता है।