चंद्रपुर के सीमेंट प्लांट में एसिड हादसा: आदिवासी मजदूर झुलसे…
विधानसभा में गूंजा ‘50 लाख मुआवजे’ का मुद्दा!
चंद्रपुर | 5 मार्च (ऊष्मा कि आवाज)
चंद्रपुर के औद्योगिक क्षेत्र में हुए खतरनाक हादसे ने एक बार फिर श्रमिक सुरक्षा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब दो सप्ताह पहले जिले के Dalmia Cement प्लांट में संघनित सल्फ्यूरिक एसिड गिरने से एक प्रशिक्षु युवती और एक मजदूर गंभीर रूप से झुलस गए। इस घटना को लेकर अब महाराष्ट्र विधानसभा में जोरदार बहस छिड़ गई है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता Vijay Wadettiwar ने इस मामले को विधानसभा में उठाते हुए सरकार पर सीधा हमला बोला। उन्होंने सवाल किया कि क्या नागपुर और चंद्रपुर के लिए अलग-अलग न्याय का पैमाना है?
विधानसभा में गूंजा ‘50 लाख मुआवजे’ का मुद्दा
वडेट्टीवार ने बताया कि हादसे में गंभीर रूप से घायल दोनों श्रमिक आदिवासी समुदाय से हैं और उन पर गलती से खतरनाक एसिड गिर गया, जिससे उन्हें गंभीर जलन की चोटें आईं। दोनों को शहर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
मजदूर को इलाज के बाद छुट्टी मिल गई है, जबकि प्रशिक्षु युवती अब भी अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रही है।
उन्होंने सरकार से मांग की कि नागपुर में हाल ही में हुए औद्योगिक हादसे की तरह चंद्रपुर के पीड़ितों को भी 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाए।
“नागपुर को न्याय, चंद्रपुर को इंतजार क्यों?”
वडेट्टीवार ने तीखा सवाल उठाते हुए कहा—
“चंद्रपुर की जमीन, पानी और संसाधनों से उद्योग करोड़ों का मुनाफा कमाते हैं, लेकिन जब यहां के श्रमिकों पर संकट आता है तो उनकी जान की कीमत इतनी कम क्यों समझी जाती है?”
उन्होंने आरोप लगाया कि उद्योगों की सुरक्षा व्यवस्था अक्सर कागजों तक सीमित रहती है और हादसे होने के बाद ही प्रशासन जागता है।
सुरक्षा मानकों पर उठे गंभीर सवाल
वडेट्टीवार ने मांग की कि इस हादसे की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि प्लांट में सुरक्षा नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि यदि जांच में लापरवाही साबित होती है तो केवल कर्मचारियों पर नहीं बल्कि कंपनी प्रबंधन पर भी कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।
राज्य स्तर पर विशेष निरीक्षण दल की मांग
कांग्रेस नेता ने यह भी प्रस्ताव रखा कि खतरनाक रसायनों और भारी मशीनरी से जुड़े उद्योगों की नियमित जांच के लिए राज्य स्तर पर विशेष निरीक्षण दल बनाया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
साथ ही उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि
क्या प्लांट में सुरक्षा अधिकारी तैनात था?
अगर था तो इतना बड़ा हादसा कैसे हो गया?
सरकार का जवाब इस मुद्दे पर जवाब देते हुए संबंधित मंत्री ने कहा कि घायलों को संभव अधिकतम आर्थिक सहायता दी जाएगी। साथ ही चंद्रपुर में इस विषय पर एक विशेष बैठक बुलाने और श्रमिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए विधायकों की समिति गठित करने पर भी विचार किया जा रहा है।