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81 लाख महिलाओं को ‘लाड़की बहिन’ योजना से बाहर करना बहनों के साथ धोखा : सांसद प्रतिभा धानोरकर

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81 लाख महिलाओं को ‘लाड़की बहिन’ योजना से बाहर करना बहनों के साथ धोखा : सांसद प्रतिभा धानोरकर



ई-केवाईसी और बैंक सत्यापन के नाम पर लाखों महिलाओं को किया गया वंचित, सरकार पर साधा निशाना


महिला एवं बाल विकास मंत्री को पत्र लिखकर पुनः सत्यापन और शिकायत निवारण तंत्र की मांग


चंद्रपुर, () 3 जून 2026। सांसद प्रतिभा धानोरकर ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि ‘लाड़की बहिन’ योजना से लगभग 81 लाख महिलाओं को बाहर करना गरीब और जरूरतमंद बहनों के साथ सीधा अन्याय और विश्वासघात है। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले बड़े पैमाने पर महिलाओं को योजना का लाभ देने के वादे किए गए, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही बैंक सत्यापन और ई-केवाईसी जैसी प्रक्रियाओं के नाम पर लाखों महिलाओं को लाभार्थियों की सूची से बाहर कर दिया गया।

इस गंभीर मुद्दे को लेकर सांसद धानोरकर ने राज्य के महिला एवं बाल विकास मंत्री को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि योजना से वंचित की गई महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए सरकार को त्वरित कदम उठाने चाहिए।

सांसद धानोरकर ने बताया कि हाल ही में सामने आई जानकारी के अनुसार, बैंक सत्यापन के बाद राज्य में योजना के लाभार्थियों की संख्या 2 करोड़ 47 लाख से घटकर 1 करोड़ 66 लाख रह गई है। यानी लगभग 81 लाख महिलाओं को योजना से बाहर कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और इससे सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान किए गए वादों से अब सरकार पीछे हटती दिखाई दे रही है। वित्तीय बोझ कम करने के लिए महिलाओं को मिलने वाली सहायता राशि या लाभ में कटौती करना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा।

तकनीकी खामियों का खामियाजा भुगत रहीं गरीब महिलाएं

सांसद धानोरकर ने कहा कि योजना लागू करते समय प्रशासन ने पर्याप्त तैयारी नहीं की और जल्दबाजी में कई निर्णय लिए गए। इसका परिणाम यह हुआ कि आज हजारों जरूरतमंद महिलाएं तकनीकी कारणों से योजना से बाहर हो गई हैं।

उन्होंने बताया कि ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों की अनेक महिलाएं बैंक खाते को आधार से लिंक न कर पाने, ई-केवाईसी पूरी न होने या आवश्यक जानकारी के अभाव में समय पर प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकीं। ऐसे मामलों में महिलाओं को अपात्र घोषित करना अन्यायपूर्ण और असंवेदनशील निर्णय है।

पुनः सत्यापन और शिकायत निवारण केंद्र बनाने की मांग

सांसद प्रतिभा धानोरकर ने मांग की है कि तकनीकी कारणों से योजना से बाहर हुई सभी जरूरतमंद महिलाओं के मामलों की पुनः जांच कर उन्हें दोबारा पात्र घोषित किया जाए। इसके साथ ही प्रत्येक तालुका और जिला स्तर पर विशेष शिकायत निवारण प्रकोष्ठ स्थापित किए जाएं, जहां महिलाएं अपनी समस्याएं दर्ज करा सकें और आवेदन में हुई त्रुटियों को सुधारने का अवसर प्राप्त कर सकें।

उन्होंने महिला एवं बाल विकास मंत्री से स्वयं इस मामले में हस्तक्षेप कर राज्य की लाखों वंचित महिलाओं को न्याय दिलाने की अपील की है।

गरीब महिलाओं के अधिकारों से समझौता बर्दाश्त नहीं”

सांसद धानोरकर ने कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि किसी भी जरूरतमंद महिला को केवल तकनीकी खामियों के कारण योजना के लाभ से वंचित न होना पड़े। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस मामले को गंभीरता से लेते हुए लाखों महिलाओं को राहत देने के लिए सकारात्मक निर्णय लेगी।

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