चंद्रपुर-यवतमाल में प्रदूषण पर सख्त हुई सरकार, पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे ने दिए कड़े निर्देश
सिर्फ बैठकों से नहीं, जमीन पर दिखे कार्रवाई; कोयला खदानों और कोल वॉशरियों के लिए तीन चरणों का एक्शन प्लान लागू होगा
चंद्रपुर/मुंबई | 20 जुलाई चंद्रपुर और यवतमाल जिलों में कोयला खदानों, कोल वॉशरियों तथा कोयला परिवहन से बढ़ते वायु एवं जल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए महाराष्ट्र की पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे ने संबंधित उद्योगों और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि केवल चर्चा करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि अल्पकालीन, मध्यमकालीन और दीर्घकालीन कार्ययोजना को प्रभावी ढंग से लागू करना होगा।
मुंबई में आयोजित समीक्षा बैठक में महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (एमपीसीबी), वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (डब्ल्यूसीएल), कोल वॉशरी कंपनियों तथा संबंधित अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक में चंद्रपुर और यवतमाल की वर्तमान प्रदूषण स्थिति तथा उसे कम करने के उपायों पर विस्तृत चर्चा की गई।
कोयला परिवहन के लिए नई व्यवस्था पर जोर
पर्यावरण मंत्री ने कहा कि चंद्रपुर क्षेत्र में प्रदूषण का सबसे बड़ा कारण कोयला खदानें, कोल वॉशरियां और भारी वाहनों से होने वाला कोयला परिवहन है। उन्होंने निर्देश दिए कि भविष्य में सड़क परिवहन पर निर्भरता कम कर रेलवे, कन्वेयर बेल्ट और कवर कन्वेयर सिस्टम का अधिक उपयोग किया जाए, ताकि धूल और प्रदूषण में कमी लाई जा सके।
तीन महीने में देना होगा रिपोर्ट
कोल वॉशरियों और खदान संचालकों को अगले तीन महीनों के भीतर प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए जाने वाले कार्यों का विस्तृत एक्शन प्लान प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें धूल नियंत्रण, वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण, जनजागरूकता और अन्य आवश्यक उपाय शामिल होंगे।
सीएसआर फंड से होंगे पर्यावरण और विकास कार्य
मंत्री मुंडे ने उद्योगों से कहा कि वे अपने कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड का उपयोग केवल पर्यावरण संरक्षण ही नहीं, बल्कि आसपास के गांवों में वृक्षारोपण, स्वास्थ्य सेवाएं, स्कूल, सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाओं के विकास के लिए भी करें।
बफर जोन बनाने के निर्देश
कोयला खदानों और कोल वॉशरियों के आसपास बफर जोन विकसित करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि प्रदूषण का असर स्थानीय नागरिकों पर कम हो सके। साथ ही उद्योगों को प्रदूषण नियंत्रण के पहले और बाद की स्थिति का फोटो और अन्य दस्तावेजों के माध्यम से रिकॉर्ड रखने को भी कहा गया है।
डब्ल्यूसीएल करेगा दो लाख पौधों का रोपण
बैठक में वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) ने जानकारी दी कि वह लगभग 400 हेक्टेयर क्षेत्र में दो लाख पौधे लगाएगा, जिससे क्षेत्र में हरित आवरण बढ़ाने और प्रदूषण कम करने में मदद मिलेगी। प्रदूषण नियंत्रण के लिए तीन चरणों की कार्ययोजना अल्पकालीन उपाय धूल नियंत्रण के लिए तत्काल तकनीक लागू करना। कोयला साइडिंग और परिवहन व्यवस्था में सुधार। मध्यमकालीन उपाय ईटीपी/एसटीपी (अपशिष्ट जल शोधन संयंत्र) की स्थापना। औद्योगिक कचरा प्रबंधन। हरित पट्टियों का विस्तार।दीर्घकालीन उपाय स्वच्छ एवं टिकाऊ तकनीकों को अपनाना।स्वच्छ ऊर्जा का उपयोग बढ़ाना। ‘जीरो लिक्विड डिस्चार्ज’ और न्यूनतम उत्सर्जन वाले उद्योग विकसित करना। पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे ने स्पष्ट किया कि औद्योगिक विकास जितना आवश्यक है, उतना ही नागरिकों का स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण भी महत्वपूर्ण है। प्रदूषण नियंत्रण में किसी भी प्रकार की लापरवाही या समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।