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सरकारी नियमों कि धज्जियां उड़ा रही है,वणी रुखमई कोलवाशरी

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सरकारी नियमों कि धज्जियां उड़ा रही है,वणी रुखमई कोलवाशरी



जिल्हाधिकारी,प्रदुषण नियंत्रण विभाग कि चुप्पी


घुग्घुस/वणी : वेकोलि वणी क्षेत्र में बरसों से कोयले कि हेराफेरी, मिलावटखोरी,कालाबजारी में सोने का सिक्का जमाकर बैठी रुखमई वाशरी में सरकारी पर्यावरण नियमों का सरासर धज्जियां उड़ाई जा रही है।वाशरी में अग्निशमन वाहन और कोयला धुलाई के लिए पाणी का भी कोई विशेष उपाय योजना नही है। लाखों टन कोयला धुलाई के लिए पाणी टॅकर और जमीन में बोर खोदकर पाणी का उपयोग किया जा रहा है।जिससे ज़मीन में पाणी का लेवल दिनों दिन गिरता जा रहा है। उक्त समास्या से आनेवाले कुछ वर्ष में जनता को पानी के किल्लत से जुझना पड सकता है। साथ ही रुखमई वाशरी पाणी टॅक्स से भी मुंह फेर रही है। जमीनी ,पाणी टॅक्स चोरी से शासन को लाखों करोड़ों का नुक़सान हो रहा।
वाशरी से महाराष्ट्र सरकार और जनता का नुक़सान होंने के बावजूद भी यवतमाल जिलाधिकारी और एमपीसीबी प्रादेशिक अधिकारी भी मौन साधे हुए हैं। क्षेत्र वासियों को वाशरी से होनेवाले गंभीर समस्या पर कोई जनप्रतिनिधि और समाजिक कार्यकर्ता हक्क कि लडाई के लिए सामने अवाज नही उठा रहा है।
जिससे शासन प्रशासन के कार्यप्रणाली पर अलग अलग सवाल उठ रहे हैं। बताया जाता है कि वणी शहर में लालपुलिया यवतमाल मुख्य मार्ग पर स्थित रुखमई वाशरी जबसे सुरु हुई है। हमेशा सवालों के घेरे में होती हैं।कभी समाचार पत्र में कभी जनता के बीच उपोषण आंदोलन बीच चर्चा होते रहेती है।

आगजनी घटणा को नियंत्रित करने के लिए अग्निशमन वाहन नही

कोयला एक स्व ज्वलनशील पदार्थ है। यह वातावरण से लगातार ऑक्सीजन लेता है और ऑक्सीजन मिलने से प्रतिक्रिया होती है। जिससे कोयले के अंदर गर्मी धीरे-धीरे बढ़ते जाती है। कोयले के ढेर के अंदर से रास्ता नहीं मिलने से तापमान बढ़ जाता है। काफी तेज तापमान होने से कोयले में स्वमेव आग लग जाती है। एक बार कोयला में आग लगने के बाद उसे बुझाना मुश्किल हो जाता है, क्योंकि आग अंदर लगी हुई रहती है और धीरे- धीरे कोयला सुलगता रहता है। इस स्वतःआग लगने की घटना को स्पोलटेनियस (स्वतः उष्मता) कहा जाता है
कोयला खदान से निकला हुआ कोयला का भंडारण तथा धुलाई के समय आग लगने का खतरा हमेशा बना रहेता है। जिसके लिए वाशरी में आपातकालीन में आग बुझाने के लिए अग्निशमन वाहन कि उपाय योजना हैं कि नही इसकी जांच करना अत्यंत आवश्यक है।जैसे कि प्रशिक्षित कर्मचारी,अलार्म सिस्टम,पाणी का बडा भंडारण,जलस्रोत अदी है कि नहीं इसकी जांच शासन प्रशासन से कि जा रही है।

कोयला धुलाई के लिए पानी कहां से आ रहा?

वाशरी में कोयला धुलाई के लिए पानी कौनसे जलस्रोत से उपयोग में लाया जा रहा है। टॅकर,बोर से पाणी रोज कितने गैलेन में लिया जाता है? इसके लिए सरकारी अनुमति है कि नहीं?पाणी को उपयोग में लेने बाद दुबारा उस पाणी को उपयोग में लिया जाता है कि नहीं ? प्रदुषित पाणी को कहां बहाया जा रहा है?इसकी जांच होना अत्यंत आवश्यक है।
वाशरी सुरु करने के पुर्व परमिशन हुआ है कि नहीं? उसकी जांच करने कि मांग उठ रही।
क्षेत्र में कोल वाशरी सुरु करने के पुर्व संबंधित विभाग तथा शासन प्रशासन से वाशरी के पास प्रदुषण तथा पर्यावरण कि मंजुरी, जलस्रोत कि अनुमति, सेफ्टी सुरक्षा तथा अग्नि सुरक्षा संबंधी जानकारी एवं प्रमाणपत्र वाशरी के पास है कि नहीं जांच का मामला अति गंभीर है। जल प्रदुषण तथा वायु प्रदुषण अन्य शासन प्रशासन के नियमों का उल्लंघन होने पर वाशरी पर कार्रवाई कि मांग हों रही। आपातकालीन स्थिति पर वाशरी में कुछ उपाय योजना हैं कि नही?नही होने पर कारन बताओ नोटिस सिघ्र जारी करे। प्रकल्प के पर्यावरण संबंध में स्थानीय नागरिकों को पल पल कि खबर पेश करें। वाशरी के कोयले कि कालाबाजारी में लिप्त सभी अधिकारि, व्यापारी पर बड़ी कार्रवाई करने कि मांग शासन प्रशासन, सीबीआई,विजीलेंस उच्च अधिकारी से नागरिक , समाजिक कार्यकर्ता द्वारा कि जा रही है।

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