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घुग्घूस में आवारा कुत्तों का आतंक

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घुग्घूस में आवारा कुत्तों का आतंक



मुख्याधिकारी, कलेक्टर और स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी बन सकती है जानलेवा


घुग्घूस (चंद्रपुर):
घुग्घूस शहर में आवारा और रानटी कुत्तों का आतंक दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है, शहर में बच्चों पर आवारा ,खौफनाक कुत्तो का हमेशा प्राणघातक प्रहार हो रहा है, लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि नगर परिषद के मुख्याधिकारी, जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर खतरे पर पूरी तरह मौन साधे हुए हैं। यह चुप्पी भविष्य में किसी बड़ी दुर्घटना और प्राणहानी का कारण बन सकता है।

शहर के रिहायशी इलाकों, स्कूल परिसरों, बाजार क्षेत्रों और मुख्य सड़कों पर आवारा कुत्तों के झुंड खुलेआम घूम रहे हैं, जिससे छोटे बच्चों, बुजुर्गों, महिलाओं और दिव्यांग नागरिकों की सुरक्षा पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़ा हो गया है। इसके बावजूद नगर परिषद द्वारा कोई ठोस, स्थायी और प्रभावी योजना आज तक जमीन पर उतरती दिखाई नहीं दे रही।

 दिनांक 15 दिसंबर 2025 को संत श्री साईबाबा बहुउद्देशीय संस्था के अध्यक्ष  गणेश शेंडे के नेतृत्व में संस्था पदाधिकारी व स्थानीय नागरिकों ने नगर परिषद घुग्घूस के मुख्याधिकारी. निलेश राजणकर को लिखित निवेदन सौंपकर स्थिति की गंभीरता से अवगत कराया।

निवेदन में स्पष्ट किया गया कि शहर में पहले भी कुत्तों के काटने की कई घटनाएं घट चुकी हैं, बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग ने न तो जागरूकता अभियान चलाया, न ही एंटी-रेबीज जैसी जरूरी व्यवस्थाओं को लेकर कोई ठोस पहल की। सवाल यह है कि क्या स्वास्थ्य विभाग किसी मौत के बाद ही हरकत में आएगा?

सबसे बड़ा सवाल जिला प्रशासन पर भी खड़ा हो रहा है।
जिला कलेक्टर, जो जिले की कानून-व्यवस्था और नागरिक सुरक्षा के सर्वोच्च जिम्मेदार हैं, उनकी निगरानी में यह समस्या आखिर इतने लंबे समय तक कैसे पनपती रही? क्या जिला प्रशासन नगर परिषद की नाकामी पर आंखें मूंदे बैठा है?

नागरिकों का साफ आरोप है कि…

नगर परिषद की उदासीनता
मुख्याधिकारी की निष्क्रियता
स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही
और जिला प्रशासन की अनदेखी
इन सभी ने मिलकर घुग्घूस शहर को खुले खतरे के हवाले कर दिया है।

नागरिकों ने प्रशासन को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि बीच बाजार से मटन को अलग जगह पर स्थानांतरित करें,यदि तत्काल आवारा कुत्तों और मोकाट जानवरों का बंदोबस्त नहीं किया गया, तो भविष्य में होने वाली किसी भी जनहानि या प्राणहानी की संपूर्ण जिम्मेदारी नगर परिषद के मुख्याधिकारी, जिला कलेक्टर और स्वास्थ्य विभाग की होगी।

निवेदन सौंपते समय..

गणेश वझे, शंकर कामतवार, पंकज बावणे, अंबादास चौधरी, बबलू कुरैशी, आशिष पातरंगे, श्रीकांत पातरंगे, रूपेश डंभारे, नफीज भाई, राजू कामतवार, अनिल कामतवार, सचिन बोंडे, त्रिशरण पाटील, भानुदास बोबडे, मनाफ भाई सहित बड़ी संख्या में घुग्घूस के नागरिक उपस्थित थे।

अब सवाल सीधा और साफ है—

क्या प्रशासन अभी जागेगा या फिर किसी मासूम की जान जाने के बाद ही जिम्मेदारी तय की जाएगी?

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