महंगाई, ईंधन मूल्य वृद्धि और स्मार्ट मीटर के खिलाफ शिवसेना का प्रदर्शन
जनविरोधी नीतियों पर सरकार को घेरा, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
चंद्रपुर : बढ़ती महंगाई, ईंधन मूल्य वृद्धि, किसानों की समस्याओं, शिक्षा शुल्क में बढ़ोतरी तथा स्मार्ट मीटर योजना के विरोध में शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) की ओर से सोमवार को जोरदार प्रदर्शन किया गया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाते हुए प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।
यह आंदोलन शिवसेना पक्ष प्रमुख उद्धव बालासाहेब ठाकरे के मार्गदर्शन तथा चंद्रपुर जिला नेतृत्व संदीप गिर्हे के नेतृत्व में आयोजित किया गया। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि सरकार की नीतियों के कारण आम नागरिक, किसान, मजदूर, विद्यार्थी और व्यापारी वर्ग आर्थिक संकट से जूझ रहा है।
शिवसेना नेताओं ने कहा कि लगातार बढ़ रही ईंधन कीमतों के कारण जीवन उपयोगी वस्तुओं के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे आम जनता का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है। वहीं किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल रहा है, जबकि खाद, बीज और कृषि सामग्री की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं।
संगठन ने शिक्षा शुल्क में हो रही वृद्धि पर भी चिंता जताई और कहा कि इससे विद्यार्थियों के अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। इसके साथ ही ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में लगाए जा रहे स्मार्ट मीटरों को लेकर भी लोगों में भारी नाराजगी है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली बिलों में वृद्धि की शिकायतें सामने आ रही हैं।
प्रमुख मांगें
पेट्रोल-डीजल की कीमतों में तत्काल कमी की जाए।
-महंगाई पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं।
-किसानों को फसलों का उचित मूल्य और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) सुनिश्चित किया जाए।
-खाद, बीज और कृषि सामग्री की कीमतें कम की जाएं।
-शिक्षा शुल्क वृद्धि पर रोक लगाई जाए।
स्मार्ट मीटर योजना को तत्काल स्थगित कर शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
आम जनता के हित में राहतकारी फैसले लिए जाएं।
NEET सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक मामलों की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
-शिक्षा मंत्री नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दें।भविष्य में परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और विश्वसनीय बनाया जाए।
शिवसेना पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द ही इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को और अधिक तीव्र किया जाएगा।