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‘पॉश’ कानून का उल्लंघन पड़ेगा महंगा

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‘पॉश’ कानून का उल्लंघन पड़ेगा महंगा



सरकारी और निजी संस्थानों में खामियां मिलने पर होगी दंडात्मक कार्रवाई


जिला स्तरीय टीम ने शुरू किया विशेष निरीक्षण अभियान


चंद्रपुर, 16 जून। कार्यस्थलों पर महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शासन ने कार्यस्थल पर महिलाओं के लैंगिक उत्पीड़न (पॉश) अधिनियम के सख्त पालन का निर्णय लिया है। इसके तहत जिले के सभी सरकारी, अर्धसरकारी, सहकारी संस्थानों तथा निजी प्रतिष्ठानों की जांच की जाएगी। जांच के दौरान नियमों में खामियां पाए जाने पर संबंधित संस्थानों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

जिला प्रशासन के निर्देशानुसार जिला स्तरीय निरीक्षण दल ने 15 जून से विशेष अभियान की शुरुआत कर दी है। अभियान के तहत सबसे पहले सहायक श्रम आयुक्त कार्यालय, महिला आर्थिक विकास महामंडल, जिला सूचना कार्यालय, भूमि अभिलेख कार्यालय, जीएसटी कार्यालय सहित विभिन्न सरकारी कार्यालयों का निरीक्षण किया गया। इस टीम में जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी मीनाक्षी भस्मे, बाल विकास परियोजना अधिकारी प्रकाश भांदककर तथा विधि अधिकारी अनिल तानले शामिल थे।

प्रशासन के अनुसार पॉश अधिनियम के तहत प्रत्येक संस्था में महिलाओं की शिकायतों के निवारण के लिए आंतरिक शिकायत समिति (ICC) का गठन अनिवार्य है। हालांकि कई संस्थानों में समितियां केवल कागजों तक सीमित हैं या उनकी जानकारी अद्यतन नहीं है। कई जगहों पर कानून की आवश्यक शर्तों का पालन भी नहीं किया जा रहा है।

इसी को ध्यान में रखते हुए जिले में 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले सभी संस्थानों की जांच की जाएगी। प्रशासन का मानना है कि इस अभियान से महिला कर्मचारियों के लिए सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित होगा तथा कानून का प्रभावी क्रियान्वयन संभव हो सकेगा।

उल्लंघन पर लगेगा भारी जुर्माना

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि 10 या उससे अधिक कर्मचारियों वाले सभी संस्थानों में आंतरिक शिकायत समिति का गठन, सूचना बोर्ड का प्रदर्शन, ‘शी-बॉक्स’ पोर्टल पर पंजीकरण तथा समिति की अद्यतन जानकारी उपलब्ध होना अनिवार्य है।

नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर पहली बार 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। वहीं दूसरी बार उल्लंघन होने पर 1 लाख रुपये का जुर्माना तथा संबंधित संस्था का लाइसेंस रद्द करने तक की कार्रवाई की जा सकती है।

इन बिंदुओं की होगी जांच

निरीक्षण के दौरान पॉश नीति, समिति की संरचना, महिला सदस्यों की संख्या, बाहरी सदस्य की नियुक्ति, शिकायत दर्ज करने की व्यवस्था, जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन तथा जांच प्रक्रिया की गोपनीयता जैसे पहलुओं की जांच की जाएगी। साथ ही ‘शी-बॉक्स’ पोर्टल पर पंजीकरण और उसके नियमित अद्यतन की भी समीक्षा होगी।

जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी मीनाक्षी भस्मे ने सभी संस्थानों से अपील की है कि वे जांच से पहले अपने रिकॉर्ड और आवश्यक दस्तावेजों को अद्यतन रखें, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पॉश कानून का पूरी तरह पालन किया जा रहा है।

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