RTI नियम 2026 पर बढ़ा विवाद, भारतीय ऑल मीडिया सुरक्षा फोरम ने उठाई आवाज
मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को सौंपा जाएगा निवेदन, सूचना के अधिकार पर अंकुश लगाने का आरोप
चंद्रपुर |
महाराष्ट्र सरकार द्वारा अधिसूचित महाराष्ट्र सूचना का अधिकार (RTI) नियम 2026 को लेकर विरोध के स्वर तेज होने लगे हैं। विभिन्न सामाजिक संगठनों, आरटीआई कार्यकर्ताओं और पारदर्शिता के पक्षधर नागरिकों के बाद अब भारतीय ऑल मीडिया सुरक्षा फोरम ऑफ इंडिया ने भी नए नियमों पर गंभीर आपत्ति जताई है। संगठन ने आरोप लगाया है कि नए प्रावधान सूचना के अधिकार कानून की मूल भावना को कमजोर कर सकते हैं और आम नागरिकों के लिए जानकारी प्राप्त करना कठिन बना सकते हैं।
फोरम के राष्ट्रीय अध्यक्ष अय्यूब भाई कच्छी ने कहा कि सूचना का अधिकार लोकतंत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने का सबसे प्रभावी हथियार है। ऐसे में कोई भी नियम नागरिकों के सूचना प्राप्त करने के अधिकार को सीमित करने वाला नहीं होना चाहिए।
मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को भेजा जाएगा विस्तृत निवेदन
फोरम के पदाधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रीय यूथ अध्यक्ष अरशद कच्छी, राष्ट्रीय प्रसिद्धि प्रमुख शोएब कच्छी, भद्रावती तालुका अध्यक्ष नागेंद्र चटपल्लीवार, चंद्रपुर महानगर अध्यक्ष देवेंद्र हिंगोरानी तथा अन्य पदाधिकारी जल्द ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और महाराष्ट्र के मुख्य सचिव को एक विस्तृत निवेदन सौंपेंगे।
निवेदन में RTI नियम 2026 के उन प्रावधानों को वापस लेने अथवा संशोधित करने की मांग की जाएगी, जिनसे आम नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक और प्रशासनिक बोझ पड़ने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
किन प्रावधानों पर है आपत्ति?
फोरम के अनुसार नए नियमों में कई ऐसे बदलाव किए गए हैं जिनसे सूचना प्राप्त करने की प्रक्रिया जटिल हो सकती है।
- आरटीआई आवेदन शुल्क 10 रुपये से बढ़ाकर 30 रुपये किया गया।
- सूचना की प्रति के लिए प्रति पृष्ठ 5 रुपये शुल्क निर्धारित।
- प्रथम अपील के लिए 50 रुपये तथा द्वितीय अपील के लिए 100 रुपये शुल्क का प्रावधान।
- आवेदन में 150 शब्दों की सीमा तय की गई।
- कुछ मामलों में सूचना प्राप्त करने का अधिकार साबित करने की जिम्मेदारी आवेदक पर डालने का प्रावधान।
संगठन का कहना है कि ये व्यवस्थाएं सूचना मांगने के संवैधानिक अधिकार पर अप्रत्यक्ष प्रतिबंध लगाने जैसी हैं।
बीपीएल नागरिकों पर भी बढ़ेगा बोझ?
फोरम ने गरीबी रेखा से नीचे (BPL) जीवनयापन करने वाले नागरिकों के लिए भी शुल्क संबंधी प्रावधानों पर सवाल उठाए हैं। संगठन का कहना है कि इससे गरीब नागरिकों के लिए सूचना प्राप्त करना और अधिक कठिन हो सकता है, जबकि सूचना का अधिकार कानून का उद्देश्य सभी नागरिकों को समान अवसर प्रदान करना है।
“RTI की मूल भावना बचाई जाए”
फोरम ने नियम 22 सहित अन्य विवादित प्रावधानों पर पुनर्विचार की मांग करते हुए कहा कि सूचना का अधिकार केवल एक कानून नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई और सुशासन सुनिश्चित करने का सशक्त माध्यम है।
संगठन ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि RTI नियम 2026 पर व्यापक जनचर्चा कर विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों, पत्रकारों और नागरिकों की राय ली जाए तथा विवादित प्रावधानों को वापस लेकर आवश्यक संशोधन किए जाएं।
फोरम का कहना है कि मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को सौंपे जाने वाले निवेदन में नागरिक हितों की रक्षा, पारदर्शिता को मजबूत करने और RTI कानून की मूल भावना को अक्षुण्ण रखने की मांग प्रमुख रूप से उठाई जाएगी।
“लोकतंत्र में सूचना का अधिकार जनता की ताकत है, इसे कमजोर नहीं बल्कि और मजबूत किया जाना चाहिए।”










