Home Breaking News लोकतंत्र सेनानियों का त्याग नई पीढ़ी तक पहुंचे : विधायक सुधीर मुनगंटीवार

लोकतंत्र सेनानियों का त्याग नई पीढ़ी तक पहुंचे : विधायक सुधीर मुनगंटीवार

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लोकतंत्र सेनानियों का त्याग नई पीढ़ी तक पहुंचे : विधायक सुधीर मुनगंटीवार



बल्लारपुर में आपातकाल दिवस पर लोकतंत्र सेनानियों का सम्मान, संविधान और लोकतंत्र की रक्षा का लिया संकल्प


चंद्रपुर जिला ब्यूरो चीफ हनिफ शेख

बल्लारपुर (ऊष्मा कि आवाज)भारतीय लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले लोकतंत्र सेनानियों का त्याग, साहस और बलिदान नई पीढ़ी तक पहुंचना चाहिए। आपातकाल के कठिन दौर में इन सेनानियों ने अपने अधिकारों, संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए जो संघर्ष किया, वह देश के इतिहास में स्वर्णाक्षरों में दर्ज है। यह विचार महाराष्ट्र के पूर्व वन, सांस्कृतिक कार्य एवं मत्स्य व्यवसाय मंत्री तथा विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने व्यक्त किए।

वे बल्लारपुर के गोपाला सभागार में भारतीय जनता पार्टी द्वारा आयोजित आपातकाल दिवस के अवसर पर लोकतंत्र सेनानियों के सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे।

इस अवसर पर भाजपा के वरिष्ठ नेता चंदन सिंह चंदेल, जिला अध्यक्ष हरीश शर्मा, महेश शर्मा, रणजय सिंह, डॉ. मंगेश गुलवाडे, ब्रिजभूषण पाझारे, सतीश कणकम, घनश्याम बुरुडकर, वैशाली जोशी सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।

कार्यक्रम में लोकतंत्र सेनानी सुधीर वसंत तिखेकर, हेमंत वासुदेव डहाके, कृष्णा दत्तात्रेय देशपांडे तथा स्वर्गीय राजाभाऊ देशकर की ओर से उनकी पत्नी मीनाताई देशकर का विधायक मुनगंटीवार के हाथों शॉल एवं श्रीफल देकर सम्मान किया गया।

आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का काला अध्याय

अपने संबोधन में विधायक मुनगंटीवार ने कहा कि 25 जून 1975 को देश में लागू किया गया आपातकाल भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे काला अध्याय था। उस समय संविधान प्रदत्त अधिकारों और लोकतांत्रिक मूल्यों पर गंभीर आघात किया गया। हजारों लोकतंत्र सेनानियों ने जेल की यातनाएं सहकर भी लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष किया, लेकिन कभी झुके नहीं।

उन्होंने कहा कि “जिएंगे तो देश के लिए, मरेंगे तो देश के लिए” की भावना के साथ लोकतंत्र सेनानियों ने हर अत्याचार सहन किया और देश में लोकतंत्र को जीवित रखने का कार्य किया।

बचपन की यादें कीं साझा

विधायक मुनगंटीवार ने अपने बचपन की यादों को साझा करते हुए कहा कि जब वे मात्र 12 वर्ष के थे, तब उन्होंने अपनी आंखों के सामने अपने पिता को पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर जेल ले जाते देखा था। ऐसी घटनाएं उस दौर में हजारों परिवारों ने झेली थीं। देशभक्तों के साथ अपराधियों से भी बदतर व्यवहार किया गया, लेकिन उनके संघर्ष के कारण आज देश लोकतांत्रिक वातावरण में स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ रहा है।

संविधान की रक्षा का लिया संकल्प

उन्होंने कहा कि भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा निर्मित भारतीय संविधान देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था की आत्मा है। आपातकाल के दौरान इसी संविधान की भावना को सबसे अधिक चोट पहुंचाई गई थी। इसलिए नई पीढ़ी को उस दौर की सच्चाई से अवगत कराना बेहद आवश्यक है, ताकि इतिहास की ऐसी भूल दोबारा न दोहराई जाए।

लोकतंत्र सेनानियों को मिला सम्मान

मुनगंटीवार ने बताया कि वित्त मंत्री रहते हुए मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में लोकतंत्र सेनानियों को स्वतंत्रता सेनानियों के समान सम्मान और अधिकार दिलाने की प्रक्रिया में उन्हें योगदान देने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि यह निर्णय लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले सभी सेनानियों के त्याग का सम्मान है।

कार्यक्रम के अंत में विधायक मुनगंटीवार ने सभी लोकतंत्र सेनानियों को नमन करते हुए उपस्थित नागरिकों से संविधान, लोकतंत्र और देश की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहने का आह्वान किया।

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