
आस्था और भक्ति में डूबा घुग्घुस:आषाढ़ी एकादशी पर निकली भव्य पालखी यात्रा
वढा विठ्ठल मंदिर में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
घुग्घुस, प्रतिनिधि।
आषाढ़ शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे देवशयनी या आषाढ़ी एकादशी के नाम से जाना जाता है, के पावन अवसर पर शनिवार को घुग्घुस सहित पूरे क्षेत्र में भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। भगवान विठ्ठल-रुक्मिणी के जयघोष, भजन-कीर्तन, टाल-मृदंग की मधुर धुन और पालखी यात्रा के साथ श्रद्धालुओं ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
हिंदू धर्म में आषाढ़ी एकादशी का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी दिन भगवान श्रीहरि विष्णु चार माह के योगनिद्रा में प्रवेश करते हैं और चातुर्मास का शुभारंभ होता है। इस अवसर पर व्रत, पूजा, भजन-कीर्तन और दान-पुण्य का विशेष महत्व होता है।
घुग्घुस के विठ्ठल मंदिर से सुबह भव्य पालखी यात्रा का शुभारंभ हुआ। हजारों श्रद्धालु “विठ्ठल… विठ्ठल… जय हरि विठ्ठल” के जयघोष के साथ लगभग आठ किलोमीटर पैदल चलकर वढा (पांढरकवडा) स्थित त्रिवेणी संगम विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर पहुंचे। मंदिर परिसर में दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा।
हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी चंद्रपुर जिले सहित पूरे विदर्भ के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में वारकरी और श्रद्धालु पालखी, दिंडी, भजन-कीर्तन और भक्तिमय गीतों के साथ यात्रा में शामिल हुए। महिलाओं, पुरुषों और युवाओं की उत्साहपूर्ण भागीदारी ने यात्रा को आध्यात्मिक उत्सव का स्वरूप प्रदान किया।
पालखी यात्रा शहर के गांधी चौक, बैंक ऑफ इंडिया चौक, पुलिस स्टेशन, छत्रपति शिवाजी चौक, पांढरकवडा, शेनगांव, उसगांव और अमलाई मार्ग से गुजरते हुए वढा विठ्ठल मंदिर पहुंची। मार्ग में विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं नागरिकों ने श्रद्धालुओं का पुष्पवर्षा कर स्वागत किया तथा पानी, चाय, नाश्ता, मिठाई और प्रसाद वितरित कर सेवा भाव का परिचय दिया।
वढा स्थित विठ्ठल-रुक्मिणी मंदिर में दिनभर भजन-कीर्तन, आरती और धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन हुआ। दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी रहीं और पूरा क्षेत्र “ज्ञानोबा-तुकाराम” तथा “पांडुरंग विठ्ठल” के जयघोष से गूंजता रहा।
आषाढ़ी एकादशी के इस पावन पर्व ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि भक्ति, सेवा, समानता और मानवता ही भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान है। घुग्घुस से वढा तक निकली यह पालखी यात्रा श्रद्धा, एकता और सामाजिक समरसता का जीवंत प्रतीक बन गई।










