
आश्रम स्कूल में नाबालिग छात्रों के साथ कथित यौन शोषण से हड़कंप
भाजपा महिला मोर्चा ने जिलाधिकारी से की सख्त कार्रवाई और आश्रम स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग
चंद्रपुर | प्रतिनिधि
चंद्रपुर जिले के बल्लारपुर तहसील के कारवा स्थित प्राथमिक एवं माध्यमिक आश्रम स्कूल के छात्रावास में नाबालिग विद्यार्थियों के साथ कथित यौन शोषण की घटना सामने आने से सनसनी फैल गई है। घटना की गंभीरता को देखते हुए भाजपा महिला आघाड़ी के पदाधिकारियों ने जिलाधिकारी वसुमना पंत से मुलाकात कर मामले में कड़ी कार्रवाई की मांग की।
महिला आघाड़ी की ओर से जिलाधिकारी को सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया कि आश्रम स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं होना चाहिए। स्कूल और छात्रावास परिसर में पर्याप्त CCTV कैमरे लगाए जाएं तथा उनकी नियमित निगरानी की व्यवस्था की जाए।
हर आश्रम स्कूल में हो काउंसलिंग सेंटर
महिला पदाधिकारियों ने मांग की कि आश्रम स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की मानसिक सुरक्षा के लिए स्थायी काउंसलिंग व्यवस्था शुरू की जाए। विशेष रूप से छात्राओं को किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर वे बिना डर अपनी बात संबंधित अधिकारियों तक पहुंचा सकें, इसके लिए प्रशिक्षित काउंसलर उपलब्ध कराए जाएं।
घटना से प्रभावित बच्चों को मानसिक आघात से बाहर निकालने के लिए विशेषज्ञों के माध्यम से तत्काल मनोवैज्ञानिक परामर्श उपलब्ध कराने की मांग भी जिलाधिकारी से की गई।
जिले की सभी आश्रम स्कूलों की हो सघन जांच
भाजपा महिला आघाड़ी ने जिले की सभी आश्रम स्कूलों और छात्रावासों की सुरक्षा व्यवस्था, CCTV, कर्मचारियों की कार्यप्रणाली और अन्य व्यवस्थाओं की व्यापक जांच कराने की मांग की। जांच के दौरान सामने आने वाली कमियों को तत्काल दूर करने पर भी जोर दिया गया।
पदाधिकारियों ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ किसी भी तरह की नरमी नहीं बरती जानी चाहिए। घटना में जिम्मेदार पाए जाने वाले लोगों पर कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं, ऐसी मांग जिलाधिकारी से की गई।
इस दौरान भाजपा महिला आघाड़ी की शहर अध्यक्ष छबु वैरागडे, नम्रता आचार्य ठेमस्कर, नगरसेविका सुनीता जयस्वाल, नगरसेविका सविता प्रलय सरकार, मुग्धा खांडे, शिला चव्हाण, ज्योति वेलके, रुपाली आंबटकर, सिंधुताई राजगुरे, वाणी सदालावार, हीना शेख और नाझीरा सय्यद सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
नाबालिग पीड़ितों की पहचान कानूनन संरक्षित है, इसलिए उनकी पहचान से जुड़ी कोई भी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जानी चाहिए।










