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पांढरकवड्यात 37 अनुदानित स्कूलों पर अवैध फीस वसूली के आरोप

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पांढरकवड्यात 37 अनुदानित स्कूलों पर अवैध फीस वसूली के आरोप



किशोर तिवारी का मुख्यमंत्री को पत्र; SIT जांच, फीस वापसी और दोषी संस्थाओं की मान्यता रद्द करने की मांग


यवतमाल | प्रतिनिधि

पांढरकवडा तालुका की 37 अनुदानित स्कूलों में कथित अवैध फीस वसूली का मामला अब राज्य सरकार तक पहुंच गया है। विदर्भ जन आंदोलन समिति के अध्यक्ष किशोर तिवारी ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर इस पूरे मामले की तत्काल जांच कराने और दोषी स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

तिवारी का आरोप है कि सरकारी अनुदान प्राप्त करने वाली कुछ शैक्षणिक संस्थाओं द्वारा विद्यार्थियों के अभिभावकों से ‘कंप्यूटर फीस’, ‘विकास निधि’, ‘परीक्षा शुल्क’ और ‘सांस्कृतिक कार्यक्रम’ जैसे अलग-अलग मदों के नाम पर कथित तौर पर राशि वसूली जा रही है। उनका कहना है कि इससे ग्रामीण, किसान और खेत मजदूर परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

RTE और शिक्षा के अधिकार का मुद्दा

किशोर तिवारी ने अपने पत्र में संविधान के अनुच्छेद 21-A और शिक्षा का अधिकार कानून, 2009 का हवाला देते हुए कहा है कि 6 से 14 वर्ष की आयु के बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार है। ऐसे में अनुदानित स्कूलों में नियमों के विपरीत फीस वसूली की शिकायतों की गंभीरता से जांच होना जरूरी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में फीस जमा करने में देरी होने पर विद्यार्थियों को कथित तौर पर कक्षा में सबके सामने खड़ा कर मानसिक रूप से परेशान किया जाता है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

37 स्कूलों की SIT जांच की मांग

विदर्भ जन आंदोलन समिति ने सरकार के सामने कई प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें पांढरकवडा की सभी 37 अनुदानित स्कूलों की विशेष जांच दल यानी SIT से जांच, अवैध रूप से राशि वसूलने वाले प्रबंधन के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और नियमों का उल्लंघन साबित होने पर कठोर दंड की मांग शामिल है।

अवैध फीस ब्याज समेत लौटाने की मांग

समिति ने अभिभावकों से कथित रूप से वसूली गई गैरकानूनी फीस 12 प्रतिशत ब्याज सहित वापस करने की मांग की है। साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वाली संस्थाओं का सरकारी अनुदान और मान्यता निलंबित अथवा रद्द करने की मांग भी की गई है।

शिक्षा के राष्ट्रीयकरण की मांग

किशोर तिवारी ने शिक्षा के बढ़ते व्यावसायीकरण पर भी सवाल उठाते हुए प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा के राष्ट्रीयकरण/सरकारीकरण की मांग की है। उनका कहना है कि शिक्षा को व्यापार का माध्यम बनाने के बजाय सरकार की मूल जिम्मेदारी के रूप में मजबूत किया जाना चाहिए।

सरकार को आंदोलन की चेतावनी

समिति ने चेतावनी दी है कि यदि राज्य सरकार ने कथित अवैध फीस वसूली के मामले में तत्काल कार्रवाई नहीं की, तो विदर्भ जन आंदोलन समिति किसान और अभिभावकों को साथ लेकर रास्ता रोको और तीव्र आंदोलन करेगी।

अब इस पूरे मामले में राज्य सरकार और शिक्षा विभाग की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर अभिभावकों और ग्रामीण क्षेत्र के लोगों की नजरें टिकी हैं।

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