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भाई की मौत के मामले में आवाज उठाने पर धमकी का आरोप; पुलिस कर्मचारी के खिलाफ शिकायत

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भाई की मौत के मामले में आवाज उठाने पर धमकी का आरोप; पुलिस कर्मचारी के खिलाफ शिकायत



शिकायतकर्ता अनुप यादव का दावा—मध्यस्थ के जरिए दी गई धमकी, कहा- “मैं फंसा तो उसे भी नहीं छोड़ूंगा”


सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित कर जांच की मांग; पुलिसकर्मी की शहर से बाहर बदली की भी मांग


चंद्रपुर। अपने भाई स्व. दिलीप चंद्रपाल यादव की मौत के मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे अनुप यादव ने एक पुलिस कर्मचारी पर अप्रत्यक्ष रूप से धमकी दिलवाने का गंभीर आरोप लगाया है। इस संबंध में उन्होंने 8 अगस्त 2026 को रामनगर पुलिस थाने में लिखित शिकायत देकर मामले की निष्पक्ष जांच, संबंधित पुलिस कर्मचारी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और स्वयं तथा परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

शिकायतकर्ता अनुप यादव के अनुसार, वह अपने भाई दिलीप यादव की मौत के मामले में शिकायतकर्ता हैं और मामले की जांच से जुड़े अधिकारियों के समक्ष अपना बयान भी दर्ज करा चुके हैं। उनका आरोप है कि उनके भाई ने जीवित रहते हुए संबंधित पुलिस कर्मचारी द्वारा कथित तौर पर परेशान किए जाने, पैसों की मांग और दबाव बनाए जाने की बातें उनसे कही थीं। इन्हीं कथित बयानों के आधार पर उन्होंने जांच में संबंधित पुलिस कर्मचारी की भूमिका की भी पड़ताल करने की मांग की है।

होटल के सामने हुई मुलाकात के बाद बढ़ा विवाद

शिकायत में अनुप यादव ने बताया कि 8 अगस्त को दोपहर करीब 12.30 बजे चंद्रपुर शहर के बस स्टैंड परिसर स्थित गिरीराज होटल के सामने उनकी मुलाकात उनके बचपन के परिचित रामजी यादव से हुई। बातचीत के दौरान रामजी यादव ने कथित रूप से संबंधित पुलिस कर्मचारी की ओर से कही गई कुछ बातें अनुप यादव तक पहुंचाईं।

अनुप यादव के मुताबिक, बातचीत के दौरान उन्हें बताया गया कि संबंधित पुलिस कर्मचारी का उनके भाई की मौत के मामले से कोई संबंध नहीं है और फिर यह सवाल उठाया गया कि अनुप यादव उनके पीछे क्यों पड़े हैं।

शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने जवाब दिया कि यदि संबंधित व्यक्ति की भूमिका नहीं है तो निष्पक्ष जांच में सच्चाई सामने आ जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि अपने भाई द्वारा बताई गई बातों के आधार पर ही उन्होंने संबंधित व्यक्ति की भूमिका की जांच की मांग की है।

“मैं फंसा तो उसे भी नहीं छोड़ूंगा” कहने का आरोप

अनुप यादव ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया है कि बातचीत के दौरान रामजी यादव ने संबंधित पुलिस कर्मचारी के हवाले से कथित रूप से कहा कि—

“मैं फंसा तो उसे भी नहीं छोड़ूंगा।

शिकायतकर्ता का दावा है कि इस कथित बयान को उन्होंने अपने ऊपर दबाव बनाने और उन्हें कानूनी लड़ाई से पीछे हटाने की कोशिश के रूप में महसूस किया। उन्होंने शिकायत में कहा कि वह किसी धमकी से डरने वाले नहीं हैं और अपने भाई की मौत के मामले में कानूनी तरीके से सत्य सामने लाने की मांग करते रहेंगे।

प्रत्यक्षदर्शी और CCTV फुटेज की जांच की मांग

घटना के समय उनके मित्र राजू कुकडे के मौके पर पहुंचने का उल्लेख करते हुए अनुप यादव ने उनका बयान दर्ज करने की मांग की है। साथ ही गिरीराज होटल, चंद्रपुर बस स्टैंड परिसर तथा आसपास की दुकानों और इमारतों में लगे CCTV कैमरों की फुटेज तत्काल सुरक्षित कर जांचने की मांग की गई है।

शिकायतकर्ता का कहना है कि CCTV फुटेज से घटनास्थल पर मौजूद लोगों और घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने में मदद मिल सकती है।

पुलिसकर्मी की भूमिका की स्वतंत्र जांच की मांग

अनुप यादव ने अपनी शिकायत में यह भी मांग की है कि उनके भाई की मौत से संबंधित पहले दिए गए निवेदनों, शिकायतों और उपलब्ध साक्ष्यों की पृष्ठभूमि में उन पर दबाव या धमकी देने का प्रयास हुआ है या नहीं, इसकी स्वतंत्र जांच की जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि मामले में पुलिस कर्मचारी का नाम सामने आने के कारण जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से संबंधित पुलिस कर्मचारी की चंद्रपुर शहर से बाहर बदली करने की मांग भी शिकायत में की गई है।

वरिष्ठ अधिकारियों को भी भेजी शिकायत की प्रतियां

शिकायत की प्रतियां पुलिस महानिरीक्षक, नागपुर विभाग; पुलिस अधीक्षक, CID नागपुर; पुलिस अधीक्षक, चंद्रपुर तथा CID के संबंधित जांच अधिकारी को भेजे जाने की जानकारी दी गई है।

अनुप यादव ने कहा कि उन्हें किसी व्यक्ति से व्यक्तिगत विवाद नहीं चाहिए। उनकी मांग केवल इतनी है कि उनके भाई की मौत के मामले की निष्पक्ष जांच हो, वास्तविकता सामने आए और उन्हें तथा उनके परिवार को किसी भी प्रकार के दबाव, धमकी या नुकसान से सुरक्षा मिले।

फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। संबंधित पुलिस कर्मचारी अथवा अन्य पक्ष का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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