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परियोजना प्रभावित किसानों-मजदूरों का महासम्मेलन

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परियोजना प्रभावित किसानों-मजदूरों का महासम्मेलन



रोजगार,पुनर्वास और प्रदूषण के मुद्दे पर बच्चु कडु ने उठाई बुलंद आवाज


सीमेंट-कोयला परियोजनाओं से प्रभावितों के लिए 80% रोजगार की मांग; ओवरलोड वाहनों पर रोक और 200 यूनिट मुफ्त बिजली की भी मांग


घुग्घुस, 11 अगस्त।
चंद्रपुर और यवतमाल जिले के वणी क्षेत्र परियोजना प्रभावित किसानों एवं मजदूरों की विभिन्न समस्याओं को लेकर मंगलवार को घुग्घुस के स्नेहप्रभा हॉल में महासम्मेलन आयोजित किया गया। शिवसेना वणी विधानसभा, शिवसेना घुग्घुस-चंद्रपुर शहर तथा प्रहार सामाजिक संगठन की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में सीमेंट संयंत्रों, कोयला खदानों और गिट्टी खदानों से प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं पर चर्चा की गई।

चंद्रपुर , वणी, मारेगांव और झरी-जामणी तहसील में बढ़ते औद्योगिक एवं खनन प्रकल्पों के कारण रोजगार, प्रदूषण, खेती, सड़क दुर्घटनाओं, पुनर्वास, बिजली और वन्यजीवों के बढ़ते खतरे जैसे मुद्दे गंभीर होते जा रहे हैं। इन्हीं समस्याओं को लेकर परियोजना प्रभावित किसान, मजदूर, स्थानीय युवा और नागरिकों को एकजुट करने का आह्वान किया गया।

रोजगार को लेकर बड़ी मांग

सम्मेलन में परियोजना प्रभावित किसानों और खेत मजदूरों को नियमानुसार 80 प्रतिशत रोजगार देने की मांग प्रमुखता से उठाई गई। इसके साथ ही वर्ष 1995 में जमीन अधिग्रहित होने के बावजूद रोजगार से वंचित प्रभावित परिवारों को नौकरी देने की मांग की गई।

कोयला खदानों में भू-धारकों को केवल सामान्य मजदूर के रूप में नियुक्त करने के बजाय उनकी शैक्षणिक योग्यता के आधार पर रोजगार और पद देने की मांग भी की गई।

ओवरलोड वाहनों पर कार्रवाई की मांग

खनन क्षेत्रों से भारी वाहनों की आवाजाही को लेकर भी सम्मेलन में सवाल उठाए गए। आयोजकों का आरोप है कि सड़कों की निर्धारित क्षमता की तुलना में कई गुना अधिक वजन वाले वाहन चल रहे हैं, जिससे सड़कें खराब होने के साथ दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है। ऐसे ओवरलोड वाहनों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई।

जमीन कम बची तो पुनर्वास की मांग

परियोजनाओं के कारण कई किसानों के पास बेहद कम कृषि भूमि बचने का दावा किया गया। ऐसे प्रभावित किसानों की शेष जमीन का अधिग्रहण कर संबंधित गांवों का समुचित पुनर्वास करने की मांग रखी गई।

वहीं, वर्षों से वनभूमि पर खेती करने वाले पात्र किसानों को अधिकार देने तथा उनके नाम 7/12 अभिलेख में दर्ज करने की मांग भी उठाई गई।

स्थानीय युवाओं के लिए 80% रोजगार

खनन प्रभावित क्षेत्रों में काम कर रही निजी कंपनियों में स्थानीय बेरोजगार युवाओं को नियमानुसार 80 प्रतिशत रोजगार देने की मांग सम्मेलन में रखी गई। आयोजकों का कहना है कि परियोजनाओं के कारण सबसे ज्यादा प्रभावित स्थानीय लोग हैं, इसलिए रोजगार के अवसरों में उनकी प्राथमिकता सुनिश्चित की जानी चाहिए।

प्रदूषण और स्वास्थ्य का मुद्दा भी गरम

सीमेंट संयंत्र और कोयला खदानों से कथित रूप से बढ़ते प्रदूषण को लेकर भी चिंता जताई गई। प्रभावित गांवों में प्रदूषण के कारण नागरिकों के स्वास्थ्य और कृषि पर असर पड़ने का दावा करते हुए गंभीर रूप से प्रभावित गांवों के पुनर्वास की मांग की गई।

बाढ़ और वन्यजीवों के खतरे का समाधान

खनन से निकलने वाली मिट्टी के बड़े-बड़े ढेरों के कारण पैनगंगा और वर्धा नदी के बाढ़ के पानी के प्रवाह पर असर पड़ने तथा कुछ गांवों में बाढ़ का खतरा बढ़ने का आरोप लगाया गया। ऐसे प्रभावित गांवों के पुनर्वास की मांग की गई।

इसके अलावा वणी क्षेत्र में खनन के बाद बढ़े झाड़ियों और वन क्षेत्र के कारण वन्यजीवों तथा बाघों की आवाजाही बढ़ने की बात कहते हुए मानव-वन्यजीव संघर्ष का स्थायी समाधान करने की मांग भी रखी गई।

परियोजना प्रभावितों को 200 यूनिट मुफ्त बिजली

सम्मेलन में परियोजना प्रभावित तहसीलों के नागरिकों को हर महीने 200 यूनिट मुफ्त बिजली देने की मांग भी उठाई गई।

आयोजकों के अनुसार, सम्मेलन का उद्देश्य परियोजना प्रभावित क्षेत्रों की समस्याओं को एक मंच पर लाकर शासन-प्रशासन के सामने मजबूती से रखना और रोजगार, जमीन, पुनर्वास, प्रदूषण तथा नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दों का स्थायी समाधान हासिल करना है।

परियोजना प्रभावित किसानों और मजदूरों की इन 11 मांगों पर अब शासन-प्रशासन क्या निर्णय लेता है, इस पर क्षेत्र के लोगों की नजरें टिकी हुई हैं।

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