नाबालिग बालिका से यौन अपराध मामले में आरोपी को 10 साल की सजा
पोक्सो कानून के तहत जिला एवं सत्र न्यायालय चंद्रपुर का फैसला; ₹5 हजार जुर्माना भी लगाया
चंद्रपुर, 5 सितंबर 2026।
नाबालिग बालिका के साथ यौन अपराध के मामले में चंद्रपुर के जिला एवं सत्र न्यायालय ने आरोपी को 10 वर्ष के सश्रम कारावास और 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा नहीं करने पर आरोपी को एक माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
यह मामला वर्ष 2022 का है। 3 जून 2022 को शाम के समय बालिका के परिजन घर लौटे तो बालिका घर पर नहीं मिली। तलाश के दौरान आरोपी के घर के पास बालिका के होने की जानकारी मिलने पर परिजनों ने वहां जाकर देखा। मामले की सूचना पुलिस को दिए जाने के बाद रामनगर पुलिस थाने में अपराध क्रमांक 611/2022 दर्ज किया गया।
पुलिस ने मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 376(AB), 506 तथा पोक्सो अधिनियम 2012 की धारा 4 और 6 के तहत अपराध दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया।
मामले की जांच के दौरान पुलिस ने प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान, चिकित्सकीय रिपोर्ट तथा अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्य एकत्र किए। जांच पूरी करने के बाद पुलिस ने समय पर न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल किया।
न्यायालय ने माना अभियोजन का पक्ष मजबूत
मामले की सुनवाई जिला एवं सत्र न्यायालय, चंद्रपुर में हुई। सरकार पक्ष की ओर से सरकारी अभियोक्ता एस. आर. डेगवार ने न्यायालय के समक्ष अभियोजन पक्ष की ओर से साक्ष्य एवं प्रभावी दलीलें प्रस्तुत कीं।
न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और अभियोजन पक्ष की दलीलों को स्वीकार करते हुए 5 सितंबर 2026 को आरोपी को धारा 376(AB) भादंवि तथा पोक्सो अधिनियम की धारा 4 और 6 के तहत 10 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 5 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
पुलिस टीम की महत्वपूर्ण भूमिका
मामले की जांच महिला पुलिस उपनिरीक्षक प्राची राजुरकर, रामनगर पुलिस थाना ने की। न्यायालयीन पैरवी अधिकारी के रूप में पुलिस उपनिरीक्षक शामराव पोईनकारे ने कार्य किया। सरकार की ओर से एस. आर. डेगवार ने न्यायालय में पैरवी की।
यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक आयुष नोपानी, अपर पुलिस अधीक्षक ईश्वर कातकडे तथा उपविभागीय पुलिस अधिकारी, चंद्रपुर के मार्गदर्शन में पूरी की गई। मामले में दोषसिद्धि सुनिश्चित करने में दोषसिद्धी कक्ष, चंद्रपुर की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।










