चंद्रपुर पुलिस ने किया अंतरराष्ट्रीय किडनी रैकेट का पर्दाफाश
भारत के नामी अस्पताल, बड़े डॉक्टर और एजेंट शामिल
कंबोडिया से लेकर दिल्ली-तमिलनाडु तक फैला था किडनी घोटाला
चंद्रपुर |
चंद्रपुर पुलिस ने एक ऐसी सनसनीखेज कार्रवाई को अंजाम दिया है, जिसने पूरे देश के चिकित्सा तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
किडनी प्रत्यारोपण की आड़ में चल रहे अंतरराष्ट्रीय किडनी रैकेट (घोटाले) का खुलासा करते हुए पुलिस ने भारत के नामी अस्पतालों, बड़े डॉक्टरों और दलालों की खतरनाक साठगांठ को बेनकाब किया है।
सावकारी केस से खुला किडनी रैकेट का राज
यह मामला चंद्रपुर जिले के नागभिड तहसील के 36 वर्षीय व्यक्ति की शिकायत से सामने आया।
पीड़ित ने ब्याज पर लिए गए पैसों की वसूली के दबाव में अन्य सावकारों से कर्ज लिया और भारी ब्याज चुकाया।
इस शिकायत पर
पुलिस स्टेशन ब्रह्मपुरी में
अपराध क्रमांक 654/2025
धाराएँ 387, 342, 294, 506, 120(बी), 326 भादवि
तथा महाराष्ट्र सावकारी (नियमन) अधिनियम 2014 की धारा 39, 44
के तहत मामला दर्ज किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच टीम (SIT) गठित की गई।
जांच में सामने आया किडनी प्रत्यारोपण का काला खेल
जांच के दौरान चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि शिकायतकर्ता ने कंबोडिया जाकर किडनी प्रत्यारोपण कराया था।
इस एंगल पर जांच बढ़ाते हुए पुलिस ने
The Transplantation of Human Organs and Tissues Act, 1994
की धारा 18 और 19 जोड़ी।
दो आरोपी गिरफ्तार, भारत कनेक्शन उजागर
इस मामले में कृष्णा उर्फ रामकृष्ण सुंचू और हिमांशु भारद्वाज को गिरफ्तार किया गया।
तकनीकी विश्लेषण और गहन पूछताछ के बाद
इस किडनी रैकेट का भारत कनेक्शन सामने आया।
नामी डॉक्टरों और अस्पतालों की भूमिका
जांच में सामने आया कि—
हिमांशु भारद्वाज ने शिकायतकर्ता रोशन कुडे और अन्य लोगों को कंबोडिया भेजा
जुलाई 2022 में स्वयं हिमांशु भारद्वाज ने भी आर्थिक तंगी के कारण अपनी किडनी अवैध रूप से बेची
इस अवैध प्रत्यारोपण में शामिल थे—
डॉ. राजरत्नम गोविंदस्वामी,
निदेशक – स्टार किम्स हॉस्पिटल, त्रिची (तमिलनाडु)
डॉ. रविंद्रपाल सिंह, दिल्ली
पैसों का पूरा बंटवारा सामने आया।
प्रारंभिक जांच में यह भी उजागर हुआ कि—
किडनी लेने वाले से 50 से 80 लाख रुपये वसूले जाते थे
डॉ. रविंद्रपाल सिंह (दिल्ली) को – 10 लाख रुपये
स्टार किम्स हॉस्पिटल, त्रिची को – 20 लाख रुपये
कृष्णा उर्फ रामकृष्ण सुंचू और अन्य एजेंटों को – 20 लाख रुपये
जबकि किडनी देने वाले गरीब व्यक्ति को केवल 5 से 8 लाख रुपये दिए जाते थे।
👉 यानी करोड़ों के इस गोरखधंधे में
गरीब की जान सस्ती और सिस्टम महंगा मुनाफा कमा रहा था।
देशभर में छापेमारी, डॉक्टर हिरासत में
मामले की जांच में—
LCB चंद्रपुर की टीम त्रिची (तमिलनाडु) पहुंची
जहां डॉ. राजरत्नम गोविंदस्वामी की तलाश जारी है और उन्हें हिरासत में लेने के प्रयास तेज़ हैं।
वहीं LCB की दूसरी टीम ने दिल्ली से डॉ. रविंद्रपाल सिंह को हिरासत में लिया। डॉ. रविंद्रपाल सिंह को
दिल्ली की अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें 2 जनवरी 2026 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, चंद्रपुर के समक्ष उपस्थित होने का आदेश दिया है।
एसपी ने किया बड़ा खुलासा
इस पूरे मामले की जानकारी
पुलिस अधीक्षक मुम्मका सुदर्शन ने
प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से दी।
उन्होंने कहा कि—
“कंबोडिया कनेक्शन के बाद अब भारत के नामी अस्पतालों और डॉक्टरों की भूमिका सामने आई है। आगे की जांच जारी है और और भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं।”
सबसे बड़ा सवाल
यह खुलासा कई गंभीर सवाल खड़े करता है—
क्या मानव अंगों की तस्करी में बड़े अस्पताल कानून से ऊपर हैं?
क्या डॉक्टरों की सफेद कोट के पीछे काला कारोबार चल रहा है?
कितने गरीब अब तक इस रैकेट का शिकार बन चुके हैं?
चंद्रपुर पुलिस की इस कार्रवाई ने
पूरे देश में हलचल मचा दी है।
👉 आगे की जांच जारी है…
और यह तय माना जा रहा है कि
किडनी रैकेट का यह मामला अभी और बड़े खुलासे करेगा।