Home Breaking News वढा में रेत माफियाओं का आतंक! रातभर ट्रैक्टरों की दहाड़,

वढा में रेत माफियाओं का आतंक! रातभर ट्रैक्टरों की दहाड़,

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वढा में रेत माफियाओं का आतंक! रातभर ट्रैक्टरों की दहाड़,



किसान सहमे — प्रशासन पर मिलीभगत के आरोप


घुग्घुस / चंद्रपुर
घुग्घुस के पास Wardha River किनारे स्थित पांढरकवड़ा–वढा घाट पर अवैध रेत तस्करी अब खुले आतंक में बदलती जा रही है। हालात ऐसे बन चुके हैं कि रेत माफिया खुद भी नहीं सोते और पूरे गांव को भी सोने नहीं देते।
स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि रात के अंधेरे में ट्रैक्टरों और मशीनों की आवाज से पूरा गांव दहशत में जी रहा है, जबकि जिम्मेदार विभाग मूकदर्शक बना हुआ है।

 नशे में हंगामा, गांव में दहशत का माहौल

ग्रामीणों के अनुसार गांव में सक्रिय रेत तस्कर रात के समय शराब के नशे में चौराहों पर इकट्ठा होकर हंगामा, गाली-गलौच और खुलेआम रेत तस्करी की योजना बनाते दिखाई देते हैं।
इस कारण गांव में डर और असुरक्षा का माहौल बन गया है। कई किसान परिवारों का कहना है कि रातभर जागकर खेतों और घरों की निगरानी करनी पड़ रही है।

फसलों पर ट्रैक्टर, किसानों की मेहनत तबाह

रेत तस्करी का यह खेल अब सिर्फ नदी तक सीमित नहीं रहा।
आरोप है कि रेत माफिया किसानों की खड़ी फसलों पर ही ट्रैक्टर दौड़ा देते हैं, जिससे महीनों की मेहनत मिनटों में बर्बाद हो जाती है।
जब किसान विरोध करते हैं तो नशे में धुत तस्कर मारपीट और धमकी पर उतर आते हैं।

दिन-रात रेत की चोरी, प्रशासन पर गंभीर आरोप

सूत्रों के मुताबिक वढा घाट से दिन-रात सैकड़ों ब्रास रेत की चोरी हो रही है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ जिम्मेदार पुलिस और महसूल विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से यह अवैध कारोबार खुलेआम चल रहा है।
इस अवैध तस्करी से महाराष्ट्र शासन को लाखों रुपये के महसूल का नुकसान हो रहा है।

 घरकुल टीपी के नाम पर रेत की हेराफेरी

स्थानीय लोगों का दावा है कि घरकुल लाभार्थियों के लिए मिलने वाली टीपी (ट्रांजिट परमिट) का भी दुरुपयोग किया जा रहा है।
दिन के समय कुछ लोग टीपी के नाम पर वढा घाट से रेत निकालते हैं, जबकि रात होते ही दूसरा गिरोह चोरी-छिपे ट्रैक्टरों से रेत निकालकर बेच देता है।
यानी दिन में कागजों का खेल और रात में खुलेआम तस्करी — यही वढा घाट की असली कहानी बन चुकी है।

आधी रात का ‘रेत ऑपरेशन

ग्रामीणों के अनुसार आधी रात के बाद कुछ तस्कर अंधेरे का फायदा उठाकर घाट से ट्रैक्टरों में रेत भरते हैं, ताकि खर्च-पानी के नाम पर मोटी कमाई की जा सके।
सुबह सूरज निकलते ही ट्रैक्टर गायब और तस्करी बंद, मानो कुछ हुआ ही नहीं।

अधिकारियों को भी धमकी

तस्करों के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि अब वे प्रशासनिक अधिकारियों को भी धमकाने और गाली-गलौच करने से नहीं डरते।
कानून व्यवस्था को खुलेआम चुनौती दी जा रही है, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदकर बैठे हैं, ऐसा आरोप स्थानीय लोग लगा रहे हैं।

 ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

इस पूरे मामले को लेकर स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं में भारी आक्रोश है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि:
वढा घाट पर तत्काल रेत तस्करी बंद कराई जाए
तस्करी में शामिल लोगों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
अवैध रेत ढोने वाले ट्रैक्टर और मशीनें जब्त की जाएं
रात में पुलिस और महसूल विभाग की सख्त निगरानी बढ़ाई जाए।

सबसे बड़ा सवाल

अब सवाल यह उठ रहा है —
क्या प्रशासन नींद से जागेगा?
या फिर Wardha River का वढा घाट यूं ही रेत माफियाओं की लूट का मैदान बना रहेगा?

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