Home Breaking News वढा घाट पर रेत माफियाओं का ‘काला साम्राज्य’!

वढा घाट पर रेत माफियाओं का ‘काला साम्राज्य’!

53

वढा घाट पर रेत माफियाओं का ‘काला साम्राज्य’!



दिन-रात ट्रैक्टरों से रेत की लूट, किसान दहशत में


तश्करी एक ही जगह से दो गुटों के रास्ते अलग-अलग जगह


पुलिस-महसूल पर संरक्षण के गंभीर आरोप


घुग्घुस / चंद्रपुर

 घुग्घुस पुलिस थाना क्षेत्र मे वढा पांढरकवडा  वर्धा नदी घाट से टीपी के नाम पर रेत का अवैध उत्खनन इन दिनों रेत माफियाओं का अड्डा बनता जा रहा है।आवास योजना के नाम पर शैकडो ब्रास रेत कि लुट लगातार जारी है।दिन रात डझन भर ट्रैक्टर से दो गुटों मे अलग अलग ढंग से रेत का अवैध उत्खनन चल रहा। बताया जा रहा है कि कुछ महसुल अधिकारी और पुलिस संरक्षण मे बेधड़क रेत कि तश्करी धड़ल्ले से कि जा रही। स्थानीय लोगों का आरोप है कि घाट पर दिन-रात ट्रैक्टरों से रेत की अवैध खुदाई और तस्करी का खेल खुलेआम चल रहा है, जबकि जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदकर बैठे हैं।सुबह घाट मे महसूल से रेत संचालित करनेवाले अधिकारी पहुचने के पुर्व ही सैकड़ों ब्रास रेत मे हाथ कि सफाई हो रही। रेत तश्करी मे लाखो का कारोबार चल रहा, महसूल को करोड़ों का नुक़सान हो रहा।

ग्रामीणों का कहना है कि हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि रेत माफिया खुद भी नहीं सोते और पूरे गांव को भी रातभर चैन से सोने नहीं देते। रात होते ही घाट और गांव के रास्तों पर ट्रैक्टरों की गड़गड़ाहट सुनाई देने लगती है और पूरा इलाका दहशत में डूब जाता है।

 नशे में चौराहों पर हंगामा, गांव में डर का माहौल
ग्रामीणों के अनुसार रेत तस्कर रात के समय शराब के नशे में गांव के चौराहों पर जमा होकर हंगामा, गाली-गलौच और तस्करी की योजना बनाते हैं।
इस कारण गांव में डर और असुरक्षा का माहौल बन गया है। कई किसानों का कहना है कि उन्हें रातभर जागकर अपने खेतों और घरों की निगरानी करनी पड़ती है।
फसल,खेतों पर ट्रैक्टर, चलाकर किसानों की मेहनत बर्बाद किया जा रहा
रेत तस्करी का यह खेल अब केवल नदी घाट तक सीमित नहीं रहा। आरोप है कि तस्कर किसानों की खड़ी फसलों पर ही ट्रैक्टर दौड़ा देते हैं, जिससे महीनों की मेहनत कुछ ही मिनटों में बर्बाद हो जाती है।
विरोध करने पर तस्कर धमकी और मारपीट तक पर उतर आते हैं।

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक वढा घाट से सैकड़ों ब्रास रेत रोजाना निकाली जा रही है, जिससे महाराष्ट्र सरकार को लाखों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस और महसूल विभाग के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की मिलीभगत के बिना यह काला कारोबार संभव ही नहीं है।
घरकुल टीपी के नाम पर बड़ा खेल
ग्रामीणों का कहना है कि घरकुल योजना के लिए जारी ट्रांजिट परमिट (टीपी) का भी दुरुपयोग बड़े पैमाने पर किया जा रहा है।
दिन में कुछ लोग टीपी के नाम पर घाट से रेत निकालते हैं
रात में दूसरा गिरोह चोरी-छिपे ट्रैक्टरों से रेत भरकर बाहर भेज देता है।
यानी दिन में कोरे कागजों का खेल और रात में खुलेआम तस्करी, यही वढा घाट की हकीकत बन चुकी है।

अलग-अलग रास्तों से चल रहा तस्करी का नेटवर्क
बताया जा रहा है कि रेत तस्करों ने दो अलग-अलग रास्तों से तस्करी का पूरा नेटवर्क तैयार कर रखा है।
दिन के समय वढा-पांढरकवडा मार्ग से ट्रैक्टरों के जरिए रेत ढुलाई
रात के समय वढा-धानोरा मार्ग से चोरी-छिपे बड़े पैमाने पर रेत की तस्करी
सुबह होते ही ट्रैक्टर गायब हो जाते हैं और घाट पर सन्नाटा छा जाता है।
‘सेटिंग’ के दम पर बेखौफ तस्करी?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि रेत तस्करों ने महसूल विभाग और पुलिस के कुछ अधिकारियों से ‘तगड़ी सेटिंग’ कर रखी है, जिसके बाद ही यह अवैध कारोबार बेखौफ चल रहा है।
रात के समय चौराहों और गलियों में गुर्गे तैनात रहते हैं, जो ट्रैक्टरों की आवाजाही पर नजर रखते हैं। लेकिन पुलिस पेट्रोलिंग के बावजूद कार्रवाई नहीं होती।
ग्रामीणों में भारी आक्रोश
लगातार हो रही रेत तस्करी से स्थानीय नागरिकों और किसानों में भारी आक्रोश है। लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि:
वढा घाट पर तत्काल रेत तस्करी बंद कराई जाए
तस्करी में शामिल लोगों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए
अवैध रेत ढोने वाले ट्रैक्टर और रास्ते बनानेवाले मशीन को जब्त की जाएं
रात के समय पुलिस और महसूल विभाग की सख्त, विशेष निगरानी बढ़ाई जाए
अब बड़ा सवाल
अब सवाल यही उठ रहा है —
क्या प्रशासन इस रेत माफिया पर लगाम लगाएगा?
या फिर वर्धा नदी का वढा घाट यूं ही रेत माफियाओं की लूट का अड्डा बना रहेगा?

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here