महामिनरल वाशरी से शुद्ध कोयले का महाघोटाला : कोयला सफाई के नामपर हाथ कि सफाई
काले हीरे को मिटृटी कि परत से लेपकर बडे मुनाफे से बेच जा रहा।
घुग्घुस : चंद्रपुर जिला और यवतमाल जिले के वणी तहसील के महामिनरल कोल वाशरी में पिछले कई वर्ष से कोयला तश्करी का काला खेल रचकर कोयला सफाई के आड़ मे हाथ सफाई का काला धंदा धड़ल्ले से चल रहा।कोयला तश्करी के नए तरीके ने वाशरी को दग़ा का अड्डा बना लिया है। धुलाई के आड़ में घटीया,धुल मिक्स कोयलें को असली कोयलें में मिलाकर देश में उर्जा सुरक्षा और पर्यावरण दोनो को खतरे में डाल दिया गया है।
चंद्रपुर जिले वेकोलि बल्लारपुर सास्ती कोयला खदान क्षेत्र,घुग्घुस उसगांव,वणी पिपलगांव में तीनों जगह पर महामिनरल वाशरी में कोयला धुलाई के नामपर मिलाया जा रहा है कम गुणवत्ता वाला खराब कोयला जिससे राष्ट्रीय उर्जा सुरक्षा खतरे में आ गई है।
बताया जा रहा है कि पिछले कई वर्ष से सास्ती,घुग्घुस ,वणी तीनों जगह महामिनरल कोल वाशरी से तडाली रेल्वे साइडिंग,वणी रेल्वे साइडिंग, बल्लारपुर सास्ती पांढरपौणी रेल्वे साइडिंग में सैकड़ों हजार टन चारफाईन,धुल मिक्स कोल को नागपुर कोराडी पावर प्लांट अदी जगह में भेजकर सरकार और जनता के साथ धोखाधड़ी कि जा रही है।
कोयले कि सबसे बडी तश्करी आम तौर पर देखा जा सकता है कि खदानों से कोयला निकालकर उसे ग़ैर क़ानूनी तरीके से अलग अलग ढंग से खुले बाजार में बेचा जा रहा है।इसका नतीजा सरकार के राजस्व को बहुत बडा नुकसान होता है। पर्यावरण को क्षति पहुचकर जनता को भी दिक्कत होती है।
कोयले कि तश्करी मे अक्सर देखा जा रहा है कि कोयला धुलाई के नामपर देश के साथ बहुत बडी धोखाधड़ी कि जा रही है।इसका मतलब है कि तश्कर कोयले को कम गुणवत्ता वाला दिखाकर उसे असली और अच्छे कोयले कि तरह पेश करते हैं।इस तरह से भारी मात्रा में कोयला अवैध रूप से बाजार में उतारा जाता है।कम गुणवत्ता वाला कोयले के इस्तेमाल करने से प्रदुषण का प्रमाण बढता है।
इस तश्करी से सरकार को अरबों का नुक़सान हो रहा। साथ ही जनता को महेगाई और प्रदुषण का मार झेलना पड़ रहा।
महामिनरल वाशरी में खदान से कोयला डीओ मिलने के पुर्व सैकडो टन चारफाईन,काला धुल का संग्रहण कोल वाशरी और रेल्वे साइडिंग में कर लिया जाता है।पुरे नियोजन होने के बाद चार पांच घंटे में ही रेलवे वैगन से कोयले में चारफाईन काला धुल मिलाकर नागपुर महाजैनको में बडे पैमाने पर भेजा जा रहा।
कोयले मे धुल और चारफाईन मिलाने से कई तरह के नुक़सान है।सबसे पहले कोयले का गुणवत्ता कम हो जाता है। जिससे उर्जा उत्पादन में कम प्रभावशीलता आती है।धुल और छोटे छोटे कन जलने पर प्रदुषण अधिक फैलता है।वायु म़डलिय गुणवत्ता पर असर पडता है, कोयले कि जलने कि क्षमता कम होती है, उर्जा उत्पादन महेगा और कम प्रभावी हो जाता है, आर्थिक नुकसान के साथ पर्यावरण में खराबी होती है,पावर प्लांट कि कम उत्पादन क्षमता प्रभावित होती है,बायलर और मशीनों में बुरा प्रभाव पड़ता है, इस तरह कि तश्करी से बडे बडे उद्योगो को करोड़ों अरब का नुक़सान पहुचता है।
बताया जा रहा है कि पिछले कुछ वर्ष से वाशरी में कोयला तश्करी के नए तरीके से सरकारी एजेंसियों को चिंता बढा दी है, धुलाई के नामपर कम गुणवत्ता वाले कोयले को अच्छे कोयले में मिलाकर महाजैनको तक पहुचाया जा रहा है,
कोयला तश्करी के काले जाल में कोयला तश्कर के साथ कुछ शासन प्रशासन के विभाग , प्रदुषण नियंत्रण विभाग,उपविभागीय अधिकारी, लोकप्रतिनिधि और पुलिस अधिकारी का गठजोड़ उजागर होने का मामला सामने आया है,
सुञो के मुताबिक कोल वाशरी में तश्कर न सिर्फ घटीया कोयले को धुलाई के नामपर मिला रहे हैं बल्कि कुछ भ्रष्ट शासन प्रशासन अधिकारी,गद्दार नेता और पुलिस वाले भी इस घिनौने प्रकीया मे सामिल है,इस गठजोड़ से तश्करी को रोकने में काफी मशक्कत करनी पड़ रही,
विशेषज्ञो और जनता कि मांग है कि महामिनरल में होनेवाली तश्करी को उजागर करे और दोषीयो पर कडी सजा दे ,अब वह समय आ गया है कि हम सब मिलकर इस काले धंदे को खत्म करें उर्जा क्षेत्र में पारदर्शिता लाए, पर्यावरण को बचाए।