4 लाख महीने का सेटअप, सुरक्षा तंत्र से लेकर पुलिस तक पर संगीन आरोप
धम्मा-चक्रवती सिंडिकेट बेखौफ, CCTV बंद कर रात में हजारों लीटर डीजल की तस्करी, वेकोलि को करोड़ों का नुकसान
बल्लारपुर (चंद्रपुर):
वेकोलि की बल्लारपुर स्थित गौरी-डिप कोयला खदान में इन दिनों डीजल तस्करी का ऐसा संगठित माफीयाराज चल रहा है, जिसने पूरे सुरक्षा सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। रोज महीनों से हर रात हजारों लीटर डीजल की अवैध ध़ुलाई हो रही है।जिससे वेकोलि कंपनी को करोड़ों रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार, अंधेरे के पूरे काले खेल के पीछे धम्मा और चक्रवती गैंग का बड़ा सिंडिकेट सक्रिय है। खदान मे यह लोग जैसे सोच ले वैसा होता है।जो टाटा सुमो और बोलेरो जैसे वाहनों के जरिए खदान से डीजल बाहर सप्लाई कर रहा है। खासकर रात 8:30 बजे और 11:30 बजे शिफ्ट चेंज के दौरान यह अवैध कारोबार चरम पर होता है।
खदान में मौजूद डंपर, पोकलेन, डोजर और अन्य भारी मशीनों से डीजल निकालकर खुलेआम तस्करी की जा रही है। यह पूरा खेल इतने संगठित तरीके से चल रहा है कि बिना अंदरूनी मिलीभगत के संभव नहीं माना जा रहा।
सुरक्षा तंत्र ही बना सिंडिकेट की रीढ़!
इस पूरे मामले में सबसे सनसनीखेज खुलासा यह है कि डीजल तस्करी के इस बड़े सिंडिकेट में सुरक्षा तंत्र की भूमिका सबसे अहम बताई जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक, सुरक्षा इंचार्ज मोहितकर और मिश्रा पर आरोप है कि वे तस्करों की मर्जी से सुरक्षा रक्षकों की तैनाती करते हैं और इसके बदले रोजाना हजारों रुपये लेते हैं।
एमएसएफ के जवान अजहर और कृष्णा पर भी गंभीर आरोप हैं कि साइडिंग क्षेत्र में पेट्रोलिंग के दौरान ‘नजरअंदाज’ करने के लिए उन्हें हर महीने करीब 40 हजार रुपये दिए जाते हैं।
CCTV ‘तीसरी आंख’ बंद, अंदरूनी खेल जारी
तस्करी को अंजाम देने के लिए CCTV सिस्टम तक को कमजोर किया जा रहा है।
सूत्र बताते हैं कि भारत, वैभव, कुणाल, शेखर, आकाश और कंप्यूटर ऑपरेटर की मिलीभगत से CCTV (तीसरी आंख) को बंद या नजरअंदाज कर डीजल तस्करी को अंजाम दिया जा रहा है।
4 लाख महीने का ‘भत्ता’—पूरा सिस्टम सेट!
मामले में यह भी सामने आया है कि इस पूरे सिंडिकेट को चलाने के लिए हर महीने करीब 4 लाख रुपये का ‘भत्ता’ बांटा जा रहा है।
स्थानीय राजुरा पुलिस को डेढ़ महीने का अलग सेटअप
चंद्रपुर अपराध शाखा को करीब 90 हजार रुपये
पेट्रोलिंग में लगे सुरक्षा रक्षकों को 40 हजार रुपये महीना
इसके अलावा रोजाना हजार-हजार रुपये ‘डेली सेटिंग’ के नाम पर
यानी पूरा सिस्टम पैसे के दम पर ‘मैनेज’ किया जा रहा है।
‘
रक्षक ही भक्षक’—लूट का खुला खेल
गौरी-डिप खदान में हालात ऐसे बन गए हैं कि सुरक्षा करने वाले ही लूट में शामिल नजर आ रहे हैं।
डीजल के अलावा लोहा, ऑयल, तांबा, कोयला, बैटरी और पीतल जैसे कीमती सामान की भी बड़े पैमाने पर चोरी हो रही है।
थबताया जा रहा है कि कई सुरक्षा रक्षक वर्षों से एक ही जगह तैनात हैं, जिससे तस्करों के साथ उनके गहरे संबंध बन चुके हैं और यही नेटवर्क इस काले कारोबार को मजबूती दे रहा है।
पेट्रोलिंग केवल दिखावा, तस्कर बेखौफ
रात के समय पेट्रोलिंग सिर्फ नाम के लिए हो रही है। न तो वाहन सही तरीके से गश्त करते हैं और न ही पर्याप्त सुरक्षा बल मौजूद है। इसका फायदा उठाकर तस्कर हर रात बेखौफ होकर तस्करी को अंजाम दे रहे हैं।
स्थानीयों में आक्रोश, कार्रवाई की मांग तेज
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने वेकोलि प्रशासन और चंद्रपुर के पुलिस अधीक्षक मुमक्का सुदर्शन से मांग की है कि:
डीजल तस्करी में शामिल सभी सुरक्षा रक्षकों और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई हो
पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए
वर्षों से एक ही स्थान पर जमे सुरक्षा कर्मियों का तत्काल तबादला किया जाए
खदान क्षेत्र में सख्त और पारदर्शी सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाए
अब बड़ा सवाल—
क्या प्रशासन इस ‘डीजल माफिया’ के जाल को तोड़ पाएगा, या फिर करोड़ों की लूट और मिलीभगत का यह खेल यूं ही चलता रहेगा?