चंद्रपुर /घुग्घुस :
चंद्रपुर जिले के कोरपना नगर पंचायत और औद्योगिक शहर घुग्घूस नगर परिषद में प्रशासनिक लापरवाही और विकास कार्यों में ठप स्थिति को लेकर एक ही मुख्याधिकारी के खिलाफ जबरदस्त विरोध खड़ा हो गया है। दोनों ही जगहों पर जनप्रतिनिधियों ने प्रभारी मुख्याधिकारी निलेश रांजनकर के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उनकी तत्काल हकालपट्टी की मांग की है।
कोरपना नगर पंचायत की नगराध्यक्ष नंदाताई विजयराव बावणे ने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनके मुताबिक 5 मार्च 2026 को नियुक्ति आदेश जारी होने के बावजूद रांजनकर ने 13 मार्च को कार्यभार संभाला और उसके बाद से ही नगर पंचायत के विकास कार्य पूरी तरह ठप हो गए।
आरोप है कि सामान्य सभा के ठराव की सत्य प्रतियां आज तक उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। वहीं, बढ़ते पोल लगाने, स्मशानभूमि में सामाजिक वनीकरण के तहत वृक्षारोपण, नागरिकों के व्यक्तिगत काम और MSEB से जुड़े पत्रों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। घनकचरा प्रबंधन से जुड़े बिल की फाइल करीब एक महीने से लंबित है, लेकिन उस पर हस्ताक्षर तक नहीं किए गए। इतना ही नहीं, मुख्याधिकारी द्वारा “मैं फ्री में साइन करने नहीं आया हूं” जैसे कथित बयान से प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर और सवाल खड़े हो गए हैं।
गर्मी के मौसम में पानी संकट से निपटने के प्रस्ताव भी तैयार नहीं हो पा रहे हैं, जिससे नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि पूरी नगर पंचायत का कामकाज महज 3 कर्मचारियों और पुराने ग्राम पंचायत स्टाफ के भरोसे चल रहा है।
दूसरी ओर, घुग्घूस नगर परिषद में भी मुख्याधिकारी के खिलाफ आक्रोश चरम पर है। यहां आरोप है कि करीब एक करोड़ रुपये के विकास निधि का उपयोग नहीं किया गया और जानबूझकर विकास कार्यों को रोका गया। साथ ही नगराध्यक्ष, उपाध्यक्ष और समितियों को विश्वास में लिए बिना गुप्त रूप से अधिकार क्षेत्र से बाहर के काम कर भ्रष्टाचार किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं।
घुग्घूस में नगराध्यक्ष दीप्ति सोनटक्के, बांधकाम सभापति रोशन पचारे और स्वच्छता व स्वास्थ्य सभापति नूरूल सिद्दीकी के नेतृत्व में शिष्टमंडल ने जिला कलेक्टर से मुलाकात कर शिकायत दर्ज कराई। इस दौरान “मुख्याधिकारी हटाओ, घुग्घूस बचाओ” के नारे लगाकर प्रशासन के खिलाफ रोष व्यक्त किया गया।
वहीं कोरपना में भी नगराध्यक्ष नंदाताई बावणे और अन्य सदस्यों ने ज्ञापन सौंपकर मुख्याधिकारी को हटाकर नए अधिकारी की नियुक्ति की मांग की है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जब जनता के टैक्स के पैसों से लाखों रुपये वेतन लेने वाला अधिकारी विकास कार्य ही नहीं करेगा, तो उस पर तत्काल सख्त कार्रवाई जरूरी है।
जिल्हाधिकारी को दिए गए ज्ञापन के दौरान अर्चना प्रशांत सारोकर, पल्लवी दिनेश घुले, तौफिक शेख, रोशन दंतलवार और अजहर शेख भी मौजूद रहे।
अब पूरा मामला जिला प्रशासन के पाले में है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन इन गंभीर आरोपों पर कार्रवाई करेगा या फिर कोरपना और घुग्घूस के नागरिकों को इसी तरह समस्याओं से जूझना पड़ेगा।