तलाठी, मंडल अधिकारी समेत चार पर मामला दर्ज; एफआईआर तक पुलिस थाने में डटे रहे पत्रकार
फर्जी फेरफार, नकली सातबारा और प्लॉट बिक्री के नाम पर लाखों की ठगी का आरोप
पत्रकारों के ठिय्या आंदोलन के बाद आखिरकार पुलिस ने दर्ज किया मामला
यवतमाल / वणी
वणी तालुका के वडगांव (धं) में फर्जी जमीन दस्तावेजों के जरिए प्लॉट बिक्री कर नागरिकों से ठगी करने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस प्रकरण में राजस्व विभाग के कर्मचारियों की कथित मिलीभगत उजागर होने के बाद वणी पुलिस ने तलाठी, मंडल अधिकारी, दलाल और कथित जमीन मालिक सहित चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
इस पूरे मामले ने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं और फर्जी फेरफार के जरिए चल रहे संभावित जमीन घोटाले की परतें खुलने लगी हैं।
फर्जी कागजात दिखाकर बेचा गया प्लॉट
प्राप्त जानकारी के अनुसार, शिकायतकर्ता सूरज रमेश चाटे ने अपनी शिकायत में बताया कि आरोपी सतीश केराम ने मौजा वडगांव (धं) स्थित प्लॉट बिक्री के लिए उपलब्ध होने की जानकारी दी थी। इसके बाद उनकी और संजय तरवटकर की मुलाकात शैलेश वाकडे से कराई गई।
आरोप है कि प्लॉट शैलेश वाकडे के नाम पर होने का दावा करते हुए सातबारा, फेरफार और नक्शे जैसे दस्तावेज दिखाए गए। शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि तलाठी रविंद्र उपरे और मंडल अधिकारी राजू डोंगरे ने भी दस्तावेजों को सही बताया।
1.20 लाख रुपए लेने के बाद खुला फर्जीवाड़ा
19 जुलाई 2024 को वणी उपनिबंधक कार्यालय में प्लॉट की रजिस्ट्री कर शिकायतकर्ताओं से 1 लाख 20 हजार रुपये की रकम चेक के माध्यम से ली गई। लेकिन बाद में जब प्लॉट की माप की गई, तब पता चला कि संबंधित जमीन वास्तव में दीपक भट्टाचार्य के नाम पर दर्ज है।
जब शिकायतकर्ताओं ने आरोपियों से पूछताछ की तो उन्हें टालमटोल जवाब दिए गए।
फर्जी फेरफार का खुलासा, प्रशासन ने रद्द किए रिकॉर्ड
जांच के दौरान सामने आया कि फेरफार क्रमांक 1539 पूरी तरह फर्जी था और जिस 2015 के जमीन व्यवहार का हवाला दिया गया था, वह वास्तव में हुआ ही नहीं था।
सूत्रों के अनुसार, मामला उजागर होने की आशंका के बाद संबंधित तलाठी ने खुद ही फेरफार रद्द करने का प्रस्ताव दाखिल किया। बाद में उपविभागीय अधिकारी और जिलाधिकारी स्तर पर सुनवाई के बाद संबंधित फेरफार और रिकॉर्ड रद्द करने के आदेश जारी किए गए।
एफआईआर के लिए पत्रकारों का आंदोलन
इस मामले में शुरुआत में पुलिस द्वारा अपराध दर्ज नहीं किए जाने से नाराज वणी शहर के पत्रकारों ने 15 मई की रात पुलिस थाने में ही चटाई बिछाकर ठिय्या आंदोलन शुरू कर दिया।
पत्रकारों ने स्पष्ट कहा कि जब तक मामला दर्ज नहीं होगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। आखिरकार पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज किए जाने के बाद ही आंदोलन समाप्त किया गया।
पूर्व विधायक और विधायक पहुंचे पुलिस थाने
घटना की गंभीरता को देखते हुए पूर्व विधायक संजीवरेड्डी बोदकुरवार तथा विधायक संजय देरकर भी वणी पुलिस स्टेशन पहुंचे और पत्रकारों से चर्चा कर पूरे मामले की जानकारी ली।
अब इस मामले के सामने आने के बाद राजस्व विभाग में फर्जी फेरफार और जमीन घोटालों से जुड़े अन्य मामलों की भी जांच की मांग जोर पकड़ने लगी है।