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ओबीसी जनगणना पर फेडरेशन का सख्त रुख

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ओबीसी जनगणना पर फेडरेशन का सख्त रुख



अलग कॉलम का राजपत्र जारी होने तक असहयोग आंदोलन रहेगा जारी, 28 जून के महामोर्चे में शामिल होने का आह्वान


चंद्रपुर, प्रतिनिधि: राष्ट्रीय ओबीसी फेडरेशन ने स्पष्ट कर दिया है कि केंद्र सरकार द्वारा जनगणना में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लिए अलग कॉलम संबंधी राजपत्र जारी किए जाने तक असहयोग आंदोलन जारी रहेगा। संगठन ने कहा कि ओबीसी समाज की वास्तविक जनसंख्या और अधिकारों की रक्षा के लिए यह संघर्ष किसी भी कीमत पर नहीं रोका जाएगा।

इसी मुद्दे को लेकर सोमवार को जिला कलेक्टर कार्यालय में जिलाधिकारी वसुमता पंत की अध्यक्षता में प्रशासन और राष्ट्रीय ओबीसी फेडरेशन के पदाधिकारियों के बीच महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में अतिरिक्त जिलाधिकारी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी एवं ओबीसी संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान प्रशासन ने जिले में चल रही जनगणना प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए संगठनों से सहयोग की अपील की। अधिकारियों ने कहा कि आगामी चरण में ओबीसी समुदाय की भी गणना किए जाने की संभावना है तथा इस संबंध में उचित प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

हालांकि राष्ट्रीय ओबीसी फेडरेशन के प्रतिनिधियों ने प्रशासन के आश्वासन को अपर्याप्त बताते हुए स्पष्ट कहा कि जब तक केंद्र सरकार ओबीसी के लिए अलग कॉलम का आधिकारिक राजपत्र जारी नहीं करती, तब तक संगठन जनगणना प्रक्रिया में सहयोग नहीं करेगा।

फेडरेशन के महासचिव सचिन राजुरकर ने कहा कि ओबीसी जनगणना केवल आंकड़ों का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, राजनीतिक प्रतिनिधित्व, शिक्षा, रोजगार और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। उन्होंने कहा कि अलग गणना के अभाव में ओबीसी समाज की वास्तविक आबादी सामने नहीं आ सकेगी, जिससे नीति निर्माण और आरक्षण व्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

बैठक में संगठन के पदाधिकारियों ने यह भी याद दिलाया कि वर्ष 2018 में तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने ओबीसी के लिए अलग पंजीकरण का आश्वासन दिया था। वहीं बाद में संसद में दिए गए कुछ बयानों से समाज में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हुई, जिसे सरकार को तत्काल दूर करना चाहिए।

राष्ट्रीय ओबीसी फेडरेशन ने समाज के सभी वर्गों से 28 जून को आयोजित होने वाले विशाल महामोर्चे में बड़ी संख्या में शामिल होने की अपील की है। संगठन का कहना है कि यह आंदोलन ओबीसी समाज की पहचान, अधिकार और भविष्य से जुड़ा जनआंदोलन है, जिसे व्यापक जनसमर्थन की आवश्यकता है।

बैठक में जिला अध्यक्ष रामदास कामडी, एडवोकेट दत्ता हजारे, प्रो. अनिल शिंदे, प्रो. माधव गुरुनुले, श्रीहरि सतपुते, कविंद्र रोहनकर, पवन राजुरकर, अक्षय येरगुडे, मोरेश्वर सुरकर, रतन शिलावार, शंकर पाल, महिला फेडरेशन की नगर अध्यक्ष मानस्वी गिरहे, जिला महासचिव मनीषा बोबड़े, पार्षद प्रतीक्षा येरगुडे सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित थे।

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