घुग्घुस में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया वट पूर्णिमा पर्व
सुभाष नगर हनुमान मंदिर परिसर में सैकड़ों महिलाओं ने बरगद वृक्ष की पूजा कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की
चंद्रपुर : जिला के घुग्घुस शहर में सोमवार को वट पूर्णिमा (वट सावित्री) पर्व श्रद्धा, आस्था और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। सुभाष नगर स्थित हनुमान मंदिर परिसर में सुबह से ही विवाहित महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ी। महिलाओं ने विधि-विधान से बरगद (वट) के वृक्ष की पूजा-अर्चना की तथा सात से ग्यारह बार कच्चा धागा लपेटते हुए वृक्ष की परिक्रमा कर अपने पति की दीर्घायु, परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाल जीवन की कामना की।
पूजन के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में भगवान का पूजन किया, वट वृक्ष को जल अर्पित किया तथा सावित्री-सत्यवान की कथा का श्रवण किया। मंदिर परिसर में धार्मिक और भक्तिमय वातावरण बना रहा।
वट पूर्णिमा का विशेष महत्व
हिंदू धर्म में वट पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह पर्व सावित्री और सत्यवान की अमर कथा से जुड़ा हुआ है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, सावित्री ने अपने अटूट पतिव्रत, दृढ़ संकल्प और तपस्या के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से यह पर्व अखंड सौभाग्य, पति की लंबी आयु और परिवार की खुशहाली के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है।
बरगद (वट) का वृक्ष दीर्घायु, स्थिरता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। इसलिए महिलाएं वट वृक्ष की पूजा कर उसके चारों ओर धागा लपेटते हुए परिक्रमा करती हैं और परिवार के सुख, शांति तथा समृद्धि की मंगलकामना करती हैं।
महाराष्ट्र में यह पर्व हर वर्ष बड़े उत्साह, श्रद्धा और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया जाता है। घुग्घुस में भी महिलाओं ने पूरे उत्साह के साथ इस पर्व को मनाकर अपनी धार्मिक आस्था का परिचय दिया।