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आदिवासी दिवस सिर्फ एक दिन का उत्सव नहीं, 365 दिन समाज की प्रगति के लिए काम करने का संकल्प : आ. सुधीर मुनगंटीवार

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आदिवासी दिवस सिर्फ एक दिन का उत्सव नहीं, 365 दिन समाज की प्रगति के लिए काम करने का संकल्प : आ. सुधीर मुनगंटीवार



विश्व आदिवासी दिवस पर पोंभुर्णा में वनाधिकार पट्टों का वितरण; मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान


पोंभुर्णा। विश्व आदिवासी दिवस केवल एक दिन मनाया जाने वाला उत्सव नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के अधिकारों, विकास और समस्याओं पर पूरे वर्ष चिंतन, संवाद और ठोस कार्रवाई करने की प्रेरणा देने वाला संकल्प दिवस होना चाहिए। आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा और उनकी समस्याओं का समाधान करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है, यह प्रतिपादन विधायक सुधीर मुनगंटीवार ने किया।

विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर पोंभुर्णा में आयोजित कार्यक्रम में वे संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर पात्र आदिवासी लाभार्थियों को वनाधिकार कानून के तहत वनाधिकार पट्टे वितरित किए गए। साथ ही मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान भी किया गया।

समाज की आवाज सुनकर मुंबई के कार्यक्रम रद्द किए

आ. मुनगंटीवार ने बताया कि गोंडवाना आंदोलन एवं आदिवासी आंदोलन के शाखा प्रमुख जगन येलके महाराज और उनके साथियों ने कार्यक्रम में शामिल होने का निमंत्रण दिया था। मुंबई में पहले से निर्धारित कार्यक्रम होने के बावजूद आदिवासी समाज की समस्याओं और उनकी भावनाओं को देखते हुए उन्होंने मुंबई के कार्यक्रम रद्द कर पोंभुर्णा आने का निर्णय लिया।

उन्होंने कहा कि समाज की समस्याएं हल होनी चाहिए और आदिवासी नागरिकों को न्याय मिलना चाहिए, यही उनकी भावना है। समाज के मुद्दों के लिए लगातार संघर्ष और अधिकारियों के पास प्रभावी तरीके से पाठपुरावा करने के लिए जगन येलके महाराज एवं उनके सहयोगियों की उन्होंने सराहना की।

आदिवासी समाज प्रकृति का सच्चा संरक्षक

आ. मुनगंटीवार ने कहा कि आदिवासी समाज मेहनती, ईमानदार और प्रकृति से गहराई से जुड़ा हुआ है। चंद्रपुर, गड़चिरोली, यवतमाल और नंदुरबार जैसे जिलों में आज भी बड़े पैमाने पर जंगल सुरक्षित हैं, इसके पीछे आदिवासी समाज की महत्वपूर्ण भूमिका है।

उन्होंने कहा कि मानव की जरूरतें लगातार बढ़ती जा रही हैं, लेकिन संयम और संतोष के साथ प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग करना ही वास्तविक समृद्धि है। प्रकृति के संरक्षण के साथ जीवन जीने वाला समाज ही वास्तव में मानवता की रक्षा करता है।

‘क्रांति दिवस’ से भी जोड़ा आदिवासी दिवस

आ. मुनगंटीवार ने कहा कि 9 अगस्त का दिन ऐतिहासिक रूप से भी महत्वपूर्ण है। वर्ष 1942 में मुंबई के ग्वालिया टैंक मैदान से ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन का निर्णायक संदेश दिया गया था। इसी तरह विश्व आदिवासी दिवस को भी केवल एक दिन की औपचारिकता तक सीमित न रखते हुए शेष 364 दिनों में समाज की उन्नति के लिए काम करने की प्रेरणा लेनी चाहिए।

सर्वोच्च संवैधानिक पद से बढ़ा आदिवासी समाज का आत्मविश्वास

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का उल्लेख करते हुए आ. मुनगंटीवार ने कहा कि आदिवासी समाज की महिला देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर पहुंची है। इससे देशभर के आदिवासी समाज में नया आत्मविश्वास पैदा हुआ है। मेहनत, दृढ़ इच्छाशक्ति और ईमानदार प्रयासों के बल पर आदिवासी समाज का कोई भी युवा ऊंचे से ऊंचा मुकाम हासिल कर सकता है, यह विश्वास नई पीढ़ी में पैदा करना जरूरी है।

आदिवासी विकास के लिए विभिन्न योजनाओं का उल्लेख

आ. मुनगंटीवार ने आदिवासी समाज के लिए किए गए विभिन्न कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि गड़चिरोली में गोंडवाना विश्वविद्यालय, ‘मिशन शौर्य’ के माध्यम से चंद्रपुर के आदिवासी युवाओं को एवरेस्ट अभियान का अवसर, तेंदूपत्ता बोनस, पोंभुर्णा एवं चंद्रपुर में आदिवासी छात्रावास, सावली के आदिवासी छात्रावास को मंजूरी, चंद्रपुर में क्रांतिवीर बाबुराव शेडमाके के नाम पर आधुनिक स्टेडियम, उनके सम्मान में डाक टिकट, शहरी शबरी आवास योजना, खावटी कर्जमाफी तथा 12,500 पदों की भर्ती जैसे कार्यों के माध्यम से समाज के विकास के प्रयास किए गए हैं।

पात्र लाभार्थियों को वनाधिकार पट्टे

कार्यक्रम के दौरान आ. सुधीर मुनगंटीवार के हाथों वनाधिकार कानून के तहत पात्र लाभार्थियों को वनाधिकार पट्टे वितरित किए गए। इनमें दिवाकर आत्राम, सुरेश कोवे, प्रभाकर कोवे, एकनाथ कोवे, आनंदराव कोवे, नागेंद्र कोवे, पत्रु घोडाम, सोमनाथ पेंदोर, संतोष मडावी, सदाशिव मडावी, विनायक आत्राम, साईनाथ वेलादी, श्रीकांत तलांडे, भालचंद्र कन्नाके और धर्मेंद्र मेश्राम सहित अन्य लाभार्थी शामिल रहे।

मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान

कार्यक्रम में सोनल सोयाम, साहिल शेडमाके, आम्रपाली तोरे, आदित्य शेडमाके और रुपेश मडावी इन मेधावी विद्यार्थियों का विधायक सुधीर मुनगंटीवार के हाथों सम्मान किया गया।

कार्यक्रम में भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. अशोक जीवतोडे, तहसीलदार मोहनीश शेलवटकर, नगराध्यक्षा सुलभाताई पिपरे, उपनगराध्यक्ष अजित मंगळगिरीवार, भाजपा तालुका अध्यक्ष हरीश ढवस, जगन येलके सहित बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के नागरिक, पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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