वेकोलि वणी नॉर्थ में कोयला हेराफेरी का गंभीर आरोप! उकणी खदान से गुड्स शेड साइडिंग तक कथित खेल
MSPC नागपुर प्लांट के लिए दूसरी रैक रवाना होने की तैयारी
क्रश कोयले की जगह बड़े कोयले की आपूर्ति कर गुणवत्ता से समझौता करने का आरोप; वेकोलि को करोड़ों के नुकसान की आशंका, CID, CBI, ED और विजिलेंस जांच की मांग
वणी | विशेष प्रतिनिधि
वणी: वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (वेकोलि) की वणी नॉर्थ क्षेत्र स्थित उकणी कोयला खदान से लेकर वणी के आदिनाथ कोल डिपो और गुड्स शेड रेलवे साइडिंग तक कथित कोयला हेराफेरी का गंभीर मामला सामने आया है। आरोप है कि क्रश कोयले की आपूर्ति के नाम पर बड़े आकार का कोयला खदान से उठाकर निजी डिपो में लाया जा रहा है। वहां उसमें कथित तौर पर चारफाइन और काली धूल मिलाकर रेलवे रैक के माध्यम से नागपुर के MSPC मोहदा पावर प्लांट तक भेजने की तैयारी की जा रही है। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह मामला वेकोलि की निगरानी व्यवस्था और कोयला आपूर्ति की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर सकता है।
40 हजार टन से अधिक कोयले की आपूर्ति, लेकिन गुणवत्ता पर सवाल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, MSPC मोहदा पावर प्लांट, नागपुर के लिए वणी नॉर्थ की उकणी खदान से 40 हजार टन से अधिक क्रश कोयले की आपूर्ति की जानी है। बताया जा रहा है कि नागपुर के एक अग्रवाल और उनके सहयोगियों ने डीओ होल्डर के माध्यम से इस आपूर्ति का ठेका लिया है।
आरोप है कि इस आपूर्ति में निर्धारित गुणवत्ता वाले क्रश कोयले के बजाय बड़े आकार के कोयले का इस्तेमाल किया जा रहा है। पिछले लगभग 15 दिनों से चल रही इस गतिविधि को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चाएं तेज हैं। हालांकि, कोयले की वास्तविक गुणवत्ता, मात्रा और आपूर्ति प्रक्रिया में किसी अनियमितता की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
उकणी खदान से आदिनाथ डिपो तक कथित हेराफेरी
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि पावर प्लांट के लिए निर्धारित कोयला क्रश स्वरूप में भेजा जाना है, तो बड़े आकार का कोयला कथित तौर पर खदान से बाहर कैसे निकल रहा है? क्या खदान से कोयला उठाने, परिवहन करने और निजी डिपो में उसकी छंटाई या मिश्रण की प्रक्रिया पर जिम्मेदार अधिकारियों की नजर है?
आरोपों के मुताबिक, उकणी खदान से रात के समय बड़े आकार का कोयला उठाकर वणी के आदिनाथ कोल डिपो में लाया जाता है। वहां उसमें चारफाइन और काली धूल मिलाने के बाद उसे गुड्स शेड रेलवे साइडिंग तक पहुंचाया जाता है। इसके बाद रेलवे बोगियों के माध्यम से MSPC मोहदा पावर प्लांट, नागपुर भेजे जाने की बात कही जा रही है।
यदि इस पूरी प्रक्रिया में निर्धारित गुणवत्ता से समझौता हुआ है, तो इसकी निष्पक्ष जांच कर कोयले के स्रोत, वजन, गुणवत्ता और परिवहन रिकॉर्ड का मिलान करना जरूरी है।
दूसरी रेलवे रैक पर निगाहें, निगरानी व्यवस्था पर सवाल
अब गुड्स शेड रेलवे साइडिंग से MSPC मोहदा पावर प्लांट के लिए दूसरी मिक्स कोल रैक रवाना होने की चर्चा है। ऐसे में सवाल उठता है कि रेलवे रैक में भरे जा रहे कोयले की गुणवत्ता की जांच कौन कर रहा है? खदान से निकले कोयले और पावर प्लांट के लिए भेजे जा रहे कोयले के नमूनों का मिलान किया जा रहा है या नहीं?
यदि कोयले की गुणवत्ता, ग्रेड अथवा मात्रा में अंतर पाया जाता है, तो संबंधित डीओ, परिवहन दस्तावेज, वे-ब्रिज रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और गुणवत्ता जांच रिपोर्ट की पड़ताल से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
वेकोलि को करोड़ों का नुकसान होने की आशंका
कोयले की कथित हेराफेरी से वेकोलि को आर्थिक नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। यदि उच्च गुणवत्ता वाले कोयले के स्थान पर कम गुणवत्ता वाला या निर्धारित मानकों से अलग कोयला भेजा गया, तो संबंधित पक्षों को अनुचित आर्थिक लाभ मिलने और कंपनी को नुकसान पहुंचने की संभावना की जांच आवश्यक है।
इसके अलावा, पावर प्लांट में पहुंचने वाले कोयले की गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं होने पर बॉयलर के संचालन, दक्षता और उपकरणों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है, इसका आकलन भी तकनीकी विशेषज्ञों से कराया जाना चाहिए। संभावित नुकसान का वास्तविक आंकड़ा जांच और दस्तावेजों की पुष्टि के बाद ही सामने आ सकेगा।
अधिकारियों की भूमिका की भी हो निष्पक्ष जांच
इस प्रकरण में स्थानीय स्तर पर क्षेत्रीय प्रबंधक, उपक्षेत्रीय प्रबंधक और खदान प्रबंधक की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। हालांकि, किसी अधिकारी की मिलीभगत या संरक्षण का आरोप जांच के बिना सिद्ध नहीं माना जा सकता। इसलिए यह जरूरी है कि खदान से कोयला निकलने से लेकर निजी डिपो और रेलवे साइडिंग तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच हो।
जांच में यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि कोयले के उठाव, परिवहन, भंडारण, मिश्रण और रेलवे रैक में लोडिंग के दौरान निर्धारित नियमों का पालन किया गया या नहीं।
CID, CBI, ED और विजिलेंस जांच की मांग
स्थानीय नागरिकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और वेकोलि कर्मचारियों की ओर से कथित कोयला हेराफेरी पर रोक लगाने तथा संबंधित खदान और आदिनाथ कोल डिपो की जांच कराने की मांग की जा रही है। मांग है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए सक्षम जांच एजेंसियां उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई करें।
नागरिकों का कहना है कि खदान से निकलने वाले कोयले की गुणवत्ता, मात्रा, परिवहन और बिक्री का रिकॉर्ड सार्वजनिक हित में जांचा जाना चाहिए। यदि किसी प्रकार की अनियमितता या आर्थिक अपराध सामने आता है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—उकणी खदान से निकलने वाले कोयले की वास्तविक गुणवत्ता और गुड्स शेड रेलवे साइडिंग से रवाना होने वाली रैक में भरे कोयले की गुणवत्ता का मिलान कौन करेगा? दूसरी रैक रवाना होने से पहले संबंधित विभागों द्वारा निष्पक्ष जांच की जाती है या नहीं, इस पर स्थानीय लोगों की नजरें टिकी हुई हैं।