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वढा में बढ़ा रेत तस्करी का कहर

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वढा में बढ़ा रेत तस्करी का कहर



रेत तस्कर न खुद सोते हैं, न गांव को सोने देते हैं


घुग्घुस प्रतिनिधि :
घुग्घुस पुलिस थाना क्षेत्र अंतर्गत तीर्थक्षेत्र पांढरकवड़ा–वढा वर्धा नदी घाट में अवैध रेत तस्करी अब खुला आतंक बन चुकी है। रात के अंधेरे में रेत तस्करों का ऐसा कहर बरप रहा है कि गांव के गरीब किसान रातभर जागने को मजबूर हैं।

स्थानीय नागरिकों के अनुसार, गांव में रहने वाले रेत तस्कर रात में शराब के नशे में धुत होकर बीच चौराहों पर हुल्लड़बाज़ी, शोर-शराबा, गाली-गलौच और भीड़ जमाकर खुलेआम रेत तस्करी की “मशक्कत” करते नजर आते हैं। हालात इतने बदतर हैं कि गांव में डर और दहशत का माहौल बन गया है।

फसलों पर ट्रैक्टर, किसानों पर जुल्म

रेत तस्करी का यह कारोबार अब केवल चोरी तक सीमित नहीं रहा। तस्कर दादागिरी और धमकी के दम पर किसानों की खड़ी फसलों पर ट्रैक्टर दौड़ा रहे हैं, जिससे महीनों की मेहनत मिनटों में बर्बाद हो रही है। विरोध करने पर नशे में धुत तस्कर किसानों से मारपीट पर उतारू हो जाते हैं।

दिन-रात तस्करी, प्रशासन मौन

रेत तस्करों की मुजोरी इस कदर बढ़ चुकी है कि दिन-रात वर्धा नदी घाट से रेत की चोरी की जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस और महसूल विभाग के कुछ जिम्मेदार अधिकारियों की सांठगांठ से यह अवैध कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है।
चौबीस घंटे जारी इस तस्करी में सैकड़ों ब्रास रेत गायब हो चुकी है, जिससे महाराष्ट्र शासन को लाखों रुपये के महसूल का नुकसान हो रहा है।
बताया जा रहा है कि कुछ रेत तस्करों को महसूल विभाग, स्थानीय पुलिस और चंद्रपुर के लोकप्रतिनिधियों का संरक्षण प्राप्त है, जिसके चलते कार्रवाई सिर्फ कागज़ों तक सीमित रह गई है।
अधिकारियों को भी धमकाने लगे तस्कर
तस्करों के हौसले इतने बुलंद हैं कि अब वे प्रशासनिक अधिकारियों को भी गाली-गलौच और धमकी देने से नहीं डर रहे। कानून व्यवस्था को खुली चुनौती दी जा रही है, लेकिन जिम्मेदार महकमे आंख मूंदे बैठे हैं।

कड़ी कार्रवाई की मांग

इस पूरे मामले को लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश है। लोगों ने जिला प्रशासन से वढा वर्धा नदी घाट में रेत तस्करी पर तत्काल रोक, तस्करी में शामिल लोगों पर सख्त कार्रवाई, और अवैध रेत ढोने वाले ट्रैक्टरों को जब्त करने की जोरदार मांग की है।

अब बड़ा सवाल यह है कि
क्या प्रशासन नींद से जागेगा?
या फिर वढा की वर्धा नदी यूँ ही रेत माफियाओं की लूट का मैदान बनी रहेगी?

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