मृतक को 10 लाख, गंभीर घायलों को 1-1 लाख मुआवज़ा मंजूर
घुग्घुस | विशेष प्रतिनिधि
घुग्घुस शहर से सटे धानोरा फाटा पर हुए भीषण सड़क हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया।
तेज़ रफ्तार में वाहन को टक्कर मारकर फरार हो रहे ARS कंपनी के टैंकर चालक ने धानोरा फाटा पर एक कार को जोरदार टक्कर मारी, जिसके बाद टैंकर अनियंत्रित होकर सड़क किनारे स्थित एक सलून दुकान और उससे सटे होटल में जा घुसा।
इस दर्दनाक हादसे में
सलून चालक शंकर जुनारकर (निवासी अमराई, उम्र 34 वर्ष) की मौके पर ही मौत हो गई,
जबकि होटल में मौजूद युवक कर्मचारी और कार में सवार यात्री गंभीर रूप से घायल हो गए।
20 घंटे बाद भी मुआवज़े पर टालमटोल
हादसे के 20 घंटे बीत जाने के बावजूद
ARS टैंकर कंपनी और उसके अधिकारियों ने
मृतक व घायलों को मुआवज़ा देने को लेकर कोई ठोस पहल नहीं की।
पुलिस स्टेशन में हुई चर्चाएं भी बिना नतीजे के खत्म होने पर लोगों का गुस्सा भड़क उठा।
सर्वदलीय नेताओं का रास्ता रोको आंदोलन
इसके बाद कांग्रेस, भाजपा और शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) सहित
सभी राजनीतिक दलों के नेताओं, नगरसेवकों, सामाजिक संगठनों और नगरपरिषद कर्मचारियों ने
धानोरा फाटा पर चार घंटे तक रास्ता रोको आंदोलन किया।
आंदोलन में प्रमुख रूप से शामिल थे—
कांग्रेस अध्यक्ष राजू रेड्डी
तालुका अध्यक्ष अनिल नारूले
रोशन पचारे
सैय्यद अनवर
नगरसेवक नुरूल सिद्दीकी
गजानन मासिरकर
पांढरकवड़ा के कांग्रेस नेता हितेश लोढे
भाजपा अध्यक्ष संजय तिवारी
राजेश मोरपाका
शिवसेना (उबाठा) युवा नेता चेतन बोबडे, अमित बोरकर
नगरपरिषद के कर्मचारी
रास्ता रोको के चलते
पडोली से गडचांदूर तक दोनों दिशाओं में वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।
भारी पुलिस बंदोबस्त
स्थिति को नियंत्रण में रखने और किसी भी अप्रिय घटना से बचाव के लिए
पुलिस निरीक्षक प्रकाश राऊत के नेतृत्व में
दंगा नियंत्रण पथक और भारी पुलिस बल आंदोलन स्थल पर तैनात किया गया।
मौके पर बनी सहमति, आंदोलन समाप्त
आंदोलन स्थल पर ही कंपनी अधिकारियों के साथ हुई चर्चा के बाद
मृतक शंकर जुनारकर के परिजनों को 10 लाख रुपये,
और गंभीर रूप से घायल युवकों को 1-1 लाख रुपये मुआवज़ा देने पर सहमति बनी।
मुआवज़े की घोषणा होते ही
चार घंटे से चल रहा आंदोलन समाप्त किया गया।
भारी संख्या में नागरिक उपस्थित
इस अवसर पर
घुग्घुस शहर के सभी राजनीतिक दलों के नेता,
सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी,
नगरपरिषद कर्मचारी और
आसपास के ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
सवाल अब भी कायम
हालांकि मुआवज़ा घोषित कर दिया गया है,
लेकिन सबसे बड़ा सवाल अब भी बना हुआ है—
ओवरस्पीड और लापरवाही पर कब लगेगी लगाम?
धानोरा फाटा जैसे संवेदनशील स्थानों पर स्थायी सुरक्षा व्यवस्था कब होगी?
घुग्घुस की जनता अब केवल आश्वासन नहीं,
स्थायी समाधान और सख्त कार्रवाई चाहती है।