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घुग्घूस में अडानी सीमेंट की मनमानी पर सिस्टम मौन क्यों?

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घुग्घूस में अडानी सीमेंट की मनमानी पर सिस्टम मौन क्यों?



स्कूल से 200 मीटर दूर प्रदूषण, कलेक्टर और PCB सीधे कठघरे में


घुग्घूस | चंद्रपुर :
घुग्घूस शहर में ACC अडानी सीमेंट कंपनी की कथित मनमानी अब सिर्फ एक औद्योगिक लापरवाही नहीं रही, बल्कि यह प्रशासनिक नाकामी और प्रदूषण नियंत्रण तंत्र की विफलता का गंभीर उदाहरण बनती जा रही है।

स्कूल जाने वाले मासूम बच्चों का स्वास्थ्य खतरे में है, लेकिन जिला प्रशासन, कलेक्टर कार्यालय और महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) अब तक खामोश दर्शक बने हुए हैं।

स्कूल के पास प्रदूषण का अड्डा, जिम्मेदार कौन?
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि माउंट कार्मेल इंग्लिश स्कूल से मात्र 200 मीटर की दूरी पर
कोयले का खुला भंडारण,
सीमेंट गिट्टी के ढेर,
और भारी वाहनों की अनियंत्रित व अवैध आवाजाही
धड़ल्ले से जारी है।

यह सब पर्यावरणीय स्वीकृति और प्रदूषण नियंत्रण नियमों का खुला उल्लंघन है।
इसके बावजूद सवाल उठ रहे हैं—
❓ जिला कलेक्टर कार्यालय ने अब तक मौके पर संयुक्त निरीक्षण क्यों नहीं किया?
❓ PCB ने कितनी बार एयर क्वालिटी और धूल प्रदूषण की जांच की? रिपोर्ट कहां है?
❓ क्या कंपनी को नोटिस, जुर्माना या काम बंद करने का आदेश दिया गया?
इन सवालों का जवाब न मिलना सीधे तौर पर प्रशासनिक संरक्षण की आशंका को जन्म देता है।
धूल-धुआं बच्चों की सांसों में, PCB की चुप्पी खतरनाक कोयला और सीमेंट से निकलने वाली PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म धूलकण बच्चों के फेफड़ों के लिए बेहद घातक माने जाते हैं।

अभिभावकों का कहना है कि बच्चों में

सांस की तकलीफ,
लगातार खांसी,
एलर्जी और दमा
जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।
इसके बावजूद PCB द्वारा कोई सार्वजनिक एयर क्वालिटी रिपोर्ट जारी नहीं की गई, जिससे यह सवाल और गंभीर हो गया है कि
👉 क्या आंकड़े छिपाए जा रहे हैं?
रेलवे गेट और ट्रैफिक: कलेक्टर की जिम्मेदारी तय
कंपनी में आने-जाने वाली मालगाड़ियों के कारण रेलवे गेट बार-बार बंद रहता है।
स्कूल जाने वाले बच्चे, मरीज और नागरिक
👉 धूप, धूल और ट्रैफिक के बीच फंसने को मजबूर हैं।

यह सीधा सवाल है

—❓ स्कूल समय में भारी वाहनों पर प्रतिबंध लगाने का आदेश कलेक्टर ने क्यों नहीं दिया?
❓ वैकल्पिक मार्ग और सुरक्षा व्यवस्था अब तक क्यों नहीं बनाई गई?
यदि कोई दुर्घटना होती है, तो उसकी सीधी जिम्मेदारी प्रशासन पर होगी, ऐसा स्थानीय नागरिकों का कहना है।
पहले जा चुकी है एक जान, फिर भी सबक नहीं?
स्थानीय लोगों ने याद दिलाया कि इसी क्षेत्र में पहले
ऊसगांव निवासी मनोज राजुरकर की सड़क दुर्घटना में मौत हो चुकी है।
आरोप है कि कंपनी द्वारा सड़क मार्ग बदलने के बावजूद
👉 कलेक्टर कार्यालय ने कोई रोड सेफ्टी ऑडिट नहीं कराया,
👉 PCB ने पर्यावरणीय प्रभाव का पुनर्मूल्यांकन नहीं किया।
हादसे के बाद भी यदि न कंपनी सुधरी, न प्रशासन जागा—तो यह घोर लापरवाही मानी जा रही है।
शिकायतें दी गईं, कार्रवाई शून्य स्थानीय नागरिकों का दावा है कि नगर परिषद,
तहसील कार्यालय, कलेक्टर कार्यालय,और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कई बार लिखित शिकायतें दी गईं।

लेकिन न तो कलेक्टर ने सख्त आदेश दिए,
न ही PCB ने दंडात्मक कार्रवाई की।
यह स्थिति साफ संकेत देती है कि कॉर्पोरेट प्रभाव के आगे प्रशासन नतमस्तक है।

नागरिकों का सीधा अल्टीमेटम

अब घुग्घूस के नागरिकों और अभिभावकों ने दो टूक चेतावनी दी है—
👉 जिला कलेक्टर स्वयं मौके का निरीक्षण करें
👉 PCB तत्काल एयर, धूल और शोर प्रदूषण की रिपोर्ट सार्वजनिक करे
👉 स्कूल के आसपास भंडारण और भारी वाहनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए
👉 नियम तोड़ने पर अडानी सीमेंट पर सख्त कानूनी कार्रवाई करे अन्यथा,
⚠️ बड़े आंदोलन, सड़क जाम और कानूनी लड़ाई का रास्ता अपनाया जाएगा।

आखिरी और सबसे बड़ा सवाल

❓ क्या कलेक्टर अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी निभाएंगे?
❓ क्या PCB बच्चों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देगा?
❓ या फिर कॉर्पोरेट ताकत के आगे सिस्टम यूं ही झुका रहेगा?
घुग्घूस अब सिर्फ बयान नहीं, ठोस कार्रवाई चाहता है।

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