चमन मेटॅलिक्स के खिलाफ आंदोलन का विजय मुनगंटीवार के हाथों नींबू सरबत पिलाकर अनशन समाप्त
घुग्घुस (जिला चंद्रपुर) |
ताड़ाली,एमआयडीसी परीसर मे स्थित चमन मेटॅलिक्स प्रा. लि. कंपनी के खिलाफ 23 मार्च से चल रहा बेमियादी आमरण अनशन आखिरकार सातवें दिन मांग पुरी होकर सफलतापूर्वक समाप्त हो गया।
स्थानीय लोगों पर हो रहे अन्याय और लंबित मांगों को लेकर लोक जनशक्ति पार्टी के जिला अध्यक्ष मनोज ठेंगणे के नेतृत्व में यह आंदोलन शुरू किया गया था।
23 मार्च से शुरू हुए इस आंदोलन ने प्रशासन और कंपनी प्रबंधन को झकझोर कर रख दिया। आंदोलन के दौरान 26 मार्च को प्रदर्शनकारियों ने अर्धनग्न प्रदर्शन और फिर ‘भीख मांगो’ आंदोलन कर अपना तीव्र आक्रोश व्यक्त किया, जिससे पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया।
मुख्य मांगें और आंदोलन का असर
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में प्रदूषण पर नियंत्रण,ठेका कर्मचारी चंद्रकांत बापुराव कासवटे की मौत पर परिवार को आर्थिक सहायता।
स्थानीय लोगों के साथ हो रहे अन्याय को रोकना
लगातार सात दिनों के कड़े अनशन के बाद प्रशासन ने इन मांगों पर गंभीरता दिखाई। इसके बाद चंद्रपुर जिला बल्लारपुर विधायक सुधीर मुनगंटीवार के हाथों आंदोलनकारियों को नींबू सरबत पिलाकर अनशन समाप्त कराया गया।
प्रदूषण से मौत तक — गंभीर आरोप
आंदोलनकारियों ने कंपनी पर आरोप लगाया कि यहां से निकलने वाला जहरीला प्रदूषण आसपास के गांवों की खेती, पशुधन और लोगों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा रहा है, लेकिन नियंत्रण के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।
सबसे गंभीर मामला ठेका कर्मचारी चंद्रकांत कासवटे की मौत का है, जो ड्यूटी से लौटते समय सड़क हादसे में मारे गए। आरोप है कि अब तक उनके परिवार को कोई आर्थिक सहायता नहीं दी गई, जिससे आक्रोश और बढ़ गया।
मजदूरों का शोषण, स्थानीय युवाओं की अनदेखी प्रदर्शनकारियों के अनुसार:
स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता नहीं
बाहरी लोगों को ज्यादा अवसर
ठेका मजदूरों को PF, समय पर वेतन और ओवरटाइम नहीं।
सुरक्षा और चिकित्सा सुविधाओं का अभाव।
मूलभूत सुविधाओं की कमी
कंपनी परिसर में: एम्बुलेंस और डॉक्टर की सुविधा नहीं।
स्वच्छ पेयजल (RO) का अभाव,शौचालयों की कमी
महिला बचत समूहों को रोजगार नहीं।
धमकियों के आरोप, कड़ी कार्रवाई की मांग
प्रदर्शनकारियों ने कंपनी के कुछ अधिकारियों पर मजदूरों को नौकरी से निकालने की धमकी देने का आरोप लगाया है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
उन्होंने चेतावनी दी है—
“यदि मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन और उग्र किया जाएगा।”
संघर्ष के बाद मिली जीत
सात दिनों तक चले इस संघर्ष के बाद आंदोलनकारियों ने जीत का दावा किया है। क्षेत्र में संतोष का माहौल है, लेकिन अब सबकी नजर प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर टिकी है।